लंदन. प्रीमियर लीग ने चेल्सी फुटबॉल क्लब पर वित्तीय नियमों के उल्लंघन के मामले में 92 करोड़ रुपए (10 मिलियन पाउंड) का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही क्लब पर एक साल का ट्रांसफर बैन भी लगाया गया है, जिसे दो साल के लिए टाल दिया गया है। यह कार्रवाई 2011 से 2018 के बीच ईडन हज़ार्ड, विलियन और डेविड लुइज जैसे खिलाड़ियों को साइन करने के लिए किए गए गुप्त भुगतानों को लेकर की गई है। जांच में सामने आया कि क्लब ने सात अनरजिस्टर्ड एजेंटों या उनकी संस्थाओं को कुल 23 मिलियन पाउंड (करीब 250 करोड़ रुपए) दिए थे। इसके अलावा सैमुअल इटो और विलियन की ट्रांसफर फीस के रूप में करीब 210 करोड़ रुपए रिकॉर्ड में नहीं दिखाए गए। क्लब के स्टाफ को भी कुछ सैलरी ‘अंडर द टेबल’ दी गई थी।
ईडन हज़ार्ड को 2012 में लिली क्लब से 393 करोड़ रुपए में साइन किया गया था। हज़ार्ड ने चेल्सी के लिए 352 मैचों में 110 गोल किए। वहीं विलियन और डेविड लुइज ने टीम की सफलता में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाई। 2018-19 यूरोपा लीग फाइनल में विलियन ने चेल्सी को आर्सेनल पर 4-1 से जीत दिलाई थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि क्लब ने 2019 से 2022 के बीच एकेडमी खिलाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में नियमों का उल्लंघन किया था। इसके लिए चेल्सी की एकेडमी पर 9 महीने का बैन लगाया गया और 7.50 लाख पाउंड (करीब 8 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया गया।
चेल्सी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। 2022 में यूईएफए ने भी इसी मामले में क्लब को 10 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। इंग्लैंड का फुटबॉल एसोसिएशन (FA) भी इस मामले की अलग से जांच कर रहा है और भविष्य में एफए की ओर से भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना है। नए मालिकों ‘ब्लूको ग्रुप’ ने खुद प्रीमियर लीग को इन उल्लंघनों की जानकारी दी। लीग ने कहा कि यदि क्लब ने इन भुगतानों की जानकारी स्वयं नहीं दी होती, तो और भी सख्त कार्रवाई हो सकती थी और क्लब के प्वॉइंट्स भी काटे जा सकते थे। इस फैसले के साथ चेल्सी को अब वित्तीय और अनुशासनात्मक रूप से सख्त निगरानी में रहना होगा, और नए खिलाड़ियों को साइन करने में पहले से अधिक सावधानी बरतनी होगी।

