नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। इसका असर क्रिकेट मैदान पर भी साफ देखने को मिला। एशिया कप के दौरान पहले खिलाड़ियों का हाथ न मिलाना चर्चा में रहा, और फिर भारत को ट्रॉफी न मिलने को लेकर भी बड़ी कंट्रोवर्सी खड़ी हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब इस पूरे घटनाक्रम पर इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर माइकल एथरटन का बयान सामने आया है, जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। एथरटन का मानना है कि आईसीसी, ब्रॉडकास्टर्स और स्पॉन्सर्स को भारत-पाकिस्तान के बीच लीग स्टेज में कोई भी मुकाबला नहीं रखना चाहिए। उनके इस बयान पर कई प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीसीसीआई के एक अधिकारी ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
माइकल एथरटन ने भारत-पाक मैचों को लेकर क्या कहा?
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथरटन ने एशिया कप में हुए विवाद के बाद क्रिकेट की गरिमा को ठेस पहुंचने का हवाला देत हुए यह बयान दिया है। उनके मुताबिक क्रिकेट के सहारे कूटनीतियों का पहिया आगे बढ़ाया जा रहा है। इसलिए उन्होंने साफतौर पर कहा,’ अब सही समय आ गया है कि अब इस पूर्व निर्धारित चीजों को खत्म कर दिया जाए कि आईसीसी टूर्नामेंट में कम से कम एक बार भारत और पाकिस्तान का भिड़ना जरूरी है। अगर क्रिकेट पहले डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाने का साधन था तो अब साफतौर पर तनाव और प्रपोगंडा बनाने का मंच बन गया है।’ माइकल एथरटन ने अपने बयान में आईसीसी से अपील करते हुए कहा कि अगले आईसीसी टूर्नामेंट का कार्यक्रम निष्पक्षता के साथ तैयार किया जाना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “यह जरूरी नहीं कि हर बार भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला कराया ही जाए। अगर दोनों टीमें नहीं खेल सकतीं, तो शेड्यूल में बदलाव नहीं होना चाहिए।”
माइकल एथरटन ने अपने बयान में आईसीसी से अपील करते हुए कहा कि अगले आईसीसी टूर्नामेंट का कार्यक्रम निष्पक्षता के साथ तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह जरूरी नहीं कि हर बार भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला कराया ही जाए। अगर दोनों टीमें नहीं खेल सकतीं, तो शेड्यूल में बदलाव नहीं होना चाहिए।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत-पाक मैच को जानबूझकर शेड्यूल में रखा जाता है ताकि ब्रॉडकास्टर्स और स्पॉन्सर्स को अधिक लाभ हो, लेकिन यह तरीका निष्पक्ष नहीं है। एथरटन ने दोहराया कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव की वजह से वे आईसीसी टूर्नामेंट्स के अलावा द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलते। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय था जब क्रिकेट बातचीत और रिश्तों को सुधारने का जरिया हुआ करता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। चैंपियंस ट्रॉफी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने तब सभी मैच दुबई में खेले थे और वह भी काफी जद्दोजहद के बाद संभव हो पाया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माइकल एथरटन के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। अधिकारी ने कहा कि इस तरह की बातें करना आसान है, लेकिन क्या स्पॉन्सर्स और ब्रॉडकास्टर्स ऐसे फैसलों को स्वीकार करेंगे? आज के दौर में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अगर कोई भी बड़ी टीम आईसीसी टूर्नामेंट से हटती है, तो स्पॉन्सरशिप और ब्रॉडकास्टिंग डील्स पर बड़ा असर पड़ता है। ऐसे में आयोजन को सफल बनाना बेहद कठिन हो जाता है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा हालात को देखते हुए एथरटन की बात पूरी तरह गलत नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के चलते खेल भावना पर भी असर पड़ रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आईसीसी एथरटन की इस राय पर विचार करता है और भविष्य में टूर्नामेंट शेड्यूल बनाते समय निष्पक्षता बरतता है या नहीं। लेकिन अगर भारत-पाक मैचों को शेड्यूल से हटाया जाता है, तो यह फैसला दोनों देशों के क्रिकेट फैंस के लिए निश्चित रूप से निराशाजनक होगा, क्योंकि दुनिया भर के प्रशंसक इस हाई-वोल्टेज मुकाबले का बेसब्री से इंतजार करते हैं।


