नई दिल्ली: भारत के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट डेब्यू का मौका नहीं मिल सका। शुरुआती कुछ मैचों में टीम प्रबंधन ने उन पर विचार नहीं किया और जब मौका मिल सकता था, उससे पहले ही वह चोटिल हो गए। बाएं अंगूठे में चोट लगने के कारण अर्शदीप को मैनचेस्टर में खेले गए चौथे टेस्ट से बाहर होना पड़ा। हालांकि, उन्होंने ओवल में होने वाले पांचवें और अंतिम टेस्ट से पहले फिटनेस हासिल कर ली थी, लेकिन इसके बावजूद टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम ग्यारह में शामिल नहीं किया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई में बुची बाबू टूर्नामेंट के दौरान मौजूद पंजाब के गेंदबाजी कोच गगनदीप सिंह ने स्वीकार किया कि इंग्लैंड दौरे पर इंतजार ने अर्शदीप सिंह के धैर्य की कड़ी परीक्षा ली। गगनदीप ने बताया, “कुछ महीने पहले जब वह इंग्लैंड में थे, तो मेरी उनसे बात हुई थी। वह इस बात से बेचैन थे कि उन्हें खेलने का मौका नहीं मिल रहा। मैंने उन्हें समझाया कि सही समय का इंतजार करना जरूरी है। मुझे लगता है इंग्लैंड में उन्हें खिलाना चाहिए था, क्योंकि वह स्विंग गेंदबाज हैं और लंबे कद के साथ पिच से मदद ले सकते हैं। लेकिन शायद टीम संयोजन और कोच (गौतम गंभीर) व कप्तान (शुभमन गिल) का भरोसा उन पर नहीं था।”
अर्शदीप को टेस्ट टीम में जगह पाने के लिए किन चुनौतियों से गुजरना होगा
भारत के लिए 2022 में छोटे प्रारूप में डेब्यू कर चुके अर्शदीप सिंह अभी तक टेस्ट कैप हासिल नहीं कर पाए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसको लेकर पंजाब के गेंदबाजी कोच गगनदीप सिंह ने कहा, “वह और स्विंग और सटीकता के साथ एक बेहतर गेंदबाज बन सकते हैं। मैंने उन्हें पिछले कुछ महीनों से नहीं देखा है, लेकिन जब मिलूंगा तो बेहतर आकलन कर पाऊंगा। हाल के मैचों में जो देखा है, उससे साफ है कि वह अपनी लाइन-लेंथ, यॉर्कर गेंदों और खासकर बाउंसर पर ज्यादा काम कर सकते हैं। यही वो गेंदें हैं जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा असर डालती हैं।”
गगनदीप ने अर्शदीप की हुनर निखारने में निभाई अहम भूमिका
गगनदीप ने 2021 और 2022 के घरेलू सीजन में पंजाब टीम के साथ रहते हुए अर्शदीप के हुनर को निखारने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को बड़ा मौका मिला। गगनदीप ने उस समय युवा अर्शदीप को लाइन और लेंथ, स्पॉट बॉलिंग और कलाई की पोज़िशन की बारीकियां सिखाईं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया, “जब मैं पंजाब टीम से जुड़ा, तब अर्शदीप मुख्य रूप से टी20 क्रिकेट खेल रहे थे। उस समय वह स्टंप से दूर गेंदबाजी करते थे और धीमी गेंदों पर ज्यादा निर्भर रहते थे, लेकिन रेड बॉल क्रिकेट में यह तरीका कारगर नहीं होता। इसलिए हमने उनकी लाइन और लेंथ को मजबूत करने, स्पॉट बॉलिंग पर ध्यान देने और कलाई की स्थिति सुधारने पर काम किया। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि गेंद लगातार सीम पर गिरे और वह कटर पर निर्भर रहने के बजाय नैचुरल स्विंग का इस्तेमाल करें।”

