चेन्नई। भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज़ी कोच सितांशु कोटक ने साफ कहा है कि टीम को हालिया हार को ज़्यादा दिमाग में नहीं रखना चाहिए और उसी पॉज़िटिव ब्रांड की क्रिकेट खेलनी चाहिए, जिससे उसे अब तक सफलता मिली है। उन्होंने ज़ोर दिया कि दबाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का हिस्सा है और उससे घबराने के बजाय उसे सकारात्मक रूप में लेना ज़रूरी है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद भारत की जीत की लय टूटी, लेकिन कोटक का मानना है कि एक मैच के आधार पर टीम की सोच या रणनीति बदलना सही नहीं होगा। चेन्नई में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले सुपर-8 मुकाबले से पहले उन्होंने कहा कि भारत में विश्व कप खेलना अपने आप में दबाव लाता है, लेकिन यही दबाव खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार भी करता है। कोटक ने कहा कि अगर खिलाड़ी दबाव महसूस नहीं कर रहे, तो इसका मतलब है कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल रहे। उन्होंने माना कि यह मैच अहम है, लेकिन टीम को आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरना होगा।
साउथ अफ्रीका के खिलाफ 111 रन पर ऑलआउट होने को लेकर कोटक ने इसे पिछले दो साल का सबसे खराब प्रदर्शन बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि टीम को अब आगे की ओर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि T20 क्रिकेट में कभी-कभी शुरुआती विकेट गिरने के बाद बल्लेबाज़ को कुछ गेंदें लेने की ज़रूरत होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि टीम अपनी आक्रामक सोच छोड़ दे।
अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा के समर्थन में कोटक ने कहा कि एक असफल मैच के बाद युवाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन अगर टीम को खिताब जीतना है तो दबाव झेलना सीखना ही होगा। उन्होंने साफ किया कि किसी एक खिलाड़ी पर अतिरिक्त दबाव डालने की जरूरत नहीं है। कोटक के मुताबिक, T20 क्रिकेट में पहली गेंद से ही नकारात्मक सोच नुकसान पहुंचाती है। खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुसार योजना बनानी होती है, लेकिन खेल की मूल सोच आक्रामक और पॉज़िटिव ही रहनी चाहिए।
गौरतलब है कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार से पहले भारतीय टीम का T20 फॉर्म शानदार रहा था और टीम लगातार जीत दर्ज कर रही थी। अब ज़िम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जहां जीत से सेमीफाइनल की उम्मीदें मज़बूत होंगी। मैच से पहले टीम के सीनियर खिलाड़ी गौतम गंभीर और जसप्रीत बुमराह भी अभ्यास सत्रों में सक्रिय नजर आए, जिससे टीम के आत्मविश्वास का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

