Wrestling: भारतीय कुश्ती महासंघ का विवाद और, बढ़ा अब आर-पार के मूड में

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नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। डब्ल्यूएफआई ने शुक्रवार को विशेष आम बैठक (एजीएम) बुलाई और उसमें यह फैसला लिया कि अगर केंद्रीय खेल मंत्रालय उस पर लगाए निलंबन पर विचार नहीं करता है तो वह सरकारी खर्च के बिना काम करना शुरू कर देगा। खेल मंत्रालय ने संजय सिंह की अगुआई वाली नई डब्ल्यूएफआई की कार्यकारी समिति पर खेल संहिता के उल्लंघन के आरोप के चलते निलंबन लगाया हुआ है।

आईओए ने तदर्थ समिति को किया था भंग
खेल की वैश्विक संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने संजय सिंह की अगुआई वाली डब्ल्यूएफआई से निलंबन हटा दिया था। इसके बाद भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने भारत में कुश्ती का दैनिक कार्य देख रही भूपेंद्र सिंह बाजवा के नेतृत्व वाले तदर्थ समिति को भंग करने का निर्णय लिया था। आईओए द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद ही डब्ल्यूएफआई ने अपनी एजीएम आयोजित की थी।

सरकार ने नहीं हटाया डब्ल्यूएफआई से निलंबन
डब्ल्यूएफआई की नई कार्यकारी समिति के अध्यक्ष संजय सिंह को भले ही यूडब्ल्यूडब्ल्यू और आईओए से राहत मिल गई है, लेकिन केंद्र सरकार से उन्हें अबतक राहत नहीं मिली है। सरकार के अनुसार, डब्ल्यूएफआई ने नियमों का उल्लंघन किया था और चुनाव संपन्न होने के तीन बाद ही डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया गया था।

सरकार से निलंबन हटाने का अनुरोध करेगा डब्ल्यूएफआई
न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से डब्ल्यूएफआई के एक सूत्र ने कहा, एजीएम के दौरान इस बात पर सहमित बनी है कि हम सरकार से निलंबन हटाने का अनुरोध करेंगे। यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने निलंबन हटा लिया है और आईओए ने भी तदर्थ समिति भंग कर दी है इसलिए डब्ल्यूएफआई पर लगाए गए निलंबन को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है। अगर खेल मंत्रालय हमारे अनुरोध पर विचार नहीं करता है और वित्तीय सहायता प्रदान करने के खिलाफ फैसला लेता है तो हम भी सरकार से कोई खर्च लिए बिना अपना काम करेंगे।

डब्ल्यूएफआई ने अपने संविधान में किया संशोधन
एजीएम के दौरान डब्ल्यूफआई ने अपने संविधान में एक अहम संशोधन किया है। इसके अनुसार अब नए पद पर चुनाव लड़ने वाले किसी उम्मीदवार को दो तिहाई बहुमत से जीतने की जरूरत नहीं होगी। डब्ल्यूएफआई के कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनाव में संजय सिंह को अध्यक्ष पद के लिए दो तिहाई बहुमत से चुनाव जीतना जरूरी था क्योंकि वह महासंघ के पिछले कार्यकाल में संयुक्त सचिव थे।

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