Paris Olympics: देश के मुक्केबाजों को पदक दिलाने के लिए टीम के कोच ने छोड़ दी अपने बेटे की शादी

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नई दिल्ली: पेरिस ओलंपिक में देश के मुक्केबाजों को पदक दिलाने के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम के कोच और अपने समय के नामी मुक्केबाज अर्जुन अवॉर्डी धर्मेंद्र यादव ने अपने बेटे की शादी छोड़ दी। बुलंदशहर के धर्मेंद्र के सामने बीते सप्ताह बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया कि वह बेटे की शादी में शामिल हों या सारब्रुकेन (जर्मनी) में भारतीय मुक्केबाजी टीम की तैयारियां छोड़ दें। यह उलझन सिर्फ शादी तक सीमित नहीं थी। देश के पहले पेशेवर बॉक्सर धर्मेंद्र की मां की तबियत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें आईसीयू में दाखिल कराना पड़ा था। मां के कहने पर ही पोते की शादी आनन-फानन में करनी पड़ रही थी। ओलंपिक से ठीक पहले धर्मेंद्र का तैयारियां छोड़ना ठीक नहीं था। उनकी पत्नी और बेटे ने कहा वह राष्ट्रीय कोच की भूमिका निभाएं, बाकी सब वे संभाल लेंगे।

1990 के राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य जीतने वाले धर्मेंद्र ने शादी में नहीं आने का फैसला लिया। वह मंगलवार को जर्मनी से टीम के साथ पेरिस के लिए रवाना हो गए। धर्मेंद्र शादी में थे नहीं, लेकिन उनकी पत्नी मीनू ने हर रस्म में वीडियो कॉल के जरिये उनकी मौजूदगी बनाए रखी है। जयमाल हो या आगवानी या फिर तिलक धर्मेंद्र वीडियो कॉल के जरिये मौजूद रहे।

धर्मेंद्र की पत्नी बताती हैं कि यह बेहद कठिन फैसला था, जो हम सबने मिलकर लिया। हम सब को लगा ओलंपिक से बड़ा कुछ नहीं है। उनकी वजह से टीम की तैयारियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। दरअसल मां की तबियत खराब नहीं होती तो बेटे की शादी अचानक नहीं करनी पड़ती। मां की इच्छा के लिए यह करना पड़ा। अब वह धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं। जब वह पेरिस से लौटेंगे तो बेटे की शादी का एक समारोह आयोजित करेंगे। ओलंपिक में लवलीना, निकहत, प्रीति, जैस्मिन, अमित पंघाल, निशांत देव खेलने जा रहे हैं।

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