नई दिल्ली: एशिया कप 2025 का आगाज हो चुका है और आज यानी 9 सितंबर से इस बड़े टूर्नामेंट की शुरुआत होने जा रही है। पहले मुकाबले में अफगानिस्तान और हांगकांग आमने-सामने होंगे। इसके बाद ग्रुप-बी का पहला मैच भारत और यूएई के बीच खेला जाएगा। इसी बीच भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने साफ कर दिया है कि उनकी टीम पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले में अपने आक्रामक अंदाज से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगी। भारत का अभियान बुधवार यानी 10 सितंबर से शुरू होगा, जब टीम ग्रुप-ए के अपने पहले मुकाबले में UAE की टीम से भिड़ेगी। इसके बाद रविवार, 14 सितंबर को भारतीय टीम की पाकिस्तान से भिड़ंत होगी। इस मैच का सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
जीत की कुंजी है आक्रामकता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टूर्नामेंट की पूर्वसंध्या पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने साफ कहा कि टीम इंडिया के लिए आक्रामकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा, “आक्रामकता हमेशा मैदान पर रहती है और जीतने के लिए यह बेहद जरूरी है। अगर आप जीतना चाहते हैं तो आक्रामकता के बिना काम नहीं चल सकता।” कप्तान ने आगे बताया कि टीम का माहौल बेहद सकारात्मक है और खिलाड़ी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमने बेहतरीन प्रैक्टिस सेशन किए हैं और एशिया कप की शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलना एक शानदार चुनौती होगी। सूर्या के बाद आक्रामकता पर पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने कहा कि अगर कोई आक्रामक होना चाहता है तो यह उसका फैसला है। उन्होंने कहा कि वह अपनी तरफ से किसी खिलाड़ी को इस बारे में कोई खास निर्देश नहीं देते।
एशिया कप में टीम इंडिया नहीं करेगी कोई प्रयोग
यूएई को इस टूर्नामेंट में भले ही अंडरडॉग माना जा रहा हो, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मेजबान टीम को हल्के में लेने से साफ इंकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि यूएई रोमांचक क्रिकेट खेल रही है और हाल ही में टी20आई ट्राई-सीरीज में वे कुछ मुकाबलों में जीत के बेहद करीब पहुंचे थे। ऐसे में उम्मीद है कि वे एशिया कप में भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जब सूर्या से पूछा गया कि क्या भारत शुरुआती मैच में किसी तरह का प्रयोग करेगा, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। कप्तान ने कहा कि जब आप किसी फॉर्मेट में खेलते हैं तो आपको अपनी तैयारी का स्तर पता होना चाहिए। अगर किसी चीज से नतीजे मिल रहे हैं तो उसे क्यों बदलें? जो तरीका काम कर रहा है, उसे बदलने की जरूरत नहीं है।

