नीरज चोपड़ा आज एक जाना-माना नाम है, लोगों ने समझ लिया था कावड़िया, क्वालिफाई न करने पर क्यों नहीं थे दुखी

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नई दिल्ली: भारत के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा आज एक जाना-माना नाम है। ओलंपिक में देश के लिए दो मेडल जीतने वाला यह खिलाड़ी भारतीय खेल इतिहास में खास जगह रखता है। नीरज ने एथलटिक्स की हर बड़ी चैंपियनशिप में देश के लिए मेडल जीता। आज वह जहां भी जाते हैं लोगों की भीड़ लग जाती है। हालांकि एक ऐसा समय भी था जब नीरज चोपड़ा वर्ल्ड चैंपियन बनकर लौटे तो लोगों ने उन्हे कावड़िया समझ लिया था।

2016 में बने थे जूनियर वर्ल्ड चैंपियन

नीरज चौपड़ा ने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में 2016 का किस्सा बताया जब वह जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनकर लौटे थे। नीरज ने पोलैंड में जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने 86.48 मीटर का थ्रो किया था जो कि वर्ल्ड रिकॉर्ड था। गोल्ड और वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करके वह भारत लौटे।

नीरज को नहीं पहचान पाए लोग

उनके गांव में जश्न मनाने की पूरी तैयारी थी। नीरज को ट्रैक्टर पर तख्त पर खड़ा किया गया। उन्हें मालाएं पहनाई गई। साथ-साथ डीजे भी बज रहा था। यह वह समय था जब लोग कावड़ लेकर आते हैं। जब नीरज का काफिला सड़क पर था। तब उनके बगल से कावड़िया जा रहे थे। उन्होंने नीरज को नहीं पहचाना। उन्हें लगा कि नीरज भी उनकी तरह कावड़िया हैं। वह नीरज को देखकर बोल-बम के नारे लगा रहे थे। उन्होंने नीरज चोपड़ा से भी नारे लगाने को कहा और ऐसा ही हुआ। कई लोग नीरज को कावड़िया ही समझते थे।

ओलंपिक क्वालिफाई न करने का दुख नहीं

इस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद वह रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाए थे। नीरज ने बताया कि उन्हें इसका ज्यादा मलाल नहीं था। नीरज ने कहा, ‘2016 में दुख नहीं हुआ था ज्यादा। जब पोलैंड में गोल्ड मिला तो मुझे लगा कि ठीक है। हां कोशिश जरूर थी कि वाइल्ड कार्ड से एंट्री हो जाए लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मैंने दुख नहीं मनाया। अंदर मुझे यह पता था कि समय है मेरे पास। क्या पता भगवान ने यही सोचा कि पहली बार ओलंपिक जाऊंगा और गोल्ड जीतूंगा। साथ ही राष्ट्र गान बजवाऊंगा।’

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