माली के बेटे से फुटबॉल के बादशाह तक, रोनाल्डो की अनोखी यात्रा

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नई दिल्ली : अगर दुनिया के बेहतरीन फुटबॉलरों की बात की जाए तो क्रिस्टियानो रोनाल्डो का नाम जरूर लिया जाता है। आज उनका स्टारडम पूरी दुनिया देखती है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी कहानी बेहद दिलचस्प और संघर्षों से भरी रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद रोनाल्डो ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत के दम पर खुद को उस ऊंचाई तक पहुंचाया, जहां आज पूरी दुनिया उनके खेल की दीवानी है, उनकी सराहना करती है और उनसे प्रेरणा लेती है।

साधारण परिवार से निकला सितारा, मां कुक-पिता माली

क्रिस्टियानो रोनाल्डो डॉस सैंटोस एवेइरो का जन्म 5 फरवरी 1985 को पुर्तगाली द्वीप मदीरा की राजधानी फुंचाल के साओ पेड्रो पैरिश में हुआ था। उनकी मां मारिया हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में कुक और सफाईकर्मी के तौर पर काम करती थीं जबकि पिता जोस डिनिस एवेइरो सैंटो एंटोनियो के ‘जुंटा डे फ्रेगेशिया’ में नगर निगम के माली थे। यही नहीं वो फुटबॉल क्लब एंडोरिन्हा के लिए पार्ट-टाइम किट-मैन का काम भी करते थे। रोनाल्डो की मां के मुताबिक उनके पिता नहीं चाहते थे कि उनका जन्म हो, लेकिन उन्हें इस दुनिया में आना था। रोनाल्हो अपने सभी भाई-बहनों के साथ एक ही कमरे में रहते थे और बेहद अभाव में उनका पालन-पोषण हुआ।

फुटबॉल के लिए छोड़ी पढ़ाई, जुनून ने दिलाई पहचान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रोनाल्डो ने 7-8 साल की उम्र से ही फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था और बचपन में वो 1992 से 1995 तक एंडोरिन्हा के लिए खेले जहां उनके पिता किट-मैन थे और इसके बाद उन्होंने नैसियोनल के साथ दो साल बिताए। 1997 में रोनाल्डो जब 12 साल के हुए तब स्पोर्टिंग सीपी के साथ तीन दिन के ट्रायल पर गए जिसने उन्हें 1500 पाउंड की फीस पर साइन किया था। इसके बाद वो मदीरा से लिस्बन चले गए ताकि स्पोर्टिंग सीपी के यूथ सिस्टम में शामिल हो सकें। रोनाल्डो ने 14 साल की उम्र तक पढ़ाई की, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी मां और स्पोर्टिंग सीपी में अपने ट्यूटर लियोनेल पोंटेस की सहमति से पढ़ाई छोड़ दी ताकि वे पूरी तरह से फुटबॉल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

दिल की सर्जरी के बाद भी नहीं रुके रोनाल्डो

रोनाल्डो काफी मुश्किलों से गुजर रहे थे और तब उनकी मुश्किल और बढ़ गई जब उन्हें टैकीकार्डिया नाम की बीमारी का पता चला। फिर रोनाल्डो की दिल की सर्जरी हुई और फिर वो ठीक हुए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि लग तो ऐसा रहा था कि वो खेल नहीं पाएंगे, लेकिन उनके जज्बे की वजह से उन्होंने फिर से ट्रेनिंग शुरू की। 2021 में क्रिस्टियानो रोनाल्डो की मां स्पोर्टिंग सीपी के आधिकारिक टेलीविजन चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर उनका बेटा एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी नहीं बना होता, तो वह एक राजमिस्त्री होता।

बचपन में ‘क्राई-बेबी’ के नाम से पुकारे जाते थे रोनाल्डो

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बचपन में रोनाल्डो को उनके साथी खिलाड़ी क्राई-बेबी कहकर बुलाते थे क्योंकि जब वह मैच हारते थे या उन्हें गेंद नहीं मिलती थी, तो वह रोने लगते थे। स्पोर्टिंग की यूथ टीमों में अपने शानदार प्रदर्शन से प्रभावित करने के बाद उन्हें फर्स्ट-टीम मैनेजर बोलोनी द्वारा मुख्य टीम में प्रमोट कर दिया गया। 17 साल की उम्र में, 14 अगस्त 2002 को उन्होंने फर्स्ट टीम के लिए अपना पहला आधिकारिक मैच खेला यह मैच जोस अल्वालाडे स्टेडियम में इंटर मिलान के खिलाफ UEFA चैंपियंस लीग के क्वालिफाइंग राउंड में था। इसके एक महीने बाद ब्रागा के खिलाफ उन्होंने डेब्यू किया, और 7 अक्टूबर को, मोरेइरेन्स के खिलाफ 3-0 की जीत में उन्होंने दो गोल किए।

18 साल की उम्र में रोनाल्डो की किस्मत ने ली करवट

अगस्त 2003 में स्पोर्टिंग सीपी और मैनचेस्टर यूनाइटेड के बीच एक दोस्ताना मैच हुआ। 18 साल के रोनाल्डो ने उस मैच में इतना शानदार प्रदर्शन किया कि मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाड़ी और उनके मैनेजर सर एलेक्स फर्ग्यूसन दंग रह गए। मैच खत्म होने के बाद फर्ग्यूसन ने कहा कि वह रोनाल्डो को लिए बिना इंग्लैंड वापस नहीं जाएंगे। इसके बाद 12.24 मिलियन पाउंड की फीस के साथ वह मैनचेस्टर यूनाइटेड से जुड़े जो उस समय किसी युवा खिलाड़ी के लिए एक रिकॉर्ड था। उन्हें नंबर 7 जर्सी दी गई और यहीं से उनके एक महान खिलाड़ी बनने के सफर की असली शुरुआत हुई।

सफलताओं से भरा रोनाल्डो का करियर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फुटबॉल इतिहास के महान खिलाड़ियों में शुमार क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अपने करियर में कई बड़े पुरस्कार अपने नाम किए हैं, जिनमें पांच बैलन डी’ओर, तीन UEFA मेन्स प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और चार यूरोपियन गोल्डन शूज शामिल हैं। उन्हें फीफा द्वारा पांच बार दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना जा चुका है। रोनाल्डो ने अपने करियर में 34 ट्रॉफियां जीती हैं, जिनमें पांच UEFA चैंपियंस लीग और यूरोपियन चैंपियनशिप भी शामिल हैं। उनके नाम चैंपियंस लीग में सबसे ज्यादा 140 गोल और 42 असिस्ट, यूरोपियन चैंपियनशिप में 14 गोल और 8 असिस्ट, साथ ही सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच (226) और अंतरराष्ट्रीय गोल (143) करने का रिकॉर्ड दर्ज है। वह इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने चार अलग-अलग क्लबों के लिए 100 या उससे अधिक गोल किए हैं। 1,300 से ज्यादा मैच खेल चुके रोनाल्डो ने 960 से अधिक गोल दागे हैं। 41 साल की उम्र में भी उनका शानदार सफर जारी है।

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