नई दिल्ली: वेस्टइंडीज के खिलाफ शुक्रवार, 10 अक्टूबर से दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम शुभमन गिल की कप्तानी में पहली टेस्ट सीरीज जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी। पहले टेस्ट में मिली बड़ी जीत ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है और घरेलू हालात में भारत और भी मज़बूत नजर आ रहा है। वेस्टइंडीज की टीम पहले से ही कमजोर दिख रही है, ऊपर से दिल्ली की पिच और भारत का रिकॉर्ड भी मेज़बानों के पक्ष में जाता है। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला जीतकर सीरीज पर कब्ज़ा जमाना ज्यादा मुश्किल नहीं होना चाहिए।
वेस्टइंडीज ने भारत को आखिरी बार 26 टेस्ट पहले 2002 में हराया था। इसके बाद से भारत 9 बार सीरीज जीता है।फिरोज शाह कोटला स्टेडियम (अब अरुण जेटली स्टेडियम) में भारतीय टीम टेस्ट मैच मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के पहले से नहीं हारी है। तेंदुलकर का डेब्यू 1989 में हुआ था और दिल्ली में भारत आखिरी बार 1987 में हारा था। वेस्टइंडीज ने ही उसे 5 विकेट से हराया। तब भारत के कप्तान दिलीप वेंगसरकर और कैरेबियाई टीम के कप्तान विवियन रिचर्ड्स थे।
टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन से दिल्ली गायब
इसके बाद से दिल्ली में भारतीय टीम अजेय रही है। 11 में उसे जीत मिली है और 2 मैच ड्रॉ रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भारतीय टीम उतरेगी तो उसकी प्लेइंग 11 में कोई दिल्ली का खिलाड़ी नहीं होगा। पिछली बार 2008 में दिल्ली में भारतीय टीम बगैर किसी दिल्ली के खिलाड़ी के खेली थी। भारत-पाकिस्तान के बीच 18 साल पहले कोटला में खेले गए टेस्ट मैच में दिल्ली का कोई खिलाड़ी नहीं था।
कोटला में वेस्टइंडीज का इतिहास रहा है शानदार
वेस्टइंडीज का अरुण जेटली स्टेडियम (पहले का फिरोजशाह कोटला) में एक गौरवशाली रिकॉर्ड रहा है। कैरेबियाई टीम ने 20वीं सदी में इस ऐतिहासिक मैदान पर कुल छह टेस्ट मैच खेले, और एक बार भी हार का सामना नहीं किया। दिसंबर 1974 और नवंबर 1987 में वेस्टइंडीज ने यहां दो मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि बाकी मैच ड्रॉ रहे। इस मैदान पर वेस्टइंडीज को पहली और एकमात्र हार नवंबर 2011 में भारत के खिलाफ मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि इसके बाद से वेस्टइंडीज ने दिल्ली में कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है। ऐसे में 2025 का यह मुकाबला इतिहास को तोड़ने और नया अध्याय लिखने का मौका होगा।

