एडिलेड. एडिलेड की उछालभरी पिच पर जहां कई भारतीय बल्लेबाज़ संघर्ष करते दिखे, वहीं श्रेयस अय्यर ने 77 गेंदों में 61 रन की सधी हुई पारी खेलकर टीम को संकट से निकाला। उन्होंने कहा कि ज़्यादा सीधा खड़े होकर खेलने की पुरानी शैली में लौटना उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ। यह “नया” स्टांस दरअसल उनकी पहले की ही तकनीक का सुधरा हुआ रूप है, जिसे उन्होंने घरेलू क्रिकेट और ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ मैचों में आज़माया था। तेज़ और शॉर्ट गेंदों के खिलाफ अय्यर की कमजोरी अक्सर चर्चा में रही है, लेकिन उन्होंने इसे सुधारने के लिए पिछले साल से लगातार मेहनत की।
अय्यर ने बताया, “मैंने अपने कोच के साथ मिलकर सीधा खड़ा होकर खेलने की तकनीक पर काम किया। बचपन में मेरा स्टांस ऐसा ही था, इसलिए सोचा इसे फिर से अपनाया जाए।” उन्होंने आगे कहा कि मुंबई की लाल मिट्टी की पिचों पर भी यह तरीका उपयोगी साबित हुआ। मार्च में चैम्पियंस ट्रॉफी के बाद अय्यर ने IPL और घरेलू क्रिकेट में वापसी की, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट से उन्होंने छह महीने का ब्रेक लिया। उन्होंने कहा, “लंबे समय तक फील्डिंग करने के बाद मेरी ऊर्जा घटने लगी थी, और मुझे लगा कि शरीर अभी टेस्ट क्रिकेट के दबाव के लिए तैयार नहीं है।” अब वे वनडे फॉर्मेट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां उन्हें रिकवरी का बेहतर मौका मिलता है।श्रेयस अय्यर की यह वापसी न सिर्फ उनके आत्मविश्वास की कहानी है, बल्कि यह दिखाती है कि तकनीकी सुधार और आत्म-विश्लेषण किस तरह खिलाड़ी के करियर को नई दिशा दे सकते हैं।


