जब भारतीय फैंस हाथी लेकर पहुंचे थे स्टेडियम, 5वें टेस्ट से पहले याद करें स्वर्णिम पल

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नई दिल्ली: भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मुकाबलों की तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। फिलहाल इंग्लैंड इस सीरीज में 2-1 की बढ़त बनाए हुए है। आखिरी और बेहद अहम टेस्ट मैच 31 जुलाई से लंदन के ऐतिहासिक केनिंग्टन ओवल मैदान में खेला जाएगा। यह वही मैदान है जहां भारतीय क्रिकेट ने 54 साल पहले एक नई शुरुआत की थी। अगस्त 1971 में भारत ने यहीं इंग्लैंड को हराकर विदेशी ज़मीन पर अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल की थी और उसी सीरीज को जीतकर पहली बार इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज पर कब्जा जमाया था।

यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इंग्लैंड में गर्मियों का यह सेकंड हाफ था और ओवल की पिच हमेशा की तरह स्पिनर्स के लिए अनुकूल थी। भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करना पसंद करती, लेकिन अजीत वाडेकर टॉस हार गए और रे इलिंगवर्थ ने पहले बल्लेबाजी की। इंग्लैंड पहले दिन 355 रन पर ऑल आउट हो गया। दूसरा दिन बारिश की भेंट चढ़ा। तीसरे दिन के अंत में भारत ने 7 विकेट पर 234 रन बनाए। चौथे दिन सुबह उनकी पारी 284 पर समाप्त हुई।

चंद्रशेखर की फिरकी ने बदला मैच का रुख

इंग्लैंड ने लंच से ठीक पहले अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है। ओवल की पिच पर भारतीय स्पिनर भागवत सुब्रमण्य चंद्रशेखर ने अपने जादुई स्पेल से पूरी अंग्रेजी टीम को हिला दिया। उनकी कलाई से निकली गेंदों ने बल्लेबाजों को परेशान कर दिया और भारत को जीत की राह पर ला खड़ा किया। इंग्लैंड 101 रन पर ऑल आउट हो गया। चंद्रशेखर ने 18.1 ओवर में 38 रन देकर 6 विकेट लिए। भारत के पास दोपहर का बाकी समय और अगला पूरा दिन था। इसमें उसे 173 रन बनाकर इंग्लैंड में अपनी पहली जीत दर्ज करनी थी। चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक भारत ने 2 विकेट पर 76 रन बनाए थे। जीत के लिए 97 रन चाहिए थे।

ओवल में हाथी की एंट्री ने बटोरी सुर्खियां

ओवल टेस्ट के पांचवें दिन मंगलवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा था। इसी मौके पर भारतीय फैंस चेसिंगटन चिड़ियाघर से “बेला” नाम की एक हाथिनी को ओवल स्टेडियम ले आए। उनका मानना था कि गणेशजी की तरह हाथी का आना टीम इंडिया के लिए शुभ संकेत होगा। यह नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे और यह पल इतिहास में दर्ज हो गया। वह यह मैच जीत जाएगा। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार दिन का खेल शुरू होने से पहले भारतीय ड्रेसिंग रूम में मैनेजर हेमू अधिकारी और कप्तान अजीत वाडेकर अपनी टीम के लिए जरूरी 97 रन बनाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे थे। तभी अधिकारी ने मैदान पर एक हाथी को टहलते हुए देखा। वाडेकर के अनुसार अधिकारी ने कहा,”गणेश चतुर्थी को देखते हुए, यह एक शुभ संकेत है।”

अजीत वाडेकर ने ड्रेसिंग रूम में आंखें मूंदी, फिर टीम ने रच दिया इतिहास

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अजीत वाडेकर ने कहा, “मैं 45 रन पर नाबाद था और अगली सुबह बड़ी पारी की उम्मीद के साथ बल्लेबाजी करने उतरा। लेकिन दुर्भाग्यवश पहली ही गेंद पर रन आउट हो गया। पवेलियन लौटते हुए मैंने भगवान गणेश से जीत के लिए प्रार्थना की, क्योंकि उस सुबह उन्होंने दर्शन देकर हमारे लिए आशाएं जगाई थीं। बाकी सब इतिहास है।” हालांकि, भारत को इतिहास रचते वाडेकर नहीं देख पाए। वह पवेलियन लौटने के बाद सो गए थे। आबिद अली का विनिंग शॉट वह नहीं देख पाए।

विजेता टीम का भव्य स्वागत

ओवल टेस्ट में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद अजीत वाडेकर को इसकी जानकारी इंग्लैंड के मैनेजर केन बैरिंगटन ने दी। बैरिंगटन उन्हें खुद बधाई देने पहुंचे और नींद से जगाया। उस वक्त ओवल स्टेडियम का माहौल जश्न में डूबा हुआ था, हर तरफ खुशी की लहर थी। कैंपबेल पेज ने ऑब्जर्वर में लिखा,” ऐसा लग रह था लंदन में हर भारतीय पर्यटक, व्यापारी, वेटर और स्कूली छात्र ओवल में मौजूद था।” जब टीम भारत लौटी तो उनकी विमान को दिल्ली मोड़ दिया गया ताकि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दे सकें। फिर टीम मुंबई पहुँची, जहां लगभग 15 लाख लोग सड़कों पर खड़े थे और उन पर फूल फेंक रहे थे, जब उन्हें खुली कारों में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में एक स्वागत समारोह में ले जाया जा रहा था।

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