नई दिल्ली : SIR (Special Intensive Revision/विशेष गहन पुनर्रीक्षण) प्रक्रिया को लेकर बढ़ रहे सवालों और राजनीतिक हलचल के बीच, भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को भारतीय निर्वाचन आयोग ने सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मतदाता सूची से जुड़े कथित तकनीकी विवादों के चलते मोहम्मद शमी और मोहम्मद कैफ का नाम सुनवाई सूची में सामने आया है। इसी मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और समयसीमा को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए EC (चुनाव आयोग) को घेरा है।
अभिनेता-सांसद दीपक अधिकारी को भी EC ने भेजा नोटिस
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शमी और कैफ के अलावा अन्य प्रमुख व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किया गया है, जिसमें अभिनेता से तृणमूल कांग्रेस सांसद बने दीपक अधिकारी उर्फ देव का नाम भी शामिल है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने शमी, देव और उनके परिवार को नोटिस भेजे जाने की कड़ी निंदा की है। देव पश्चिम बंगाल के घाटल से तीन बार सांसद रह चुके हैं। घाटल में ही 25 दिसंबर 1982 को जन्में देव का परिवार काम की वजह मुंबई शिफ्ट हो गया था। बाद में TMC सांसद बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में अपने काम की वजह से कोलकाता में बस गए।
शमी और कैफ को चुनाव आयोग में सुनवाई के लिए तलब
मोहम्मद शमी और मोहम्मद कैफ को पिछले साल 16 दिसंबर से शुरू हुई SIR (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए तलब किया गया है। सोमवार, 5 जनवरी 2026 को दक्षिण कोलकाता के जादवपुर क्षेत्र में कार्तजू नगर स्कूल से उन्हें नोटिस जारी किया गया, जिसमें उन्हें सहायक असिस्टेंट निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया।
शमी ने विजय हजारे ट्रॉफी में भाग लेने का हवाला दिया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मद शमी ने चुनाव आयोग को लिखा है कि वह नोटिस के अनुसार पेश नहीं हो पाएंगे, क्योंकि वह विजय हजारे ट्रॉफी में भाग लेने के लिए राजकोट में हैं। शमी कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 93 में वोटर के रूप में पंजीकृत हैं, जो राशबिहारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हालांकि शमी का जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ था, लेकिन वह कई वर्षों से कोलकाता में स्थायी रूप से रह रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘शमी और उनके भाई के नाम उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में दिक्कतों की वजह से सुनवाई की लिस्ट में आए हैं। ये मुद्दे वंश मैपिंग और सेल्फ-मैपिंग में गड़बड़ियों से जुड़े हैं। मोहम्मद शमी की सुनवाई 9 से 11 जनवरी के बीच होनी तय है।’ इससे पहले, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर यह पूछा कि SIR प्रक्रिया के मुख्य उद्देश्य क्या हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग को इन उद्देश्यों की पूरी जानकारी है।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ममता बनर्जी ने लिखा, “हालांकि इस प्रक्रिया को समय-सीमित बताया गया है, लेकिन कोई स्पष्ट, पारदर्शी या सभी पर समान लागू होने वाली समय-सीमा नहीं दी गई है। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मानक अपनाए जा रहे हैं और समय-सीमा को मनमाने ढंग से बदला जा रहा है, जो प्रक्रिया की स्पष्टता, तैयारी और समझ की कमी को उजागर करता है।”
चुनाव आयोग के प्रमुख को लिखे अपने पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं थी और सही ढंग की जानकारी भी नहीं दी गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने लिखा, “इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की गलती, अस्पष्टता या अनिश्चितता गंभीर गड़बड़ियों का कारण बन सकती है, जिसमें वास्तविक मतदाता से उनके मताधिकार का छीना जाना भी शामिल है। यह ऐसा परिणाम है जो कानून के शासन वाले संवैधानिक लोकतंत्र में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।” उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में इसी साल चुनाव होने हैं और राज्य के लिए अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। दिसंबर 2025 में जारी SIR ड्राफ्ट लिस्ट से 58 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे।

