नई दिल्ली: टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए आठवें सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। लंबे समय तक नंबर-3 पर टीम को योगदान देने वाले पुजारा ने राहुल द्रविड़ की कमी को कभी महसूस नहीं होने दिया। हालांकि, पिछले दो साल से वह भारतीय टीम से बाहर थे और नंबर-3 की स्थिति आज भी अस्थिर बनी हुई है, जिसमें कई खिलाड़ियों को इस स्थान पर आजमाया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय टेस्ट टीम में चयन की कड़वी सच्चाई उजागर की। जब उनसे पूछा गया कि क्या पारंपरिक बल्लेबाजी का तरीका टेस्ट क्रिकेट में खत्म हो जाएगा, तो पुजारा ने कहा कि आजकल टेस्ट टीम में चयन मुख्य रूप से आईपीएल, टी20 और वनडे प्रदर्शन के आधार पर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का चयन बहुत कम होता है, जिसके चलते नए दौर के खिलाड़ी अधिकतर आक्रामक शैली की बल्लेबाजी पर ध्यान दे रहे हैं।
चेतेश्वर पुजारा ने क्या कहा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चेतेश्वर पुजारा ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय टेस्ट टीम में चयन ज्यादातर खिलाड़ियों के टी20, आईपीएल या वनडे प्रदर्शन पर आधारित होता है। रणजी ट्रॉफी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद केवल कुछ ही खिलाड़ियों को मौका मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल गेंदबाज भी सफेद गेंद वाले प्रारूप से टेस्ट क्रिकेट में आ रहे हैं। इसीलिए आधुनिक बल्लेबाजों की ताकत आक्रामक खेल में निहित है, जबकि वे आवश्यकता पड़ने पर गेंद को डिफेंड या छोड़ने की कला भी सीख रहे हैं।
चेतेश्वर पुजारा ने भविष्य के टेस्ट क्रिकेट पर दिया नजरिया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चेतेश्वर पुजारा ने कहा कि आज के युवा क्रिकेटर सभी प्रारूपों में खेलने का लक्ष्य रखते हैं। वे टेस्ट क्रिकेट में खेलना चाहते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता आईपीएल में चयन या भारत के लिए सीमित ओवरों के मैच खेलना होती है। जैसे ही उन्हें टेस्ट में मौका मिलता है, वे टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं। इसी वजह से खेल का ध्यान सीमित ओवरों के क्रिकेट पर केंद्रित हो गया है। पुजारा का मानना है कि अगले 5 से 10 वर्षों में हम और भी अधिक आक्रामक टेस्ट क्रिकेट देखेंगे।
रणजी प्रतिभाओं को भी मिलेगा मौका
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुजारा ने कहा, “फिलहाल, खेल में अभी भी समझदारी दिखाई जा रही है। खिलाड़ी स्थिति का मूल्यांकन करके फिर काउंटर अटैक कर रहे हैं। मुझे लगता है कि खेल का स्ट्राइक रेट बढ़ेगा, लेकिन यह तभी संभव है जब पिच सपाट हो। चुनौतीपूर्ण पिच पर आक्रामक क्रिकेट जारी रखना मुश्किल होता है। इसलिए, अगर कोई पारंपरिक टेस्ट खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी से निकलता है, तो मुझे लगता है कि उसके पास भारत की टेस्ट टीम में योगदान देने का मौका अभी भी मौजूद है।”

