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Wednesday, March 11, 2026

इंजरी और संघर्ष के बावजूद चमकीं प्यारी खाखा, इंडियन विमेंस लीग की टॉप स्कोरर

नई दिल्ली : ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के झारतरंग गांव की कच्ची पगडंडियों पर दौड़ती एक लड़की को शायद तब किसी ने गंभीरता से नहीं लिया होगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह गांव के लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थी और बस इतना जानती थी कि उसे मैदान पर दौड़ना और खेलना अच्छा लगता है। आगे चलकर वही लड़की भारतीय महिला फुटबॉल टीम की जर्सी पहनकर देश के लिए गोल करेगी, यह शायद किसी ने उस समय सोचा भी नहीं था।

दो बार घुटने की सर्जरी, इलाज के लिए लिया गया कर्ज और परिवार की जिम्मेदारियां- इन सबके बीच कोई सपना बार-बार टूटा भी तो वह और मजबूत होकर लौटा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा के सुंदरगढ़ की प्यारी खाखा ने हर मुश्किल से लड़ते हुए मैदान में वापसी की और इंडियन विमेंस लीग की टॉप स्कोरर बनकर अलग पहचान बनाई। प्यारी खाखा की कहानी सिर्फ गोल करने की नहीं, बल्कि संघर्ष, जिद और सपनों को जिंदा रखने की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय टीम एएफसी महिला एशियाई कप फुटबॉल टूर्नामेंट के ग्रुप चरण के अपने आखिरी मैच में चीनी ताइपे के खिलाफ 1-3 से हार गई। इस हार के साथ ही भारत की महिला फुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गईं। भारत ने पहली बार मेरिट के आधार पर एएफसी महिला एशियाई कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया था। इस टीम में इंडियन विमेंस लीग की टॉप स्कोरर प्यारी खाखा भी शामिल थीं।

भारतीय टीम के स्टार स्ट्राइकर ने बनाए 18 गोल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए अब तक 18 गोल करने वालीं प्यारी खाखा को बचपन से खेलों में बहुत रुचि थी। वह बचपन में गांव में लड़कों के साथ हर खेल खेला करती थीं। साल 2009 में उन्होंने फुटबॉल में कदम रखा। प्यारी खाखा ने साल 2001 में ही अपने पिता को खो दिया था। तब प्यारी करीब दो साल की थी। अभी घर में मां, एक बड़े भाई, बड़ी बहन हेमा खाखा हैं। एक बड़े भाई जनवरी 2026 में दुनिया छोड़ गए। पिता सरकारी कर्मचारी थे। मां गृहिणी हैं। पिता की मौत के बाद मां को पेंशन मिलने लगी और उसी से घर का गुजारा चलने लगा। मां ने बड़ी दिक्कतों से सभी बच्चों को बड़ा किया।

बड़ी बहन के साथ शुरू किया करियर का सफर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2009 में प्यारी और उनकी बड़ी बहन हेमा ने फुटबॉल क्लब से जुड़ीं। तब प्यारी की सोच यह थी कि इसी बहाने घर से बाहर जाने को मिलेगा और घर वाले खेलने देंगे। प्यारी खाखा ने इसके लिए बड़ी बहन को तैयार कर लिया। क्लब में मुफ्त एडमिशन मिल गया। दोनों ने क्लब स्तर से अपना करियर शुरू किया। प्यारी और हेमा ने अपने प्रदर्शन से कुछ ही दिनों में क्लब में अलग पहचान बना ली। इस कारण उन्हें स्थानीय स्तर पर होने वाली फुटबॉल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिलने लगा। वहां से ओडिशा फुटबॉल लीग में खेलने का मौका मिला।

14 साल की उम्र में भारतीय टीम का हिस्सा बनी युवा स्टार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लीग में शानदार प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला। प्यारी और हेमा राष्ट्रीय स्तर पर कई टूर्नामेंट में एकसाथ खेलीं। चूंकि प्यारी कम उम्र की थीं और बहुत ही जुझारू थीं। बहुत जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई। साल 2013 में प्यारी जब महज 14 साल की थीं तभी उन्हें भारतीय जर्सी पहनने का मौका मिला। प्यारी लगातार बेहतर होती जा रही थीं। तभी उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया जब लगा सब कुछ खत्म हो गया।

अर्थिक मुश्किलों के बावजूद कराई जरूरी सर्जरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में प्यारी इंजर्ड हो गईं, जिसके कारण उन्हें उन्हें घुटने की सर्जरी करानी पड़ी। प्यारी ने हालांकि, हिम्मत नहीं हारी और करीब आठ महीने बाद मैदान पर वापसी की। प्यारी ने अपनी फॉर्म वापस पाने के लिए खुद को पूरी तरह से झोंक दिया। वह लय में लौट चुकी थीं, लेकिन इसी बीच उन्हें एक और झटका लगा। घुटने की चोट फिर से उभर आई और 2023 में प्यारी खाखा को दोबारा सर्जरी करानी पड़ी।

दो-दो इंजरी के बाद वापसी बहुत मुश्किल होती है, लेकिन प्यारी ने तो शायद कुछ और ही ठान रखा था। वह मैदान पर लौटीं और फिर से अपना परचम लहराया। वह इंडियन विमेंस लीग की टॉप स्कोरर बनीं। प्यारी खाखा इंडियन विमेंस लीग में NITA FOOTBALL ACADEMY का हिस्सा हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन विमेंस लीग (IWL) भारत में महिला फुटबॉल की टॉप-टियर लीग है। इंडियन विमेंस लीग में उनके क्लब के 13 पॉइंट हैं और वह पॉइंट्स टेबल में तीसरे नंबर पर है। टीम ने सात में से चार मैच जीते हैं। इसमें 17 गोल दागे और 11 गोल खाए। टीम के 17 में से 10 गोल प्यारी खाखा के हैं।

आर्थिक संघर्ष में अकेली पड़ी हेमा खाखा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात प्यारी की बड़ी हेमा खाखा बताती हैं, ‘इंजरी, सर्जरी और उसके रिहैब के दौरान का समय बहुत कष्टकारी था। उस समय किसी से आर्थिक मदद नहीं मिली।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हेमा ने बताया, ‘मैं उस समय नौकरी में थी, लेकिन तब संविदा पर थी, इसलिए इतनी सैलरी भी नहीं थी कि मेडिकल में उसकी मदद कर पाती। प्यारी के इलाज के लिए हमें लोन लेना पड़ा। उस समय एक बार सर्जरी में करीब पांच-छह लाख रुपये का खर्चा आया। घर में कोई तो कमाने वाला नहीं है। और इतनी कमाई नहीं है कि मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए खुद का पैसा होता।’ यह तब है जब प्यारी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रही थीं।

खेल के जुनून ने दी नई उड़ान

दो-दो सर्जरी के बावजूद, प्यारी ने शानदार वापसी की। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस चीज़ ने मोटिवेट किया, तो हेमा ने बताया, “उसको इंडिया टीम में खेलना ही था। इसी चीज़ ने उसे मोटिवेट किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उसने कहा कि मैं अभी और खेलूंगी। मेरी अंदर अभी बहुत फुटबॉल बाकी है।” बड़ी बहन हेमा की तरह, प्यारी भी ओडिशा पुलिस में कांस्टेबल हैं। हेमा ने कहा, “प्यारी ने भारतीय टीम का इतनी बार प्रतिनिधित्व किया है तो उसका प्रमोशन होना चाहिए, लेकिन वह अब तक हुआ नहीं है। वह अब तक कांस्टेबल ही है।” हेमा 2015 से कांस्टेबल हैं और साल 2021 में स्थायी हुईं।

करियर में आगे बढ़ने और समर्थन की चाहत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हेमा ने बताया, “मेरे बड़े भाई का इस साल जनवरी में निधन हो गया। तब प्यारी इंडिया कैंप में थी। वह उन्हें आखिरी बार देख भी नहीं पाई।” परिवार की आर्थिक स्थिति भी खास नहीं है; दूसरे बड़े भाई की आमदनी सीमित है। परिवार में मां, प्यारी, एक बड़े भाई और दो भाभियां हैं। हेमा की 2022 में शादी हो चुकी है और उन पर अपने परिवार की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में प्यारी ही परिवार का मुख्य आर्थिक स्रोत हैं। हेमा चाहती हैं कि उनकी बहन का प्रमोशन हो और कोई स्पॉन्सर मिल जाए, ताकि प्यारी अपना खेल जारी रख सकें।

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