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सीएम ने भगवान राम के साथ-साथ कृष्ण जी के संस्मरण भी सुनाएं…
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आने वाले समय में मध्यप्रदेश खेल के क्षेत्र में देश का नंबर 1 राज्य बनेगा: खेल मंत्री विश्वास सारंग
(NST News) भोपाल। राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में मंगलवार को शिखर खेल अलंकरण समारोह और 38वें नेशनल गेम्स 2025 के पदक विजेता खिलाड़ियों के सम्मान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए कहा कि जैसे उन्होंने पिनाक धनुष तोड़ा, वैसे ही खिलाड़ी भी साहस और पराक्रम से प्रदर्शन करें। इस मौके पर उन्होंने श्री कृष्णा जी के संस्मरण भी खिलाड़ियों को सुनाएं और कहा कि उनसे प्रेरणा लेने की हमें बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी लोकतंत्र को गौरवांवित करते हैं और खेल हमें नकारात्मकता से दूर ले जाते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि मध्यप्रदेश में फुटबाल को बढ़ावा देने के लिए लालिगा फुटबाल लीग के साथ एमओयू किया जा रहा है, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है। कार्यक्रम में खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश का नंबर एक खेल राज्य बनेगा। हम नेशनल गेम्स में इस बार तीसरे नंबर पर आए हैं लेकिन अगले नेशनल गेम में हमारा लक्ष्य नंबर वन होगा। कार्यक्रम में मप्र ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रमेश मेंदोला, खेल संचालक राकेश गुप्ता, खेल सचिव मनीष सिंह, उप संचालक बीएस यादव और ओलंपिक संघ के सचिव दिग्विजय सिंह समेत अनेक अधिकारी और खिलाड़ी मौजूद रहे। इस मौके पर संयुक्त खेल संचालक बीएस यादव ने मुख्यमंत्री, खेलमंत्री खिलाड़ियों,पत्रकारों एवं कार्यक्रम में पधारे भारी संख्या में खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों का आभार प्रकट किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने विक्रम अवार्ड प्राप्त खिलाड़ियों के साथ-साथ 82 नेशनल गेम्स पदक विजेताओं को सम्मानित किया। जिनमें 34 स्वर्ण, 25 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल हैं। इसके अलावा, इस वर्ष 12 सीनियर खिलाड़ियों को विक्रम पुरस्कार, 11 जूनियर खिलाड़ियों को एकलव्य पुरस्कार, 3 कोचों को विश्वामित्र पुरस्कार और उज्जैन के जिम्नास्ट रतनलाल वर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया। विक्रम और विश्वामित्र पुरस्कार में 2-2 लाख रुपये व स्मृति चिन्ह, जबकि एकलव्य पुरस्कार में 1 लाख रुपये प्रदान किए गए। समारोह में खिलाड़ियों के उत्साह और सरकार की खेल नीति की झलक साफ दिखी।
एकलव्य पुरस्कार के अंतर्गत 11 उभरते खिलाड़ियों को 1 लाख रुपये की सम्मान राशि और प्रशस्ति पत्र दिया गया। इनमें टीकमगढ़ के रितुराज बुंदेला (शूटिंग), महेश्वर की भूमि बघेल (कायकिंग/केनोइंग), इंदौर के कृष्णा मिश्रा (स्क्वैश) और प्रखर जोशी (तैराकी), राजगढ़ की पूजा दांगी (फेंसिंग), ग्वालियर के प्रभाकर सिंह राजावत (रोइंग) और अंकित पाल (हॉकी), देवास की नेहा ठाकुर (सेलिंग), खरगोन के अर्जुन वास्कले (एथलेटिक्स), उज्जैन की प्रियांशी प्रजापत (कुश्ती) और मुरैना के गौरव पचैरी (पावरलिफ्टिंग) शामिल हैं।

विक्रम पुरस्कार से 12 वरिष्ठ खिलाड़ियों को नवाजा गया। इन्हें 2 लाख रुपये की सम्मान राशि दी गई। पुरस्कार पाने वालों में शूटर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर,जबलपुर की रागिनी मार्को (तीरंदाजी), रूबिना फ्रांसिस (शूटिंग), श्रुति यादव (बॉक्सिंग), कुश्ती की खिलाड़ी शिवानी पवार, जुडो की यामिनी मौर्य, खो-खो के सचिन भार्गव, हॉकी की नीलू डांडिया, सॉफ्टबॉल के प्रवीण दवे, पावरलिफ्टर अपूर्व दुबे, और क्याकिंग की जाह्नवी श्रीवास्तव प्रमुख नाम हैं।
विश्वामित्र पुरस्कार के तहत कोचिंग में उत्कृष्ट योगदान के लिए भोपाल के पीजूष कांती बरौई, जबलपुर के अशोक यादव और लोकेन्द्र शर्मा को 2 लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार इस बार उज्जैन के वरिष्ठ जिम्नास्टिक प्रशिक्षक रतनलाल वर्मा को मिला, जिनकी खेल में दीर्घकालीन सेवाओं के लिए उन्हें 2 लाख रुपये की सम्मान राशि के साथ सम्मानित किया गया।

खेल मंच पर सम्मानित खिलाड़ियों ने कहा
मेरे करियर में इस अवार्ड की काफी अहम भूमिका है। इसने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाया है। फिलहाल मैं अपनी पढ़ाई पूरी करूंगी, लेकिन मेरा अगला लक्ष्य अब विक्रम अवॉर्ड हासिल करना है। मैं लगातार मेहनत कर रही हूं और चाहती हूं कि राज्य और देश के लिए और भी बेहतर प्रदर्शन करूं।
– प्रियांशी प्रजापत (कुश्ती, एकलव्य पुरस्कार विजेता)
मुझे जब राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में पदक मिला, तो लगा अब मुझे मप्र को भी गौरव दिलाना है। विक्रम पुरस्कार से मुझे यह अहसास हुआ कि मेरा राज्य भी मेरे साथ खड़ा है। अब मेरा ध्यान पूरी तरह ओलंपिक पर है।
– ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर (विक्रम पुरस्कार विजेता, निशानेबाजी)
मैं छोटे शहर से आती हूं, लेकिन मेरा सपना बड़ा था। यह पुरस्कार मेरे गांव और मेरे माता-पिता के संघर्ष की जीत है। मैं अब देश के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना चाहती हूं। इस सम्मान ने मेरी जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।
– पूजा दांगी (एकलव्य पुरस्कार विजेता, फेंसिंग)

