नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज, रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों खिलाड़ी 2024 में टी20 और 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। उनकी अनुपस्थिति में इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के बेहतरीन प्रदर्शन ने वनडे क्रिकेट में उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पर भारत के पूर्व ओपनर और चयनकर्ता देवांग गांधी का कहना है कि युवा खिलाड़ी अब किसी भी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रोहित और विराट के वनडे वर्ल्ड कप 2027 खेलने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट कहा— “समय किसी का इंतजार नहीं करता।”
सीनियर खिलाड़ियों की वापसी पर चयन दुविधा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में देवांग गांधी ने कहा, “यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ियों को आप बाहर कैसे बिठाएंगे, जबकि उन्होंने दिखा दिया है कि वे परिस्थितियों के अनुसार ढलने में कितने माहिर हैं? टी20 से टेस्ट में आने पर बड़ा बदलाव होता है। एक बार जब कोई खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर लेता है और पावर गेम में माहिर हो जाता है, तो वनडे उसके लिए आसान हो जाना चाहिए। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि चयनकर्ता और टीम प्रबंधन मिलकर कोई ठोस फैसला लें।”
आगे के लिए सवाल: विराट और रोहित की फिटनेस और फॉर्म
देवांग गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि खिलाड़ियों के लिए नियमित मैच खेलना बेहद जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने चयनकर्ताओं से आग्रह किया कि वे ईमानदारी से आकलन करें कि क्या विराट कोहली और रोहित शर्मा अगले दो वर्षों तक लगातार अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गांधी ने कहा, “मान लीजिए एक साल बाद हम ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं कि इनमें से कोई एक खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा हो और हमें उसकी जगह किसी और की जरूरत पड़ जाए, तो टीम प्रबंधन के पास उस पोजिशन के लिए खिलाड़ी तैयार करने का पर्याप्त समय नहीं होगा। रोहित और विराट के योगदान पर कोई शक नहीं, लेकिन समय किसी का इंतजार नहीं करता।”
लगातार अच्छे प्रदर्शन से बनाई पहचान
कप्तानी का सवाल भी उतना ही अहम है और चयनकर्ताओं के लिए इस पर फैसला लेना जरूरी है। शुभमन गिल पहले ही टेस्ट मैचों में अपनी कप्तानी की क्षमता साबित कर चुके हैं। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए, 59.04 की औसत और 99.56 के स्ट्राइक रेट के साथ वे निस्संदेह भारत के सर्वश्रेष्ठ वनडे बल्लेबाज हैं। उनके निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें टीम में सम्मान और भरोसा दिलाया है, जिससे वनडे कप्तानी उनके लिए स्वाभाविक और उपयुक्त विकल्प बन गई है।

