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Monday, March 16, 2026

Football: AIFF पर फिर मंडराया प्रतिबंध का खतरा, फीफा और एएफसी ने तय की समय-सीमा

नई दिल्ली: भारतीय फुटबॉल पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का खतरा गहराने लगा है। वैश्विक संचालन संस्था फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) ने संकटग्रस्त अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि उसे 30 अक्तूबर तक नया संविधान अपनाकर उसकी पुष्टि करनी होगी। निर्धारित समयसीमा का पालन न करने की स्थिति में भारत को निलंबन का सामना करना पड़ सकता है।

एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे को मंगलवार को लिखे गए दो पन्नों के कड़े पत्र में फीफा और एएफसी ने महासंघ द्वारा अपने संविधान को अंतिम रूप न दे पाने पर ‘गहरी चिंता’ जताई। दोनों संस्थाओं ने कहा कि 2017 से मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित होने के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इस बीच, शीर्ष अदालत गुरुवार को इस मुद्दे पर सुनवाई करने वाली है, जिस पर पूरे भारतीय फुटबॉल जगत की निगाहें टिकी हैं।

अगर एआईएफएफ समयसीमा का पालन करने में विफल रहता है तो इसका गंभीर असर भारतीय फुटबॉल पर पड़ेगा। निलंबन की स्थिति में राष्ट्रीय टीमें और क्लब सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिए जाएंगे और अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक खेलों के लिए भारत की महत्वाकांक्षी बोली भी संकट में पड़ सकती है। फीफा और एएफसी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चौबे के नेतृत्व वाला एआईएफएफ उच्चतम न्यायालय से संशोधित संविधान को मंजूरी दिलाए, उसे फीफा और एएफसी के अनिवार्य नियमों के अनुरूप बनाए और 30 अक्तूबर की समयसीमा से पहले आम सभा की अगली बैठक में इसकी पुष्टि करे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित कार्यक्रम का पालन न करने की स्थिति में मामला फीफा की निर्णय लेने वाली संबंधित संस्था को भेजा जाएगा, जहां निलंबन सहित कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस कड़े पत्र पर फीफा के मुख्य सदस्य संघ अधिकारी एल्खान मामादोव और एएफसी के उप महासचिव (सदस्य संघ) वाहिद कर्दानी के संयुक्त हस्ताक्षर हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की गंभीरता साफ झलकती है।

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय फुटबॉल को इस तरह की शर्मिंदगी झेलनी पड़ी हो। अगस्त 2022 में फीफा ने भारत को ‘तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप’ के आरोप में निलंबित कर दिया था, जब उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने अस्थायी रूप से एआईएफएफ का संचालन संभाल लिया था। उस निलंबन ने भारत में फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 की मेजबानी तक को संकट में डाल दिया था।

यह प्रतिबंध देश की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के जश्न के दौरान लगाया गया था लेकिन सीओए के भंग होने और चुनाव होने के दो सप्ताह के भीतर इसे हटा लिया गया था। चुनावों में चौबे ने एकतरफा परिणाम में दिग्गज फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया को हराया था। विश्व निकायों ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के संशोधित संविधान को अंतिम रूप देने और लागू करने में निरंतर विफलता’ पर चिंता व्यक्त की। यह मामला 2017 से भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पत्र में कहा गया है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद, एक स्पष्ट और अनुपालनकारी प्रशासनिक ढांचे के अभाव ने भारतीय फुटबॉल के मूल में शून्यता और कानूनी अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं। इसे ‘लंबे समय से चल रहे गतिरोध’ के रूप में वर्णित करते हुए पत्र में कहा गया कि इससे प्रशासन और संचालन में संकट उत्पन्न हुआ है। इसके परिणामस्वरूप क्लब और खिलाड़ी घरेलू प्रतियोगिता कैलेंडर को लेकर अनिश्चित हैं, दिसंबर 2025 के बाद व्यावसायिक साझेदारियां अभी तक तय नहीं हुई हैं और विकास, प्रतियोगिताओं और विपणन से संबंधित आवश्यक कार्य लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।

वित्तीय स्थिरता की कमी और ‘भारत के फुटबॉल पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके गहरे नकारात्मक प्रभाव’ की चिंता व्यक्त करते हुए फीफा और एएफसी ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में भाग लेने वाले क्लबों के खिलाड़ियों पर पड़ने वाले असर को भी गंभीर माना है। पत्र में कहा गया है कि उन्हें फिफाप्रो से यह रिपोर्ट मिली है कि विभिन्न क्लबों द्वारा खिलाड़ियों के अनुबंध एकतरफा रूप से समाप्त किए जा रहे हैं, जो मौजूदा गतिरोध का प्रत्यक्ष परिणाम है और इससे खिलाड़ियों की आजीविका तथा करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

फीफा और एएफसी ने एआईएफएफ को समयसीमा के भीतर तीन तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि एआईएफएफ को उच्चतम न्यायालय से संशोधित संविधान को मंजूरी दिलानी होगी, इसे फीफा और एएफसी के नियमों और विनियमों के अनिवार्य प्रावधानों के साथ पूर्ण रूप से अनुकूल बनाना होगा और अगली आम बैठक में संविधान की औपचारिक पुष्टि सुनिश्चित करनी होगी। इन कदमों के पालन से ही भारत पर संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध से बचा जा सकेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पत्र में कहा गया, ‘एआईएफएफ के निलंबन का परिणाम फीफा और एएफसी के सदस्य के रूप में उसके सभी अधिकारों का नुकसान होगा जैसा कि फीफा और एएफसी के नियमों में परिभाषित है।’ उच्चतम न्यायालय गुरुवार को एआईएफएफ और उसके वाणिज्यिक साझेदार फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) के बीच मास्टर राइट्स समझौते से संबंधित मामले की सुनवाई करने वाला है। यह समझौता आठ दिसंबर को समाप्त हो रहा है।

एफएसडीएल ने पिछले महीने करार नवीनीकरण को लेकर अनिश्चितता का हवाला देते हुए आगामी सत्र को रोक दिया था। इस फैसले के परिणामस्वरूप कम से कम तीन क्लबों को अपना परिचालन स्थगित करना पड़ा या खिलाड़ियों और कर्मचारियों को वेतन में देरी का सामना करना पड़ा। सभी 11 इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लबों ने ‘अस्तित्व के संकट’ की चेतावनी दी। इस पर उच्चतम न्यायालय ने 22 अगस्त को एआईएफएफ और एफएसडीएल को अंतरिम उपाय तय करने के लिए बातचीत की अनुमति दी, ताकि आगामी सत्र समय पर शुरू किया जा सके।

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