नई दिल्ली: अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने रविवार, 12 अक्टूबर 2025 को आयोजित अपनी विशेष आम सभा (एसजीएम) बैठक में उच्चतम न्यायालय द्वारा मंजूर किए गए संविधान को औपचारिक रूप से अपनाया। हालांकि, महासंघ ने दो विवादास्पद अनुच्छेदों को फिलहाल स्थगित रखा है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्देश अभी लंबित हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 सितंबर को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एल. नागेश्वर राव द्वारा तैयार किए गए संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ स्वीकृति दी थी। यह कदम एआईएफएफ के प्रशासनिक ढांचे को पारदर्शी और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी 4 हफ्ते की समयसीमा
शीर्ष न्यायालय ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को चार हफ्तों के भीतर नया संविधान अपनाने का निर्देश दिया था। हालांकि, संविधान के मसौदे के दो अनुच्छेद महासंघ के शीर्ष पदाधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गए। इन अनुच्छेदों को लेकर एआईएफएफ ने सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार का अनुरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एआईएफएफ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने पीटीआई को बताया, “उच्चतम न्यायालय द्वारा मंजूर संविधान को अपनाया गया है, लेकिन दो अनुच्छेदों को फिलहाल छोड़ा गया है, जिन पर न्यायालय का अंतिम निर्देश अभी लंबित है।”
29 स्थायी सदस्यों के मतदान के बाद अपनाया संविधान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एआईएफएफ की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘संशोधित संविधान को 29 स्थायी सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के पक्ष में मतदान के साथ अपनाया गया।’ एआईएफएफ कहा, ‘एआईएफएफ की आम सभा ने भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा सुझाए गए परिवर्तनों के साथ संशोधित संविधान को अपनाया।’ बयान में कहा गया, ‘एआईएफएफ ने यह भी दर्ज किया कि उसने अनुच्छेद 23.3 और अनुच्छेद 25.3 (सी) और (डी) के अनुप्रयोग के संबंध में भारत के उच्चतम न्यायालय से स्पष्टीकरण मांगा है। इन दो (2) अनुच्छेदों को अपनाना उच्चतम न्यायालय के आगे के निर्देशों के अधीन रहेगा।’
दो धाराओं को लेकर खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
एआईएफएफ की विशेष आम सभा (एसजीएम) में फीफा और एएफसी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई। बैठक में फीफा की ओर से प्रबंधक एमिली डोम्स, एएफसी के सदस्य संघ प्रभाग में दक्षिण एशियाई इकाई के वरिष्ठ प्रबंधक सोनम जिग्मी और दक्षिण एशिया में फीफा क्षेत्रीय कार्यालय के विकास प्रबंधक प्रिंस रूफस शामिल हुए। इससे पहले गुरुवार को एआईएफएफ ने मसौदा संविधान की दो धाराओं — अनुच्छेद 23.3 और 25.3 (सी) — को लेकर फीफा की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण की मांग की थी। इन धाराओं को लेकर मतभेद के चलते एआईएफएफ ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने एआईएफएफ को विशेष आम बैठक को सूचित करने के लिए कहा था कि शीर्ष अदालत इन पर स्पष्टीकरण देने के लिए सहमत हो गया है। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि वह जस्टिस (रिटायर्ड) एल नागेश्वर राव के साथ इन दोनों अनुच्छेदों के बारे में बात करेगा और उनसे एक रिपोर्ट पेश करने को कहेगा।
इसके बाद अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और अन्य प्रमुख हितधारकों ने शनिवार, 11 अक्टूबर 2025 को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एल. नागेश्वर राव के साथ एक वर्चुअल बैठक की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में संविधान के विवादित अनुच्छेदों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि जस्टिस (रिटायर्ड) राव अपनी रिपोर्ट जल्द ही सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे, जिसके बाद शीर्ष अदालत सोमवार या मंगलवार को अनुच्छेद 23.3 और 25.3 (सी) से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर सकती है। इस फैसले को एआईएफएफ के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए अहम माना जा रहा है।

