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Saturday, March 14, 2026

इतिहास रचने वाले 3 साल के शतरंज खिलाड़ी की सफलता पर विवाद, कोचों पर आरोप

नई दिल्ली: हाल ही में शतरंज में सबसे कम उम्र के रेटेड भारतीय खिलाड़ी बने तीन वर्षीय बालक की उपलब्धि पर अब सवाल उठ रहे हैं। FIDE में दर्ज एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिन खिलाड़ियों को इस छोटे खिलाड़ी ने हराया, वे उसी शहर में कोचिंग देने वाले उसके प्रशिक्षक हैं।

शिकायतकर्ता ने इसे ‘फेयर प्ले’ नियमों का संभावित उल्लंघन बताया है। वहीं, खिलाड़ी के पिता और कोच ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह स्थानीय शतरंज संघ में जारी खींचतान का परिणाम है। रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन और बढ़ते सवालों के बीच अब पूरा मामला सुर्खियों में है।

गलत तरीके से रेटिंग अर्जित करने का शॉर्टअकट आरोप

इंटरनेशनल चेस बॉडी FIDE में दर्ज शिकायत में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के सागर निवासी इस छोटे खिलाड़ी से हारने वाले तीनों विरोधी उसी अकादमी के कोच थे, जहां वह प्रशिक्षण लेता है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रेटिंग गलत तरीकों से हासिल की गई थी और इसमें कोचों या खेल संचालन करने वाले लोगों द्वारा FIDE के ‘फेयर प्ले सिद्धांतों’ का उल्लंघन किया गया।

वहीं, लड़के के पिता सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और उसके कोच नितिन चौरसिया ने कहा कि उन्हें शिकायत के बारे में पता था। आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश के चेस फेडरेशन में गुटबाजी की वजह से लड़के को टारगेट किया जा रहा था। मध्य प्रदेश चेस फेडरेशन को पिछले कुछ वर्षों से एक एड हॉक कमेटी (तदर्थ समिति) चला रही है।

पिता का दावा: मेरे बेटे को टारगेट कर रहा दूसरा गुट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा ने बताया, “सागर में स्थानीय शतरंज समिति में दो गुट हैं। एक गुट लगातार दूसरे को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है और यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि मेरे बेटे का रिकॉर्ड गलत तरीकों से हासिल किया गया है।”

पिछले कुछ महीनों में लड़के ने अपने से बड़े और बेहतर रैंक वाले खिलाड़ियों पर जीत दर्ज करके देशभर में सुर्खियां बटोरी हैं। उसने खंडवा, इंदौर, छिंदवाड़ा और मंगलुरु में हुए टूर्नामेंट में अभिजीत अवस्थी (रेटिंग 1,542), शुभम चौरसिया (रेटिंग 1,559), योगेश नामदेव (रेटिंग 1,696) को हराया।

पूरा विवाद क्या है?

शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि नितिन चौरसिया, नामदेव और अवस्थी—जिन तीन खिलाड़ियों से तीन वर्षीय बालक ने जीत दर्ज की—वही कोच हैं जो उसी अकादमी में प्रशिक्षण देते हैं जहां बच्चा सागर में सीखता है। हालांकि, इस आरोप का जवाब देते हुए बच्चे के पिता और उसके कोच ने इसे सिर्फ एक इत्तेफाक बताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है कि ये तीनों अलग-अलग अकादमियों में कोचिंग देते हैं और उनका आपस में या बच्चे की रेटिंग बढ़ाने से कोई लेना-देना नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सागर में शतरंज अकादमी (ओलंपियो चेस क्लब) चलाने वाले सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा, ‘सिर्फ इसलिए कि ये लोग सागर से हैं और हम उन्हें जानते हैं, इससे यह साबित नहीं होता कि कुछ गलत हुआ है। मैं तीनों को चेहरे से जानता हूं, क्योंकि मेरी भी शतरंज अकादमी है। वे हमारे प्रतिद्वंद्वी जैसे हैं।’

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक टूर्नामेंट में, FIDE के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से ड्रॉ तय होने के बाद लड़का और नामदेव ने इवेंट में हिस्सा लिया। जैसा कि आम बात है, देर से आने वाले दो लोगों के नाम ड्रॉ में हाथ से डाले गए और उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ खेलने के लिए जोड़ा भी गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुकाबले के दौरान लड़के ने अंत में नामदेव को हराया, और नामदेव को समय गंवाना इसलिए पड़ा क्योंकि वह 10 मिनट के रैपिड गेम के अंतिम मिनटों में वॉशरूम चले गए थे। हालांकि, लड़के के पिता और कोच सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा ने इस दावे को खारिज किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है कि नामदेव की हार का कारण वॉशरूम जाना नहीं था। उन्होंने बताया, “सिर्फ मेरा बेटा ही नहीं, और भी बच्चे देर से पहुंचे थे और उन्हें हाथ से पेयर किया गया था।”

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