नई दिल्ली: भारत की मशहूर बैडमिंटन स्टार और ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडल विजेता साइना नेहवाल ने पति और पूर्व शटलर पारुपल्ली कश्यप से अलग होने का फैसला किया है। इस खबर की पुष्टि खुद साइना ने रविवार देर रात अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के ज़रिए की, जिसे देखकर खेल जगत और उनके प्रशंसक हैरान रह गए। लंबे समय से एक साथ रहे इस खिलाड़ी जोड़ी के अलगाव की खबर ने खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है।
बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने लिखा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साइना ने लिखा, ‘कभी-कभी जिंदगी हमें अलग रास्तों पर ले जाती है। बहुत सोच-विचार के बाद, हमने (पारुपल्ली कश्यप और मैंने) अलग होने का फैसला लिया है। हम एक-दूसरे के लिए शांति, विकास और सेहतबख्स जिंदगी का चुनाव कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं बीते पलों के लिए आभारी हूं और भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती हूं। कृपया इस समय हमारी निजता का सम्मान करें।’
गोपीचंद अकादमी से शुरू हुई थी लव स्टोरी
साइना नेहवाल और पारुपल्ली कश्यप की लव स्टोरी की शुरुआत हैदराबाद की पुलेला गोपीचंद अकादमी से हुई थी, जहां दोनों ने बचपन से एक साथ ट्रेनिंग ली थी। 14 दिसंबर 2018 को दोनों ने शादी की थी। जहां साइना ने लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया और वर्ल्ड नंबर 1 बनीं, वहीं कश्यप भी कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में गोल्ड मेडल जीतकर टॉप-10 में पहुंचे थे। दोनों की जोड़ी खेल और जीवन दोनों में एक मिसाल मानी जाती थी।
2023 के बाद नहीं खेला कोई भी टूर्नामेंट
पारुपल्ली कश्यप ने 2024 की शुरुआत में पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास ले लिया था और अब वह कोचिंग में सक्रिय हैं। साइना नेहवाल पिछले साल से ही ब्रेक पर हैं और सिंगापुर ओपन 2023 के बाद से कोई टूर्नामेंट नहीं खेला है।
2025 के अंत तक दिये थे संन्यास के संकेत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साइना ने पिछले साल गगन नारंग के पॉडकास्ट ‘हाउस ऑफ ग्लोरी’ में अपने करियर को लेकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें आर्थराइटिस की समस्या है और वह अपने भविष्य को लेकर विचार कर रही हैं। उन्होंने कहा था, ‘मैं भी इस बारे में सोच रही हूं।’ उन्होंने संकेत दिया था कि 2025 के अंत तक वह संन्यास को लेकर अंतिम फैसला लेंगी।
पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी
साइना नेहवाल भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक पदक, वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल और जूनियर वर्ल्ड टाइटल जीते हैं। उनके करियर की सफलता को भारत में बैडमिंटन के उभार का प्रमुख कारण माना जाता है।

