पर्थ की पिच ने खोली भारत की वनडे रणनीति की पोल

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पर्थ. पर्थ की उछालभरी पिच पर भारतीय बल्लेबाज़ों की तकनीक और रणनीति दोनों की परीक्षा हुई। दुबई की स्पिन मददगार परिस्थितियों में हावी रहने वाली टीम ऑस्ट्रेलियाई गति और उछाल के सामने टिक नहीं सकी। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी छोटी पारियों में आउट हो गए। बारिश से प्रभावित मैच में भारत का स्कोर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लगातार 16वां टॉस हारने के बाद टीम की बल्लेबाज़ी की शुरुआत कमजोर रही, जिससे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को बढ़त मिल गई।

गेंदबाज़ों ने किया संघर्ष, पर रन थे बहुत कम

भारतीय गेंदबाज़ों ने नई गेंद से कुछ मूवमेंट ज़रूर हासिल की, लेकिन बचाव के लिए पर्याप्त स्कोर नहीं था। जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति टीम को भारी पड़ी। हर्षित राणा को शामिल करने से बल्लेबाज़ी में गहराई तो आई, पर कुलदीप यादव को बाहर रखने से बीच के ओवरों में विकेट निकालने की ताक़त घट गई। नतीजतन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों ने सहजता से रन बनाए और भारत की गेंदबाज़ी पर दबाव बना दिया। टीम को तेज़ पिचों पर सही संयोजन खोजने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

रणनीति और चयन पर उठे सवाल

रोहित और कोहली की नाकामी के बाद टीम प्रबंधन पर चयन को लेकर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को तीन प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ों के साथ उतरना चाहिए था। साथ ही एक कलाई के स्पिनर या मिस्ट्री स्पिनर की मौजूदगी से बीच के ओवरों में संतुलन बन सकता था। टीम को अब आगे के मैचों में ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा। पर्थ में मिली हार ने यह साफ कर दिया कि भारत को अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर तेज़ और बाउंसी विकेट पर नए दृष्टिकोण के साथ उतरना पड़ेगा।

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