कराची . Blessing Muzarabani पर Pakistan Super League द्वारा लगाए गए दो साल के प्रतिबंध को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। खिलाड़ी के एजेंट ने इस फैसले को “बेहद ज्यादा” बताते हुए साफ कहा है कि बिना किसी औपचारिक अनुबंध के इतनी कड़ी सजा देना न्यायसंगत नहीं है। एजेंट के मुताबिक, फरवरी में इस्लामाबाद यूनाइटेड ने मुजराबानी को टीम में शामिल करने के लिए संपर्क किया था और एक प्रस्ताव पर सहमति भी बनी थी, लेकिन यह पूरी तरह इस शर्त पर आधारित था कि पहले आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट जारी किया जाएगा और उसके बाद ही संबंधित बोर्ड से एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लिया जाएगा। एजेंट का दावा है कि दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई लिखित अनुबंध नहीं भेजा गया, जिससे स्थिति अनिश्चित बनी रही। इसी दौरान Kolkata Knight Riders की ओर से बेहतर प्रस्ताव आया, जिसे खिलाड़ी ने स्वीकार कर लिया और आईपीएल से जुड़ गए। एजेंट का कहना है कि “जिस अनुबंध पर कभी हस्ताक्षर ही नहीं हुए, उसे तोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।”
वहीं Pakistan Cricket Board इस मामले में अलग रुख रखता है। बोर्ड का कहना है कि जब किसी खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी के बीच वेतन और अन्य शर्तों पर सहमति बन जाती है, तो वह समझौता बाध्यकारी हो जाता है, चाहे औपचारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर हुए हों या नहीं। इसी आधार पर बोर्ड ने मुजराबानी को दो साल के लिए PSL से प्रतिबंधित कर दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यह सजा पिछले मामलों की तुलना में अधिक सख्त है, क्योंकि बोर्ड का मानना है कि खिलाड़ी ने प्रतिबद्धता निभाने में सहयोग नहीं किया। हालांकि एजेंट ने इसे प्रशासनिक चूक बताते हुए लीग से बैन हटाने की अपील की है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े हुए हैं और इस विवाद का कोई त्वरित समाधान नजर नहीं आ रहा। ऐसे में मुजराबानी अब 2029 तक PSL में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, जो उनके करियर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।


