न्यूयॉर्क: फीफा ने 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप के ड्रॉ को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। अगले सप्ताह होने वाले इस ड्रॉ में पहली बार टेनिस-स्टाइल नॉकआउट ब्रैकेट सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत दुनिया की शीर्ष चार टीमें—स्पेन, अर्जेंटीना, फ्रांस और इंग्लैंड—को अलग-अलग हिस्सों में रखा जाएगा। इसका मतलब है कि यदि ये सभी टीमें अपने-अपने ग्रुप में पहला स्थान हासिल करती हैं, तो सेमीफाइनल से पहले ये एक-दूसरे के खिलाफ नहीं खेलेंगी।
इस बदलाव का कारण क्या है?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फीफा के अनुसार, इस नए प्रारूप का मुख्य लक्ष्य लगातार अच्छा खेल रही टीमों को उनकी रैंकिंग के आधार पर लाभ देना है। इसके साथ ही बड़े मुकाबलों को टूर्नामेंट के अंतिम चरण तक सुरक्षित रखना भी मकसद है। यह बदलाव प्रतियोगिता को अधिक संतुलित और प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फीफा ने अपने बयान में कहा कि “शीर्ष टीमों के बीच संतुलन बनाए रखने और उनके योग्य प्रदर्शन का सम्मान करने के लिए दो अलग-अलग मार्ग तैयार किए गए हैं।”
ग्रुप स्टेज से नॉकआउट तक नई व्यवस्था
इस बार वर्ल्ड कप 48 टीमों वाला होगा, जो इतिहास में पहली बार है। कुल 12 ग्रुप होंगे, हर ग्रुप में चार टीमें रहेंगी। ड्रॉ इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि एक ही महाद्वीप की दो गैर-यूरोपीय टीमें एक ग्रुप में नहीं हो सकतीं। साथ ही यूरोपीय टीमों की संख्या प्रत्येक ग्रुप में अधिकतम दो तक सीमित रहेगी।
VIP उपस्थिति के साथ होगा ऐतिहासिक ड्रॉ
ड्रॉ पांच दिसंबर को वॉशिंगटन डी.सी. के कैनेडी सेंटर में होगा, जिसमें विशेष अतिथि के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मौजूद रहेंगे। यह पहला मौका है जब किसी वर्ल्ड कप ड्रॉ में राजनीतिक और खेल के इतने बड़े चेहरे एक साथ मंच साझा करेंगे।
क्वालिफाई टीमों की मौजूदा सूची और आगे की चुनौतियाँ
अब तक कुल 42 टीमें वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं, जिनमें ईरान और हैती भी शामिल हैं, जबकि इन दोनों देशों के अमेरिका के साथ राजनीतिक तनाव मौजूद है। इस बार ड्रॉ का सबसे रोचक पहलू यह है कि चार बार की विश्व चैंपियन इटली अपनी नीचे खिसकती रैंकिंग के कारण पॉट-4 में पहुंच सकती है। ऐसे में टॉप टीमों के लिए शुरुआती दौर में ही इटली जैसी मजबूत टीम का सामना बड़ी चुनौती बन सकता है, जिससे टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में भी हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिल सकते हैं।
पॉट के आधार पर अब तक क्वालिफाई कर चुकी टीमों का विभाजन
ड्रॉ में टीमों को उनकी रैंकिंग और क्वालिफिकेशन स्टेटस के आधार पर चार पॉट में रखा गया है।
पॉट 1 (टॉप सीड टीम्स): स्पेन, अर्जेंटीना, फ्रांस, इंग्लैंड, ब्राजील, पुर्तगाल, नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, संयुक्त राज्य (यूएसए), मेक्सिको, कनाडा।
पॉट 2: क्रोएशिया, मोरक्को, कोलंबिया, उरुग्वे, स्विट्जरलैंड, जापान, सेनेगल, ईरान, दक्षिण कोरिया, इक्वाडोर, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया
पॉट 3: नॉर्वे, पनामा, मिस्र, अल्जीरिया, स्कॉटलैंड, पराग्वे, ट्यूनिशिया, आइवरी कोस्ट, उज्बेकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका
पॉट 4: जॉर्डन, केप वर्डे, घाना, कुराकाओ, हैती, न्यूजीलैंड, यूरोपीय प्लेऑफ विजेता 1, यूरोपीय प्लेऑफ विजेता 2, यूरोपीय प्लेऑफ विजेता 3, यूरोपीय प्लेऑफ विजेता 4, इंटरकॉन्टिनेंटल प्लेऑफ विजेता 1, इंटरकॉन्टिनेंटल प्लेऑफ विजेता 2।
टूर्नामेंट में ग्रुप पाबंदियां
यूरोप की अधिकतम दो टीमें ही एक ग्रुप में होंगी। अन्य महाद्वीपों की टीमें अपनी ही महाद्वीप की टीम के साथ एक ही ग्रुप में नहीं रखी जाएंगी। अमेरिका अपनी मेजबानी की शुरुआत 12 जून 2026 को पॉट तीन की टीम के खिलाफ करेगा, फिर पॉट दो और पॉट चार की टीम से भिड़ेगा।
नए ड्रॉ फॉर्मेट ने आगामी वर्ल्ड कप को पहले से कहीं अधिक रणनीतिक, संतुलित और रोमांचक बना दिया है। शुरुआती चरण में टॉप टीमों को भले ही आसान राह मिले, लेकिन नॉकआउट राउंड में कई बड़े और हाई-वोल्टेज मुकाबलों की संभावना बनी रहेगी। खासकर तब, जब पॉट-चार से आने वाली इटली जैसी पूर्व चैंपियन टीम शुरुआत से ही किसी भी ग्रुप को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। यह बदलाव न केवल प्रतियोगिता की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि हर मैच को अधिक अनिश्चित और दिलचस्प भी बनाएगा।

