नई दिल्ली : दो बार की राष्ट्रीय चैंपियन मीनाक्षी गोयत ने एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के महिला 53 किलोग्राम वर्ग में गुरुवार (9 अप्रैल) को दक्षिण कोरिया की सियोयंग पार्क को हराकर फाइनल में जगह बना ली। हरियाणा की इस प्रतिभाशाली पहलवान का सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है। बचपन में वह जॉन सीना की बड़ी फैन थीं, और इसी जुनून को देखकर उनके पिता प्रेम गोयत ने उन्हें पहलवानी में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
मीनाक्षी गोयत का सफर काफी मुश्किल भरा रहा है। जब उनके करियर ने रफ्तार पकड़ी तो उनकी मां को कैंसर हो गया। इसके कारण उनके पिता ने उन्हें अखाड़े में डाल दिया। 2019 में मीनाक्षी गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं। उनके करियर पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। वह 6 महीने बिस्तर पर रहीं। डॉक्टर ने कह दिया था कि अब उनका चल पाना भी मुश्किल है, लेकिन मीनाक्षी न सिर्फ चोट से उबरी बल्कि 10 किलो वजन कम करके मैट पर भी वापसी की।
बेटी के सपने के लिए पिता प्रेम निकले रेसलिंग एकेडमी की तलाश में
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मीनाक्षी के सफर के बारे में उनके पिता प्रेम ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मीनाक्षी को पहलवानी में हाथ आजमाने को लेकर कहा, ‘टीवी पर डब्ल्यूडब्ल्यूई देखने के बाद वह जॉन सीना की दीवानी हो गई। वह कहती थी कि मैं सीना की तरह रेसलिंग करना चाहती हूं।’ तब प्रेम को नहीं पता था कि प्रोफेशनल रेसलिंग कोई अलग चीज है। वह और उनकी बेटी रेसलिंग एकेडमी ढूंढने निकल पड़े।
प्रो रेसलिंग को लेकर मीनाक्षी क्या बोलीं
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीनाक्षी ने एशियन चैंपियनशिप के लिए अपने ट्रायल के बाद कहा था, ‘मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि प्रो रेसलिंग उससे अलग है जो मैं अभी कर रहा हूं। मेरे परिवार में किसी को भी इसके बारे में कोई अंदाजा नहीं था। मेरे पिता किसान थे इसलिए उन्हें भी ज्यादा जानकारी नहीं थी।’
12 साल की उम्र में स्पोर्ट्स हॉस्टल पहुंचीं
जब गोयत परिवार को पता चला कि निदानी स्पोर्ट्स हॉस्टल ही वो जगह है जहां से ओलंपियन निकले हैं तो मीनाक्षी को 12 साल की उम्र में ट्रेनिंग के लिए वहां भेज दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रेम ने कहा, ‘जब मैंने उसे निदानी स्पोर्ट्स हॉस्टल में छोड़ा तो वह सिर्फ 12 साल की बच्ची थी और उसका वजन 26 किलोग्राम था। हर रविवार को अखाड़े के लिए एक बस जाती थी। इसलिए मैं कभी-कभी उसके लिए फल और दूध ले जाता था या कभी-कभी अखाड़े जाने वाले बच्चों को दे देता था।’
मां को कैंसर
मीनाक्षी धीरे-धीरे कुश्ती में आगे बढ़ने लगी, लेकिन घर पर एक दुखद घटना घटी जब उनकी मां को कैंसर का पता चला। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रेम ने याद करते हुए कहा, ‘मेरी पत्नी को कैंसर का पता चला और मेरे पास उसे लंबे समय तक अखाड़े में रखने के अलावा कोई चारा नहीं था।’ अखाड़े में रहने से फायदा यह हुआ कि मीनाक्षी लगातार ट्रेनिंग करती रहीं।
मीनाक्षी चोटिल
ट्रेनिंग का फायदा मिलने लगा और वह 2016 के सब-जूनियर नेशनल्स और 2018 के जूनियर नेशनल्स में गोल्ड जीतकर रैंक में ऊपर चढ़ने लगीं, लेकिन 2019 में गुवाहाटी में अंडर-23 नेशनल्स में एक मुकाबले के दौरान, फिसलन भरे रेसलिंग मैट की वजह से उनका पैर फिसल गया। मीनाक्षी के पैर में चोट लग गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रेम ने कहा, ‘उसकी चोट काफी गंभीर थी। डॉक्टरों ने कहा था कि अब उनके लिए चलना मुश्किल होगा। वह छह महीने से ज़्यादा बिस्तर पर रही। जब दूसरे लोग मेडल जीत रहे थे तो वह अपनी हालत देखकर उदास रहती थी।’
करीब 10 किलोग्राम वजन कम किया
जब मीनाक्षी चोट से ठीक होकर मैट पर लौटीं तो उनका वजन 68 किलोग्राम था और वह मुश्किल से हिल-डुल पाती थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रेम ने बताया,’ चोट ठीक होने के बाद वह जल्दी से मैट पर वापस आना चाहती थीं। उन्होंने जल्दी से करीब 10 किलोग्राम वजन कम किया और ज्यादा तेजी से चलने लगीं। एक साल के अंदर वह 2021 नेशनल्स में नेशनल चैंपियन बन गईं।’
अंतिम को हराकर मीनाक्षी गोयत ने बनाई अपनी खास पहचान
50 किलोग्राम वर्ग में राष्ट्रीय खिताब जीतने के बाद मीनाक्षी गोयत ने 53 किलोग्राम कैटेगरी में कदम रखा, लेकिन यहां विनेश फोगट और अंतिम पंघाल जैसी मजबूत पहलवानों की मौजूदगी के कारण उन्हें आगे बढ़ने में मुश्किलें आईं। हालांकि, पिछले महीने ट्रायल्स में दो बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट अंतिम को हराकर मीनाक्षी ने अपनी अलग पहचान बना ली। इसके बावजूद एशियन चैंपियनशिप ट्रायल से पहले वह पिछली हारों के कारण दबाव में थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रायल के बाद उन्होंने कहा, “मैंने जूनियर स्तर पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेली हैं, लेकिन सीनियर स्तर पर अनुभव कम है। मैं अक्सर ट्रायल्स में हार जाती थी, खासकर कई बार अंतिम से। उन हारों ने मुझ पर काफी दबाव बना दिया था।”


