नई दिल्ली: बांग्लादेश की टीम टी20 वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका से 4 रन से हार गई. उसकी इस हार में आईसीसी के एक नियम की भी बड़ी भूमिका रही. इस नियम के चलते बांग्लादेश को 4 रन का नुकसान हुआ और यही अंतर उसकी हार की भी रही. बांग्लादेश की इस हार के बाद ही आईसीसी के नियम की आलोचना हो रही है. ऐसा नहीं है कि इस नियम पर पहले सवाल नहीं उठे थे. लेकिन अब जबकि वर्ल्ड कप में ही एक नियम किसी टीम की हार-जीत का कारण बन गया है, तो इसे बदलने की मांग होने लगी है.
दक्षिण अफ्रीका ने टी20 वर्ल्ड कप के मुकाबले में बांग्लादेश को 114 रन का लक्ष्य दिया था. बांग्लादेश ने इसके जवाब में एक समय 16.1 ओवर में 4 विकेट पर 88 रन बना लिए थे. उस वक्त उसे जीत के लिए 23 गेंद पर 26 रन चाहिए थे. 17वें ओवर की दूसरी गेंद पर महमूदुल्लाह को अंपायर ने एलबीडब्ल्यू दिया. बांग्लादेशी बैटर ने डीआरएस के तहत इस फैसले को चैलेंज किया. महमूदुल्लाह का चैलेंज सही पाया गया और तीसरे अंपायर नै मैदानी अंपायर का फैसला बदल दिया. इस तरह महमूदुल्लाद नाबाद रहे.
लेकिन यह तो सिक्के का एक ही पहलू है. दूसरा पहलू यह है कि महमूदुल्लाह के पैड से टकराने के बाद फाइन लेग बाउंड्री के पार गई थी. मैदानी अंपायर द्वारा महमुदुल्लाह को आउट दिए जाने के कारण इस पर रन बनने का सवाल ही नहीं था. लेकिन जब डीआरएस के तहत महमूदुल्लाह नाबाद करार दिए गए तब भी बांग्लादेश को चौका नहीं मिला. इसकी वजह आईसीसी नियम में छिपी है. इस नियम के मुताबिक अंपायर के आउट देने के बाद ही बॉल को डेड मान लिया जाता है, भले ही यह फैसला गलत हो.
इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर मैदानी अंपायर ने महमूदुल्लाह को आउट ना दिया होता तो बांग्लादेश को 4 रन (लेग बाई) मिलते. अंपायर ने आउट दे दिया था, इसलिए ये रन नहीं मिले. यानी अंपायर की गलती का खामियाजा एक टीम (बांग्लादेश) को भुगतना पड़ा. अगर आईसीसी का यह नियम नहीं होता तो बांग्लादेश को 4 रन मिलते और फिर दोनों टीमों का स्कोर बराबर हो जाता. मैच टाई होने पर सुपरओवर होता और फिर कोई भी टीम जीत सकती थी.
वसीम जाफर ने एक्स डॉट कॉम पर लिखा, ‘महमूदुल्लाह को गलत आउट दिया गया. गेंद पैड पर लगकर बाउंड्री के बाहर गई. अंपायर का आउट देने का फैसला पलट दिया गया. लेकिन बांग्लादेश को 4 रन नहीं मिले. दक्षिण अफ्रीका की जीत का अंतर यही रहा. बांग्लादेश के फैंस से हमदर्दी है.’


