नई दिल्ली: रणजी ट्रॉफी 2025 में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरीं। क्रिकेट में आउट होने का यह तरीका आम तौर पर देखने को नहीं मिलता, जिसके चलते इसे लेकर खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों में बहस छिड़ गई। रणजी के मुकाबले में मेघालय के खिलाफ मणिपुर के एक बल्लेबाज को दो बार बल्ले से गेंद मारने (Hit The Ball Twice) के नियम के तहत आउट किया गया, जिससे मैदान और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का माहौल बन गया।
क्या है पूरा मामला?
मामला कुछ इस तरह सामने आया कि मणिपुर के बल्लेबाज लामबम सिंह प्लेट ग्रुप के मैच में बल्लेबाजी कर रहे थे। एक गेंद उन्होंने बल्ले से डिफेंड की, लेकिन वह गेंद स्टंप की ओर जा रही थी। इसे रोकने के लिए बल्लेबाज ने गेंद पर दूसरी बार बल्ला लगाया। इस दौरान वहां मौजूद दर्शक आउट-आउट की आवाज़ें लगाने लगे और माहौल काफी गर्म हो गया।
दर्शकों की इस अपील के बाद फील्डिंग टीम ने भी अपील कर दी। जिसके चलते फील्ड अंपायर धर्मेश भारद्वाज ने उन्हें गेंद को दो बार बल्ले से मारने के प्रयास करने के कारण आउट दे दिया। मेघालय की टीम के अपील करने के बाद ही बल्लेबाज लामबम सिंह ने फील्ड से जाना शुरू कर दिया था।
MCC के डबल-हिट नियम की पूरी व्याख्या
मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के नियमों के अनुसार अंपायर का यह फैसला बिल्कुल सही था। MCC के नियम 34.1.1 के तहत, यदि बल्लेबाज ने गेंद को खेल लिया है या गेंद प्ले में है (फील्डर के छूने से पहले) और वह जानबूझकर इसे दूसरी बार बल्ले या शरीर के किसी भाग से मारने की कोशिश करता है (सिवाय उस हाथ के जिसमें बल्ला है), तो उसे आउट दिया जा सकता है। हालांकि, अगर बल्लेबाज केवल गेंद को विकेट पर जाने से रोक रहा है, तो उसे आउट नहीं किया जाता।
अब इसमें एक पेंच यह है कि बल्लेबाज विकेट पर जाती गेंद रोक सकता है, फिर क्यों लामबम सिंह आउट दिए गए? ईएसपीएन क्रिकइंफो के अनुसार ऐसा भी है कि अगर बल्लेबाज पैर से गेंद को टच करते तो उन्हें आउट नहीं दिया जाता। फिलहाल रणजी में हुए इस वाकिये का वीडियो नहीं आया है। जितना जल्दी इसका वीडियो सामने आएगा यह साफ होगा कि गेंद पर बल्लेबाज ने कब दोबारा बल्ला लगाया। रविचंद्रन अश्विन भी इस विकेट से खुश नहीं दिखे।
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में यह पांचवां ऐसा मामला
आखिरी बार 2005 में जम्मू-कश्मीर के ध्रुव महाजन झारखंडे के खिलाफ ऐसे आउट हुए थे। उसके बाद आंध्र प्रदेख के के. बवन्ना (1963-64), जम्मू-कश्मीर के शाहिद परवेज (1986-87) और तमिलनाडु के आनंद जॉर्ज (1998-99) भी इसी तरह आउट हो गए थे।

