नई दिल्ली : विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ के बीच नया टकराव अब केवल एक सामान्य पात्रता विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला उनके भविष्य और 2026 एशियाई खेल से पहले भारतीय कुश्ती में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएफआई इस विवाद को सिर्फ संन्यास और प्रतियोगिता में वापसी के नियमों से जुड़ा तकनीकी मुद्दा नहीं मान रहा है, बल्कि इसे एक अनुशासनात्मक मामला मान रहा है। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह तय होता है कि विनेश के पास आगे क्या कानूनी और खेल संबंधी विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि महासंघ ने फिलहाल उनकी वापसी के दरवाजे बंद कर दिए हैं। फिर भी महासंघ के सख्त रुख के बावजूद अगर पहलवान ऐसा करना चाहती हैं तो उनके लिए एक रास्ता है। इस टकराव के केंद्र में डब्ल्यूएफआई का यह आरोप है कि विनेश ने 2023 में ट्रायल प्रक्रिया के दौरान महासंघ के नियमों का उल्लंघन किया था जब महासंघ को निलंबित कर दिया गया था और आईओए द्वारा नियुक्त तदर्थ समिति उसका कामकाज देख रही थी। विनेश से पहले ही जवाब मांगा जा चुका है और अगर उस समय के तदर्थ समिति के सदस्यों से भी फैसले लेने के बारे में बताने के लिए कहा जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।
समिति की अगुआई भूपिंदर सिंह बाजवा कर रहे थे। हां, अगर विनेश को कुछ सफाई देनी है तो तदर्थ समिति के सदस्य भी डब्ल्यूएफआई और यूडब्ल्यूडब्ल्यू के नियमों की जरा भी परवाह नहीं करने के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं। जरूरत पड़ने पर उनसे भी जवाब मांगा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संजय सिंह ने बात करते हुए इशारा किया कि डब्ल्यूएफआई का मानना है कि विनेश की परेशानियां प्रशासनिक नहीं बल्कि खुद की वजह से हैं। उन्होंने विनेश पर लगे एक आरोप का जिक्र करते हुए पूछा कि आप खुद एक खिलाड़ी हैं। क्या आप एक ही दिन में दो वजन वर्ग में ट्रायल दे सकती हैं? जब वह मेरे से मिलीं तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
पहला और शायद सबसे आसान रास्ता है प्रक्रियागत अनुपालन। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएफआई ने बार-बार कहा है कि दरवाजे हमेशा के लिए बंद नहीं हुए हैं। संजय सिंह ने खुद कहा कि महासंघ उनके लिखित स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है। अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक है तो उनकी वापसी स्वीकार्य होगी। अगर यह संतोषजनक नहीं है तो वह नहीं खेल पाएंगी। इसका मतलब है कि विनेश का निकट भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह अनुशासनात्मक प्रणाली से जुड़ती हैं या मामले को कानूनी और राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाती हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विनेश फोगाट के लिए एक संभावित रास्ता यह है कि वह कारण बताओ नोटिस का विस्तृत जवाब दें और अनुशासनात्मक समिति के सामने प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी की अनुमति की मांग करें। अगर समिति इस पर स्वीकृति देती है, तो वह समय पर घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेकर 2026 एशियाई खेल की क्वालीफिकेशन प्रक्रिया सहित बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी दावेदारी मजबूत कर सकती हैं। अगर विनेश एशियाई खेलों के लिए जापान जाती हैं, तो वह पदक की मजबूत दावेदारों में शामिल रह सकती हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ के बीच चल रहा विवाद अगर आगे बढ़ता है तो यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है। अगर महासंघ उनकी सफाई को खारिज करता है, तो विनेश इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती हैं या फिर खेल मंत्रालय के समक्ष अपील कर सकती हैं। इसके अलावा वह भारतीय ओलंपिक संघ के जरिए भी हस्तक्षेप की मांग कर सकती हैं, खासकर तब जब उनका यह दावा हो कि WFI का फैसला मनमाना या चुनिंदा तरीके से लागू किया गया है।


