नई दिल्ली: एक समय ऐसा था जब फुटबॉल मैदान पर साथी खिलाड़ी उन्हें चिढ़ाते थे और हार के बाद वह रोते हुए अपने दादा-दादी के पास लौट जाते थे। तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही लड़का एक दिन फीफा वर्ल्ड कप 2026 में यूरोपियन चैंपियन स्पेन के सामने दीवार बनकर खड़ा होगा। लेकिन केप वर्डे के अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अपने संघर्ष और मेहनत से इस सपने को हकीकत में बदल दिया। टूर्नामेंट के अपने पहले ही मुकाबले में केप वर्डे ने बड़ा उलटफेर करते हुए स्पेन को 0-0 की बराबरी पर रोक दिया। इस ऐतिहासिक नतीजे के सबसे बड़े नायक 40 वर्षीय वोजिन्हा रहे, जिन्होंने लगातार शानदार बचाव कर स्पेन के कई हमलों को नाकाम किया और अपनी टीम को यादगार परिणाम दिलाया।
रोमांचक मैच में स्पेन ने गेंद पर पूरा कंट्रोल बनाए रखा और गोलपोस्ट पर 27 शॉट लगाए। स्टार खिलाड़ियों से सजी टीम लगातार केप वर्डे की डिफेंस लाइन को भेदने की कोशिश करती रही। यहां तक कि दूसरे हाफ में युवा सनसनी लामिन यामाल को भी मैदान पर उतारा गया, लेकिन कोई भी खिलाड़ी वोजिन्हा की दीवार को नहीं तोड़ सका। 40 साल के गोलकीपर ने कुल सात शानदार सेव किए और अपनी टीम को वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में एक ऐतिहासिक पॉइंट दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वोजिन्हा ने कुल 7 सेव किए और इस तरह वह अपने वर्ल्ड कप डेब्यू मैच में क्लीन शीट रखने वाले सबसे उम्रदराज गोलकीपर बन गए।
जैसे ही मैच खत्म हुआ, वोजिन्हा अपने गोलपोस्ट के पास झुक गए और भावुक होकर रोने लगे। कुछ ही क्षण बाद उनके साथी खिलाड़ी उन्हें गले लगाने पहुंच गए। इस नजारे को देख स्टेडियम में मौजूद स्पेनिश फैंस भी विपक्षी टीम के गोलकीपर की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक सके।
मैच से पहले इंस्टाग्राम पर वोजिन्हा के करीब 50 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन स्पेन के खिलाफ उनके करिश्माई प्रदर्शन ने उन्हें रातों-रात सोशल मीडिया स्टार बना दिया। मैच खत्म होने तक उनके फॉलोअर्स की संख्या 15 लाख के पार पहुंच चुकी थी। वहीं कुछ ही घंटों बाद यह आंकड़ा 50 लाख के पार जा पहुंचा। फॉलोअर्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खबर लिखे जाने तक इनके 54 लाख फॉलोअर्स हो चुके थे।
वोजिन्हा का सफर संघर्ष और धैर्य से भरा रहा है। उन्होंने 25 साल की उम्र में अंगोला के क्लब प्रोग्रेसो के लिए अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उनका सफर मोल्दोवा, साइप्रस, स्लोवाकिया और पुर्तगाल के कई क्लबों तक पहुंचा, जहां उन्होंने अपने अनुभव और खेल को लगातार निखारा। फिलहाल वह पुर्तगाल के सेकेंड डिवीजन क्लब चावेस का हिस्सा हैं। साल 2012 में वोजिन्हा ने केप वर्डे की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया और तब से टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी बने हुए हैं। कई बार उन्होंने संन्यास लेने का मन बनाया, लेकिन वर्ल्ड कप खेलने का सपना उन्हें हर बार आगे बढ़ने की ताकत देता रहा। अब वही सपना उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंच पर हीरो बना चुका है।


