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Wednesday, March 18, 2026

इंटरनेशनल क्रिकेट में क्यों इस्तेमाल होता है लकड़ी का बल्ला? 57 साल पुराने पर्थ एशेज टेस्ट से जुड़ी है कहानी

नई दिल्ली : इंटरनेशनल क्रिकेट में बैट्समैन लकड़ी के बल्ले का ही इस्तेमाल करते हैं और किसी भी धातु जैसे लोहे का प्रयोग नहीं करते। इसका मुख्य कारण है मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब का नियम, जो बैट की चौड़ाई और लंबाई के अलावा यह भी निर्धारित करता है कि बल्ला केवल लकड़ी का ही होना चाहिए। दिसंबर 1979 तक इस नियम की औपचारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई थी, हालांकि उस समय भी ज्यादातर बैट्समैन लकड़ी के बल्ले का ही इस्तेमाल कर रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस नियम को बनाने की जरूरत मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज खिलाड़ी डेनिस लिली की वजह से पड़ी, जिन्होंने अपनी खेल शैली के कारण यह सुनिश्चित करना जरूरी कर दिया कि बल्ला लकड़ी का ही हो। पर्थ में इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की एशेज सीरीज के पहले टेस्ट के पहले दिन आखिर में ऑस्ट्रेलिया 232 रन पर 8 विकेट गंवाकर दिक्कत में था। नंबर 9 पर बल्लेबाजी करने आए डेनिस लिली 11 रन बनाकर खेल रहे थे। अगले दिन उन्होंने अपनी पारी की शुरुआत लकड़ी से बने आम बल्ले से नहीं बल्कि एल्युमिनियम के बैट से की।

डेनिस लिली के बिजनेस पार्टनर ने बनाया था पहला लकड़ी का बल्ला

यह बल्ला उनके बिजनेस पार्टनर ग्राहम मोनाघन के दिमाग की उपज था। वह डेनिस लिली के दोस्त और अच्छे क्लब क्रिकेटर थे। सस्ते बेसबॉल बैट बनाने के लिए लकड़ी की जगह मेटल का इस्तेमाल होने लगा था। इससे प्रेरित होकर मोनोघन ने सस्ता क्रिकेट बैट बनाने का तरीका निकाला। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डेनिस लिली ने ऑटोबायोग्राफी ‘मेनेस’ बताया कि उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में इस बल्ले का इस्तेमाल मार्केटिंग के लिए किया था।

वेस्टइंडीज के खिलाफ भी किया था इस्तेमाल

इस बल्ले का ट्रेड नेम ‘कॉम्बैट’ था। डेनिस लिली ने असल में 12 दिन पहले ब्रिस्बेन में भी वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट में इस बल्ले का इस्तेमाल किया था। उस मौके पर उन्होंने एक ही बार गेंद को मारा था। जोरदार आवाज आई थी। जोएल गार्नर की गेंद पर वह बगैर खाता खोले एलबीडब्ल्यू हो गए थे। वेस्टइंडीज को लिली का एल्युमिनियम का बैट इस्तेमाल करना थोड़ी मजेदार लगा था। इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रियरली को ऐसा नहीं लगा।

चैपल ने हॉग को बल्ले के साथ भेजा

दूसरे दिन की चौथी गेंद पर डेनिस लिली ने इयान बॉथम को स्ट्रेट-ड्राइव खेला। मेटल की अजीब आवाज आई, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ग्रेग चैपल को लगा कि शॉट चौका जाना चाहिए था, लेकिन मेटल के बैट के कारण नहीं गया। उन्होंने 12वें खिलाड़ी रॉडनी हॉग को दो बल्ले के साथ डेनिस लिली के पास भेजा। इस बीच ब्रियरली ने अंपायर मैक्स ओ’कॉनेल और डॉन वेसर से शिकायत की कि बल्ला गेंद को नुकसान पहुंचा रहा है।

लिली ने गुस्से में अपना मेटल बैट फेंका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंपायों ने डेनिस लिली से कहा कि उन्हें बल्ले को बदलना होगा। डेनिस लिली ने हॉग को बल्लों के साथ लौट जाने को कहा। दस मिनट तक बहस होती रही। फिर चैपल पवेलियन से निकले और हॉग से बैट लेकर लिली की तरफ बढ़े। जब लिली को लगा कि बहस करने का कोई फायदा नहीं हो तो उन्होंने गुस्से में अपना मेटल बैट फेंक दिया और मैच फिर से शुरू हुआ।

एल्युमिनियम के बैट की बिक्री में तेजी

हैरानी की बात है कि लिली सजा से बच गए। अगली सुबह अंपायरों ने कहा कि वे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। दो हफ्ते बाद ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड ने तय किया कि डांटना ही काफी सजा है। भले ही इस घटना से लिली का छवि प्रभावित हुई हो,लेकिन आर्थिक तौर पर फायदा हुआ। एल्युमिनियम के बैट की बिक्री में तेजी आई। हालांकि, कुछ महीनों बाद बैट को लेकर नियम बदल गया। यह साफ किया गया कि बैट लकड़ी का ही होना चाहिए।

क्रिकेट में एल्युमिनियम बैट क्यों नहीं चलता: लकड़ी की क्यों होती है पसंद

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नियम न भी बनता, तब भी एल्युमिनियम के बैट का इंटरनेशनल क्रिकेट में इस्तेमाल नहीं होता। ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज डेनिस लिली ने खुद माना कि इसे स्कूल, युवाओं और विकासशील देशों के लिए एक सस्ता विकल्प बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। एल्युमिनियम बैट इनमेल कोटिंग से ढकने के कारण देखने में खास आकर्षक नहीं लगता था और इसमें कोई साफ मीठा स्पॉट भी नहीं था, जिससे शॉट लगाने में खिलाड़ी को मुश्किल होती थी। मैच के बाद, डेनिस लिली ने इस बैट पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के साइन दिखाए थे, जिससे यह एक यादगार संग्रहणीय वस्तु बन गया।

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