भारत तैयार, बस एक कदम बाकी: हरमनप्रीत बोलीं-खिलाड़ी के तौर पर इससे बड़ा मौका नहीं

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नवी मुंबई। डीवाई पाटिल स्टेडियम में होने वाले रविवार के फ़ाइनल से पहले भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर पूरी तरह शांत नज़र आईं, लेकिन उनके भीतर साफ दिख रहा था कि यह मुकाबला टीम इंडिया के लिए सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि कई सालों की मेहनत की परीक्षा है। ऑस्ट्रेलिया पर सेमीफ़ाइनल की ऐतिहासिक जीत के बाद टीम ने जश्न को पीछे छोड़कर पूरी फोकस रिकवरी पर लगाया। हरमनप्रीत ने साफ कहा, यह समय दिमाग और शरीर को तरोताज़ा रखने का है। उनके मुताबिक खिलाड़ी तब ही बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जब उनका मन हल्का और लक्ष्य साफ हो।

फाइनल से पहले टीम का फोकस

हरमनप्रीत ने माना कि सेमीफ़ाइनल बेहद दबाव वाला मुकाबला था। उन्होंने कहा कि टीम ने दो दिनों में बस एक चीज़ पर ध्यान दिया—कैसे खुद को फ्रेश रखा जाए। भारत तीसरी बार वनडे विश्व कप फ़ाइनल खेलने जा रहा है और यह दबाव भी हर खिलाड़ी जानता है। कप्तान के शब्दों में, इस मंच पर सिर्फ़ स्किल नहीं, मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। पूरी टीम लगातार एक-दूसरे से बात कर रही है कि कैसे शांत रहते हुए फोकस बनाए रखा जाए। घर पर विश्व कप फ़ाइनल खेलना उनके लिए करियर का सबसे बड़ा पल है, और वे इस अनुभव को पूरी तरह जीना चाहती हैं।

कप्तान का भावुक सफर और कड़ी मेहनत

यह हरमनप्रीत का पांचवां विश्व कप है, लेकिन पहली बार वे बतौर कप्तान फ़ाइनल में उतरेंगी। भारत का सफर आसान नहीं रहा। लीग चरण में टीम लड़खड़ाई, कुछ अहम मैच हारे, लेकिन नवी मुंबई पहुंचने के बाद लय लौटी। हरमनप्रीत खुद बेहद भावुक स्वभाव की हैं। सेमीफ़ाइनल की जीत के बाद उनके साथ जेमिमाह की आंखें भी नम थीं। कप्तान ने साफ कहा, भावनाओं को दबाने की जरूरत नहीं। खिलाड़ी जितना दिल से खेलते हैं, उतना ही मजबूत होकर मैदान पर उतरते हैं। ऑस्ट्रेलिया को हराना आसान नहीं था, लेकिन वह मुकाबला टीम के लिए एक विश्वास बन गया है।

टीम इंडिया की तैयारी अब पूरी

पिछले तीन मैचों में भारत ने जो स्थिरता और आत्मविश्वास दिखाया है, वह फाइनल से पहले बड़ी ताकत है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन दिखाई दिया है। हरमनप्रीत का मानना है कि बड़े लक्ष्य खुद-ब-खुद पूरे हो जाते हैं, अगर टीम छोटी-छोटी चीजें सही करती रहे। भारत ने फ़ाइनल हारने का दर्द पहले भी झेला है और इस बार टीम सिर्फ एक नतीजे पर ध्यान दे रही है – जीत। दो साल की कड़ी तैयारी अब मैदान में अंतिम परीक्षा के लिए तैयार है। टीम जानती है कि इतिहास रचने का मौका यहीं है।

स्टेडियम खचाखच भरने की उम्मीद, खिलाड़ी उत्साहित

रविवार को डीवाई पाटिल स्टेडियम में खचाखच भीड़ रहने की उम्मीद है और यह माहौल भारतीय टीम का मनोबल और बढ़ाएगा। कप्तान ने बताया कि पूरी टीम एक-दूसरे के लिए दुआ कर रही है। सभी खिलाड़ी इस बात पर सहमत हैं कि मैदान पर 100 प्रतिशत देना ही उनका मकसद है। यह सिर्फ एक मैच नहीं, भारतीय महिला क्रिकेट को नई दिशा देने का मौका है। हरमनप्रीत के मुताबिक टीम किसी दबाव में नहीं, बल्कि उत्साह में खेलना चाहती है। उन्होंने कहा, बस एक कदम और… और भारत इतिहास के सबसे सुनहरे पलों में से एक का गवाह बनेगा।

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