नई दिल्ली : विश्व के नंबर-1 शतरंज खिलाड़ी और पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भारत के अर्जुन एरिगैसी ने शिकस्त दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दोहा में जारी वर्ल्ड ब्लिट्ज चैंपियनशिप के दौरान मिली इस हार के बाद कार्लसन अपना आपा खो बैठे और गुस्से में मेज पर हाथ पटकते नजर आए। उनका यह रिएक्शन कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मैग्नस कार्लसन इस टूर्नामेंट के डिफेंडिंग चैंपियन थे। भारतीय शतरंज खिलाड़ी अर्जुन ने उन्हें 9वें राउंड में हराकर सभी को चौंका दिया। इस राउंड से पहले अर्जुन और कार्लसन समेत छह खिलाड़ी 6.5 अंक के साथ टॉप पर थे। अब इस जीत के साथ अर्जुन 7.5 अंक हासिल करते हुए उजबेकिस्तान के नोदिर्बेक अब्दुसातोरोव के साथ संयुक्त रूप से टॉप पोजीशन पर आ गए हैं।
अर्जुन एरिगैसी की इस जीत की खास बात यह रही कि उन्होंने ब्लैक पीस के साथ खेलते हुए मैग्नस कार्लसन को मात दी। शतरंज में आमतौर पर सफेद मोहरों से खेलने वाले खिलाड़ी को पहली चाल का फायदा मिलता है, जिससे उसे ब्लैक पीस वाले खिलाड़ी पर बढ़त हासिल रहती है। कार्लसन ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में मुकाबले की शुरुआत की, लेकिन अर्जुन ने धैर्य और सटीक रणनीति के साथ धीरे-धीरे खेल पर नियंत्रण बनाया और आखिर में सही मौके पर निर्णायक चाल चलते हुए जीत अपने नाम कर ली।
पहले भी गुस्से में रिएक्ट कर चुके हैं कार्लसन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अर्जुन एरिगैसी ने इस मुकाबले में धीरे-धीरे अपनी बढ़त बनानी शुरू कर दी थी, जिससे मैग्नस कार्लसन लगातार दबाव में नजर आए। जैसे-जैसे खेल उनके हाथ से निकलता गया, कार्लसन की झुंझलाहट साफ दिखने लगी। मुकाबला गंवाने के बाद वह गुस्से में उठ खड़े हुए और मेज पर जोर से हाथ पटक दिया, जिससे कुछ मोहरे नीचे गिर गए। हालांकि बाद में उन्होंने खुद को संभाला, मोहरों को उठाया और अर्जुन से हाथ मिलाकर खेल भावना के साथ अपनी हार स्वीकार की।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब मैग्नस कार्लसन का गुस्सा इस तरह सामने आया हो। इससे पहले रैपिड चैंपियनशिप में रूस के व्लादिस्लाव अर्तेमिएव से हार के बाद भी उनका गुस्से भरा रिएक्शन काफी वायरल हुआ था, जहां जाते समय उन्होंने अपने पास लगे कैमरे को भी धक्का देने की कोशिश की थी। इसके अलावा नॉर्वे में भारत के डी गुकेश से हार के बाद भी कार्लसन ने मेज पर हाथ पटककर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

