नई दिल्ली : डोपिंग की काली छाया से अब तक लगभग दूर रहे तीरंदाजी जैसे खेल पर भी अब इसका खतरा मंडराने लगा है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) द्वारा की गई जांच में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज सुखमणि गजानन बाबरेकर डोप पॉजिटिव पाए गए हैं। उनके सैंपल में विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की सूची एस-3 के अंतर्गत प्रतिबंधित बीटा-2 एगोनिस्ट ‘टरब्यूटालाइन’ पाया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नाडा ने इस मामले में सुखमणि से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि महाराष्ट्र के इस खिलाड़ी ने अस्थायी प्रतिबंध स्वीकार कर लिया है। तीरंदाजी में डोपिंग के मामले बेहद दुर्लभ माने जाते हैं और यह देश में इस खेल से जुड़ा केवल तीसरा मामला है। इससे पहले भी कुछ वर्ष पूर्व पंजाब के एक तीरंदाज को डोपिंग के कारण प्रतिबंधित किया गया था। यदि सुखमणि नाडा को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो सुनवाई के दौरान उन पर दो से चार साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
औरंगाबाद में लिया गया सैंपल, डोपिंग मामले में बड़ा खुलासा
2017 की विश्व यूथ चैंपियनशिप और 2018 के एशिया कप स्टेज-3 में रजत पदक जीतने वाले रिकर्व तीरंदाज सुखमणि औरंगाबाद स्थिति एनसीओई में थे। जहां उनका नाडा ने आउट ऑफ कंपटीशन सैंपल लिया था। उनसे इस वर्ष 19 फरवरी को बी सैंपल कराने के बारे में पूछा गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बी सैंपल नहीं कराया और अस्थायी प्रतिबंध स्वीकार कर लिया। अब उनसे इस प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन की स्वीकारोक्ति के बारे में पूछा गया है। उन्हें इस माह तक जवाब देना है।
एएआई जल्द जारी करेगा नई हिदायतें
हाल ही में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने 2023 के एशियाई खेलों में कंपाउंड टीम स्वर्ण जीतने वाले प्रथमेश जावकर से भी तीन ‘व्हेयरअबाउट फेल्योर’ (टेस्ट के लिए लोकेशन न बताने) के मामले में जवाब मांगा है। यदि वह संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाते हैं, तो उन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जिससे उनका आगामी एशियाई खेलों में हिस्सा लेना मुश्किल हो जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसी बीच सुखमणि गजानन बाबरेकर का मामला सामने आने के बाद भारतीय तीरंदाजी महासंघ (एएआई) ने डोपिंग के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तीरंदाजों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन दिशा-निर्देशों में खिलाड़ियों को नाडा के नियमों का सख्ती से पालन करने की स्पष्ट हिदायत दी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।


