नई दिल्ली : बांग्लादेश क्रिकेट टीम के सहायक कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन ने पूर्व खेल सलाहकार आसिफ नजरुल पर निशाना साधते हुए उन्हें झूठा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नजरुल ने टी20 विश्व कप में बांग्लादेश टीम की भागीदारी को लेकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और बाद में अपना रुख बदल लिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सलाहुद्दीन ने कहा कि टूर्नामेंट से बाहर होना खिलाड़ियों के लिए बेहद कठिन क्षण था, क्योंकि उनका सपना एक ही पल में बिखर गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि टीम के दो खिलाड़ी इस झटके से मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे। नजरुल ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस की अगुआई में काम किया था। उन्होंने शुरू में कहा था कि सुरक्षा कारणों से टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत न जाने का फैसला सरकार ने लिया था। अपने पद से हटने से कुछ समय पहले उन्होंने कहा कि यह फैसला बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और खिलाड़ियों ने लिया था।
भारत न जाने के निर्णय में खिलाड़ियों की कोई भूमिका नहीं रही
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सलाहुद्दीन ने कहा कि भारत न जाने के फैसले में खिलाड़ियों की कोई भूमिका ही नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘उसने कोरा झूठ बोला। मैं खुद एक अध्यापक हूं, और अध्यापक आमतौर पर थोड़ा कम झूठ बोलते हैं। मैं यह सोच भी नहीं सकता कि वह खुलेआम झूठ बोलेगा। मैं लड़कों के सामने अपना चेहरा कैसे दिखाऊंगा? उसने ऐसा यू-टर्न लिया।’
सलाहुद्दीन ने नजरुल पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सलाहुद्दीन ने कहा, “वह ढाका विश्वविद्यालय के अध्यापक हैं। मेरे देश के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान का कोई व्यक्ति ऐसे झूठ कैसे बोल सकता है? हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते। उसने पहले कुछ कहा और बाद में यू-टर्न ले लिया।” बांग्लादेश ने अपने मैचों के लिए भारत आने से मना कर दिया था, जिसके बाद टूर्नामेंट में उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया।
खिलाड़ियों का सपना एक ही सेकंड में बिखर गया
बीसीबी ने भारत के बजाय बांग्लादेश के मैच को सह-मेजबान श्रीलंका में कराने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन आईसीसी ने इसे मानने से मना कर दिया और टीम को बदलने का फैसला किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सलाहुद्दीन ने कहा कि टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने की खबर सुनकर खिलाड़ी बहुत दुखी थे। उन्होंने कहा, ‘देखिए, जब कोई खिलाड़ी वर्ल्ड कप खेलने जाता है तो वह अपने साथ सपना लेकर जाता है। अपना 27 साल पुराना सपना। आप उस सपने को एक सेकंड में तोड़ देते हैं।’
दो खिलाड़ी पांच दिनों तक मानसिक रूप से टूटे रहे
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सलाहुद्दीन ने कहा, “ठीक है, अगर यह देश का फैसला है और राष्ट्रीय कारणों से लिया गया है तो हम इसके लिए कुर्बानी देने को तैयार हैं, लेकिन अगर आप केवल नुकसान की बात करते हैं तो मैं सिर्फ अपने नुकसान की ही बात करूंगा। निजी तौर पर आपने एक खिलाड़ी का सपना पूरी तरह से तोड़ दिया। मुझे पता है कि मेरे दो खिलाड़ी पांच दिनों के लिए मानसिक रूप से कोमा में चले गए थे और पूरी तरह बेसुध हो गए थे। देश के लिए मैं कुछ भी कुर्बान करने को तैयार हूं और खिलाड़ी भी तैयार हैं, लेकिन क्या मैंने किसी खिलाड़ी के सिर पर हाथ रखकर कहा, ‘बेटा, तुम इस वजह से नहीं खेल पाए?’ अगर मुद्दे ठीक से समझाए जाते, तो मुझे लगता है कि कई बातें आसानी से मानी जा सकती थीं।”

