फ्रेंचाइजी क्रिकेट बनाम इंटरनेशनल क्रिकेट, आईसीसी ने बनाई नई योजना

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नई दिल्ली : दुनियाभर में टी20 फ्रेंचाइजी लीग्स का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे इंटरनेशनल क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। करोड़ों की कमाई वाली इन लीग्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और कई स्टार खिलाड़ी अब राष्ट्रीय टीमों की तुलना में फ्रेंचाइजी क्रिकेट को ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसी बढ़ती चिंता के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बड़ा कदम उठाते हुए एक विशेष समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति इस बात की जांच करेगी कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट और इंटरनेशनल क्रिकेट के बीच बेहतर संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि दोनों प्रारूपों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

टी20 लीग्स के बढ़ते दबदबे के बीच आईसीसी अलर्ट

ICC बोर्ड ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही T20 फ्रेंचाइजी लीगों को देखते हुए एक समर्पित समिति के गठन को मंजूरी दी है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट मौजूदा इंटरनेशनल क्रिकेट कैलेंडर के साथ कैसे साथ में चल सकता है, ताकि मौजूदा ढांचे पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। ICC के अनुसार, सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड इस बात को लेकर चिंतित हैं कि घरेलू T20 लीगों के विस्तार से द्विपक्षीय सीरीज और ICC के फ्यूचर टूर प्रोग्राम यानी FTP पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ICC ने अपने बयान में कहा कि बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते विस्तार पर चिंता व्यक्त की और मौजूदा ढांचे के भीतर इंटरनेशनल कैलेंडर के साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट के सामंजस्य का आकलन करने के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में फ्रेंचाइजी क्रिकेट का विस्तार तेजी से हुआ है। इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL के अलावा SA20, इंटरनेशनल लीग T20, बिग बैश लीग, बांग्लादेश प्रीमियर लीग, लंका प्रीमियर लीग, द हंड्रेड और कैरेबियन प्रीमियर लीग जैसी लीग पहले से क्रिकेट कैलेंडर में बड़ी जगह घेर चुकी हैं। इतना ही नहीं, इस साल यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग भी शुरू होने जा रही है, जिससे शेड्यूल और अधिक व्यस्त हो जाएगा।

करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट ने बदला क्रिकेट का समीकरण

ICC लंबे समय से खिलाड़ियों की उपलब्धता, नेशनल टीमों की प्रतिबद्धताओं और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की व्यावसायिक सफलता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। पहले भी ICC की विभिन्न समितियों में यह प्रस्ताव रखा जा चुका है कि एक खिलाड़ी को एक सीजन में सीमित संख्या में ही फ्रेंचाइजी लीग खेलने की अनुमति दी जाए, ताकि इंटरनेशनल क्रिकेट सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहे। यह चिंता खास तौर पर छोटे क्रिकेट देशों के लिए ज्यादा गंभीर है, जहां खिलाड़ी अब इंटरनेशनल क्रिकेट की तुलना में फ्रेंचाइजी क्रिकेट को अधिक लाभदायक और स्थायी करियर विकल्प मानने लगे हैं।

इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी बना रहे कई बड़े सितारे

हाल के वर्षों में कई बड़े खिलाड़ियों ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी बना ली है। इनमें निकोलस पूरन और हेनरिक क्लासेन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूरन ने 30 साल की उम्र से पहले ही इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहकर सभी को चौंका दिया था। वहीं, सुनील नरेन ने भी काफी पहले राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना बंद कर दिया था, लेकिन वह आज भी दुनियाभर की फ्रेंचाइजी लीग्स में लगातार सक्रिय नजर आते हैं। इन उदाहरणों ने इंटरनेशनल क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच बढ़ते संतुलन के मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

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