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Saturday, March 14, 2026

डॉ. शुक्ला केएआई दक्षिण पश्चिम के चेयरमेन बने, 20 हजार युवाओं को कराते से जोड़ने का संकल्प लिया

भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्शल आर्ट्स का परिदृश्य अब बड़े बदलाव की ओर है। कराटे को गली-कूचों से निकालकर राज्य की जड़ों तक पहुँचाने के निर्णायक प्रयास में कराटे एसोसिएशन ऑफ इंडिया (केएआई), मध्य प्रदेश ने 30 सितम्बर 2025 को भोपाल स्थित ग्राम्य मुख्यालय में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की। बड़ी घोषणा यह रही कि डॉ. पंकज शुक्ला को केएआई के दक्षिण-पश्चिम ज़ोन का चेयरमेन नियुक्त किया गया है।

यह कदम क्षेत्र में प्रतिभा को निखारने के तौर-तरीक़ों को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के लिए यह राष्ट्रीय पहचान हासिल करने का मंच साबित हो सकता है। डॉ. शुक्ला ने पदभार संभालते ही अपना एजेंडा स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य छोटा नहीं है—सिर्फ इस साल हम 20,000 नए प्रशिक्षुओं को तैयार करेंगे।” इसका अर्थ है कि हर महीने लगभग 1,700 नए युवा कराटे प्रशिक्षण से जुड़ेंगे। इस लक्ष्य को पाने के लिए केएआई एमपी अगले तीन महीने में अपने प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या दोगुनी करेगा। राज्य के खेल इतिहास में इतनी बड़ी पहल पहले कभी नहीं हुई और उम्मीद है कि 2025-26 सीज़न के लिए नए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की बड़ी संख्या सामने आएगी।नए चेयरमेन का सबसे साहसी कदम आदिवासी अंचलों पर ध्यान केंद्रित करना है। मण्डला, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे ज़िलों में विशेष कराटे प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। डॉ. शुक्ला ने स्पष्ट कहा, “आदिवासी युवा अनुशासन, ताक़त और साहस के प्रतीक हैं। कराटे के माध्यम से वे न केवल आत्मरक्षा और खेल में उत्कृष्टता हासिल करेंगे, बल्कि भारत की छवि को वैश्विक मंच पर ऊँचाई देंगे।” अब तक इन क्षेत्रों की उपेक्षा होती रही है। यह पहल पहली बार इस कच्ची प्रतिभा को सीधे प्रतिस्पर्धात्मक मंच तक ले जाएगी। महिला सशक्तिकरण डॉ. शुक्ला के मिशन का मूल है। उनकी पहल “श्रृंगार बने हथियार” का उद्देश्य बेटियों को कराटे के माध्यम से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान करना है।

उन्होंने कहा, “देश की हर बेटी को आत्मरक्षा सीखनी चाहिए।” इस संदेश ने खेल को सुरक्षा और गरिमा से जोड़ दिया। बैठक में आगामी गतिविधियों का भरा-पूरा कैलेंडर भी जारी हुआ। केएआई एमपी हर साल एक राज्य स्तरीय चैम्पियनशिप आयोजित करेगा, नियमित ज़िला स्तरीय प्रतियोगिताएँ होंगी, लगातार टैलेंट हंट कार्यक्रम चलेंगे और बेल्ट सर्टिफिकेशन टूर्नामेंट भी होंगे। केएआई अध्यक्ष वैकुंठ सिंह ने बड़े विज़न को सामने रखते हुए कहा, “कराटे केवल खेल नहीं है—यह अनुशासन है, आत्मरक्षा का साधन है और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। इसे हर स्कूल और हर गाँव तक पहुँचना चाहिए।” सत्र के अंत में केएआई एमपी अध्यक्ष जयदेव शर्मा ने इस नियुक्ति और रोडमैप को “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया और सामूहिक संकल्प का आह्वान किया ताकि मध्य प्रदेश कराटे को अभूतपूर्व ऊँचाइयों तक ले जाया जा सके। 20,000 प्रशिक्षुओं की कतार, आदिवासी प्रतिभा का उभार और सशक्त महिलाओं की नई पीढ़ी के साथ, मध्य प्रदेश अब केवल राष्ट्रीय मंच नहीं, बल्कि निकट भविष्य में वैश्विक अखाड़े पर भी छाने की तैयारी में है।

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