नई दिल्ली : दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) के सचिव अशोक शर्मा ने जनसत्ता से खास बातचीत में दिल्ली क्रिकेट के भविष्य की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि अरुण जेटली स्टेडियम (पूर्व में फिरोज शाह कोटला) से 10 किलोमीटर के दायरे में 60 हजार से अधिक दर्शक क्षमता वाला एक अत्याधुनिक नया स्टेडियम बनाने की योजना पर काम चल रहा है। डीडीए से उपयुक्त जमीन मिलने के बाद निर्माण कार्य को तेजी से शुरू करने की तैयारी है। इसके अलावा, डीडीसीए 2026 में दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) को पहले आयोजित करने की दिशा में भी प्रयासरत है, ताकि घरेलू सत्र शुरू होने से पूर्व खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक मंच और तैयारी का अवसर मिल सके।
अरुण जेटली स्टेडियम की मौजूदा क्षमता सिर्फ 39 हजार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने बताया, ‘देखिए हमारी एपेक्स काउंसिल (शीर्ष परिषद) में यह फैसला किया गया था कि दिल्ली की आबादी के अनुसार एक और स्टेडियम होना चाहिए, जैसे मुंबई में तीन हैं। दिल्ली-एनसीआर इतना बड़ा है कि यहां के स्टेडियम की क्षमता 39 हजार है। हम चाहते हैं कि जो भी हमने डीडीए से जमीन देखी हैं, तो हम यह चाहते हैं कि वह हमारे स्टेडियम (अरुण जेटली स्टेडियम) से ज्यादा दूर नहीं हो।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने बताया, ‘अभी हमें दो-तीन जगहें दिखाईं गईं है। अब हमारी एपेक्स काउंसिल यह फैसला करेगी कि हम लोग कितनी दूर स्टेडियम बनाएं। देखिए हम तो यह चाहते हैं कि इस स्टेडियम के 10 किलोमीटर के दायरे में ही दूसरे स्टेडियम के लिए हमें जमीन मिल जाए और जितनी जल्दी हो सके हम उसको डेवपल करें।’
कम क्षमता के कारण मैनेज करने में होती है दिक्कत: अशोक शर्मा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने बताया, ‘इतनी बड़ी जमीन होनी चाहिए जिसमें 60 हजार से ज्यादा दर्शक क्षमता वाला स्टेडियम बनाया जा सके, क्योंकि आगे का अनुमान लगाते हुए कि दिल्ली की आबादी कहां जाएगी, क्योंकि दिल्ली की आबादी और एनसीआर की आबादी बहुत ज्यादा है। जब भी कोई अच्छा मैच होता है हमें मैनेज करने में थोड़ी दिक्कत होती है, क्योंकि देखने वाले ज्यादा होते हैं और अंदर दर्शक क्षमता कम होती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने बताया, ‘हमें जितनी जल्दी डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) से जमीन मिल जाएगी हम उतनी जल्दी से जल्दी कंस्ट्रक्शन करा लेंगे और बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) भी हमारी (डीडीएसए/दिल्ली जिला एवं क्रिकेट एसोसिएशन) सहायता करेगा।’
डीडीसीए प्रेसीडेंट को डीडीए से मिला है आश्वासन
प्रक्रिया कहां तक पहुंची, इस सवाल पर डीडीसीए सचिव अशोक शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष रोहन जेटली ने उपराज्यपाल (एलजी) से इस संबंध में बातचीत की है और उन्हें आश्वासन मिला है कि डीडीए नजदीक में उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की कोशिश करेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि नरेला स्थित एक जमीन ऑफर की गई थी, लेकिन वह दिल्ली की सीमा पर है, इसलिए डीडीसीए ने अन्य दो-तीन वैकल्पिक स्थान भी दिखाने का अनुरोध किया है, ताकि अंतिम फैसला सोच-समझकर लिया जा सके। शर्मा ने यह भी याद दिलाया कि अरुण जेटली के कार्यकाल में सराय काले खां के सामने डीडीए की स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में डीडीसीए को जमीन आवंटित हुई थी, लेकिन वह योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है कि दिल्ली की बढ़ती आबादी को देखते हुए बड़े स्टेडियम की जरूरत स्पष्ट है। 60 हजार दर्शक क्षमता को उन्होंने न्यूनतम बताया और कहा कि जितनी बड़ी जमीन उपलब्ध होगी, उसी के अनुरूप उससे भी बड़े स्टेडियम के निर्माण का प्रयास किया जाएगा।
जिनती बड़ी जमीन, उतना बड़ा स्टेडियम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने कहा, ‘डीडीए हमें जितनी बड़ी जमीन देगा हम उतना पड़ा स्टेडियम बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन सबकुछ डीडीए पर निर्भर है। बाकी रही फंड्स की बात तो हमारे पास पर्याप्त फंड है और बीसीसीआई भी हर स्टेडियम बनाने की लिए आर्थिक मदद देता है। और भी जगह जहां स्टेडियम बने हैं, बीसीसीआई ने वहां बड़े स्तर पर वित्तीय मदद दी है।’
‘सेलेक्शन में कोई पक्षपात नहीं’, बोले अशोक शर्मा
अशोक शर्मा ने सितंबर 2025 में डीडीसीए की रणजी ट्रॉफी और अंडर-23 टूर्नामेंट के संभावित खिलाड़ियों के चयन को लेकर बैठक में हुए बवाल की खबरों को पूरी तरह से नकार दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘ये अफवाहें हैं। हर सीजन जब हमारी चयन प्रक्रिया शुरू होती है तो ये अफवाहें उठती हैं, लेकिन साबित तो कुछ होता नहीं। बोलने को कोई कुछ भी कहे। जिसका बच्चा चुन लिया जाता है या जिसका नहीं चुना जाता है तो दोनों ही तरफ से ये आवाजें उठती हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने बताया, ‘हम तैयारी करने के लिए हर स्तर पर ऐसे टूर्नामेंट कराते हैं जिसमें बच्चे खेलें और अपनी प्रतिभा दिखाते हुए आगे बढ़ें। हम अंडर-19 का ट्रायल टूर्नामेंट कराते हैं। अंडर-16 का ट्रायल टूर्नामेंट कराते हैं। अंडर-23 का टूर्नामेंट कराते हैं। रणजी ट्रॉफी के जो टॉपर्स हैं हमारे, हम उनका टूर्नामेंट कराते हैं। हमारा यह सीजन पूरे दो से ढाई महीने तक चलता है, क्योंकि बीसीसीआई का घरेलू सीजन अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होता है, तो हमारी तैयारी मई-जून से शुरू हो जाती है।’
डोमेस्टिक सीजन में उतार-चढ़ाव भरा प्रदर्शन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीसीसीआई की घरेलू प्रतियोगिताओं में दिल्ली की टीमों के प्रदर्शन को लेकर अशोक शर्मा ने कहा, ‘देखिए परफॉर्मेंस मिली-जुली आई है। मैं यह नहीं कहता है कि दिल्ली बहुत अच्छा खेल गई, लेकिन सोशल मीडिया और प्रेस में जो लोग इतनी नकारात्मक बातें लिखते रहते हैं वे सही नहीं हैं। हमारी लड़कियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। पिछली बार हम अंडर-23 में चैंपियन हो गए। इस साल हम उप विजेता रहे।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने कहा, ‘मतलब मिली-जुली परफॉर्मेंस है… और देखिए एक गैप हो जाता है। दिल्ली से एक समय आठ-आठ-नौ-नौ प्लेयर्स नेशनल टीम में खेलते थे। उस समय दिल्ली रणजी ट्रॉफी भी चैंपियन होती थी… तो जब स्लॉट एकदम से खाली होता है तो उसे भरने में तीन-चार-पांच साल का समय लगता है। हम रिफॉर्म के दौर में हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले समय में हमारे बच्चे अच्छा परफॉर्म करें।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने कहा, ‘हमारा बच्चा हर्षित राणा इंडिया खेल रहा है। यश ढुल इंडिया खेल रहा है। व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर हमारे बच्चे खेल रहे हैं। प्रियांश आर्या है। …तो यह नहीं है कि लड़कों की परफॉर्मेंस नहीं है। मैं जो कमी समझता हूं वह यह कि संयुक्त रूप से परफॉर्मेंस नहीं आ पा रही है। एक मैच में एक बच्चे ने सौ कर दिए। दूसरे मैच में दूसरे ने सौ कर दिए। तीसरे मैच में तीसरे बच्चे ने सौ कर दिए। अगर यही एक मैच में दो शतक होते तो हमारी परफॉर्मेंस और ज्यादा अच्छी हो जाती। जब हमारा प्रदर्शन अच्छा होता तो हम दूसरी टीमों को हराने और अंक हासिल करने में कामयाब होते।’
टीम कॉम्बिनेशन बनाने की जरूरत: अशोक शर्मा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने बताया कि उन्होंने जो पूरे साल अनुभव किया, उसके आधार पर कह सकते हैं कि लड़कों में कमी नहीं है। कॉम्बिनेशन बनाने की जरूरत है। कॉम्बिनेशन बनाने के लिए डीडीसीए क्या अतिरिक्त प्रयास कर रहा है, इस सवाल पर अशोक शर्मा ने कहा, ‘एपेक्स काउंसिल ने फैसला लिया है कि इस बार हम अपना लोकल सीजन पहले खत्म कर लेंगे। हमने इसे अप्रैल-मई में खत्म करने की सोची है, क्योंकि उसके बाद हमारा डीपीएल (दिल्ली प्रीमियर लीग) शुरू होना है। तो हम टी20 टूर्नामेंट 15 मार्च से शुरू कर देंगे। हमारा लक्ष्य है कि हम उसे डेढ़ से दो महीने में खत्म कर लें।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने कहा, ‘देखिए 40 ओवर की लीग भी आधी निपट गई है। आधी रह गई है। हमें उसे भी अप्रैल के अंत तक खत्म कर लेंगे। इसके अलावा अंडर-16 और अंडर-19 के जितने भी ट्रॉयल टूर्नामेंट हैं, वह हम गर्मियों की छुट्टियों में कराना चाहते हैं। हमारी जो सीआईसी (क्रिकेट सलाहकार समिति) उसका भी गठन हम समय से कर लें, जिससे वह सेलेक्टर समय से चुन लें और वे सेलेक्टर्स अगले 3 से 4 महीने हर ग्राउंड में जाकर बच्चों की परफॉर्मेंस देखें।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक शर्मा ने कहा, ‘सारे बच्चे लीग नहीं खेलते, लेकिन उसमें रजिस्टर्ड होना जरूरी है। वही बच्चा आगे जाकर टीम में चुन जाने का पात्र होता है। दिल्ली जिला एवं क्रिकेट एसोसिएशन की लीग होती है। तकरीबन हम 2300-2400 मैच कराते हैं। हमने लड़कियों का भी पिछली बार टूर्नामेंट कराया। उनकी भी लीग इन्हीं दिनों खत्म करानी है, क्योंकि डीपीएल में टी20 का डेटा करेंट का होता है। …तो हम यह चाहते हैं कि बच्चे लगातार खेलें और मेरा मानना है कि निरंतरता में ही सफलता होती है।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डीपीएल के आगामी सीजन में क्या टीमें बढ़ेंगी उससे जुड़े सवाल पर अशोक शर्मा ने कहा, ‘डीपीएल शुरू करने का सारा श्रेय मैं अध्यक्ष रोहन जेटली को देना चाहूंगा। पहली बार हमें डीपीएल कराने के लिए सिर्फ 20-25 दिन मिले थे, लेकिन एपेक्स काउंसिल के हर सदस्य के सहयोग से हम टूर्नामेंट को सफल बनाने में कामयाब रहे। डीपीएल का दूसरा सीजन और सफल रहा। अब डीपीएल के तीसरे संस्करण की तैयारी हम और ज्यादा बेहतर तरीके से कर रहे हैं। हमारी इसे जल्दी शुरू करने की कोशिश है, पिछले बार हम अगस्त में टूर्नामेंट करा पाए थे, लेकिन इस बार हमारी इसे पहले कराने की योजना है।’

