नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने केवल रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि खेल की सोच और पहचान भी बदल दी। सुनील मनोहर गावस्कर उन्हीं महान खिलाड़ियों में शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने उस दौर में भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जब दुनिया के सबसे तेज और घातक गेंदबाज बिना हेलमेट बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा लेते थे। गावस्कर ने निडर होकर उनका सामना किया और अपनी बेहतरीन तकनीक, अटूट धैर्य तथा मजबूत मानसिकता के दम पर यह साबित किया कि साहस और कौशल किसी भी रफ्तार पर भारी पड़ सकते हैं।
आज भारतीय बल्लेबाज दुनिया के किसी भी देश में जाकर आत्मविश्वास से खेलते हैं। इस आत्मविश्वास की नींव रखने वालों में अगर किसी एक बल्लेबाज का नाम सबसे ऊपर रखा जाए तो वह सुनील गावस्कर हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भारतीय क्रिकेट को सम्मान दिलाया और यह विश्वास भी कि भारत सिर्फ स्पिन गेंदबाजों का देश नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय बल्लेबाजों की भी भूमि है।
ऐसी तकनीक कि गेंदबाज भी हो जाते थे बेबस
मुंबई में 10 जुलाई 1949 को जन्में सुनील गावस्कर को क्रिकेट इतिहास के महानतम सलामी बल्लेबाजों में गिना जाता है। उनकी बल्लेबाजी का सबसे बड़ा आधार उनकी लगभग त्रुटिहीन तकनीक थी। ऑफ स्टंप की शानदार समझ, गेंद की लंबाई को तुरंत पढ़ लेने की क्षमता, दाएं और बाएं दोनों पैरों पर समान दक्षता तथा बेहतरीन संतुलन उन्हें अलग बनाते थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर की रक्षात्मक बल्लेबाजी को आज भी क्रिकेट की पाठ्यपुस्तक माना जाता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बल्लेबाजी की कला सीखने वाले खिलाड़ियों के लिए सुनील गावस्कर की तकनीक किसी आदर्श से कम नहीं है। यही वजह थी कि उनका विकेट हासिल करना दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के लिए भी आसान नहीं होता था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर के पास लगभग हर तरह का शॉट मौजूद था, लेकिन उन्होंने कभी अनावश्यक आक्रामकता को प्राथमिकता नहीं दी। टीम की जरूरत के अनुसार खेलने की कला ही उन्हें महान बनाती है।
बिना हेलमेट बल्लेबाजी कर रचा इतिहास
आज के दौर में हेलमेट, आर्म गार्ड और आधुनिक सुरक्षा उपकरण सामान्य बात हैं, लेकिन सुनील गावस्कर ने अपने करियर का अधिकांश हिस्सा बिना हेलमेट खेले बिताया। सामने माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, मैल्कम मार्शल, जोएल गार्नर और अन्य घातक तेज गेंदबाज होते थे, जिनकी रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास पहुंचती थी। ऐसे माहौल में लगभग 16 वर्षों तक बल्लेबाजी करते हुए 10 हजार से अधिक टेस्ट रन बनाना सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि अद्भुत साहस, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है।
वेस्टइंडीज दौरे ने दुनिया को दिया नया क्रिकेट नायक
1971 का वेस्टइंडीज दौरा भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण शृंखलाओं में गिना जाता है। सुनील गावस्कर ने अपने पहले ही टेस्ट दौरे पर ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया को चौंका दिया। सुनील गावस्कर ने चार टेस्ट मैचों में 774 रन बनाए। इस दौरान चार शतक और तीन अर्धशतक लगाए तथा औसत 154.80 रही। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों में शतक जमाया, जिसमें एक दोहरा शतक भी शामिल था। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह उस समय टेस्ट इतिहास के दूसरे बल्लेबाज बने और आज भी ऐसा करने वाले एकमात्र भारतीय हैं। यहीं से दुनिया को समझ में आ गया कि भारतीय बल्लेबाजी अब सिर्फ घरेलू परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहने वाली।
वेस्टइंडीज के खिलाफ रिकॉर्डों के बादशाह बने गावस्कर
सुनील गावस्कर का नाम आते ही वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी स्वतः याद आती है। जिस टीम के तेज गेंदबाजों से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज घबराते थे, उसी आक्रमण के खिलाफ सुनील गावस्कर ने सबसे अधिक सफलता हासिल की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 65 से अधिक की औसत से रन बनाए। उनका सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 236 रन भी इसी टीम के खिलाफ आया। यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि उस दौर के सबसे भयावह गेंदबाजी आक्रमण के सामने धैर्य और कौशल का सर्वोच्च उदाहरण थी।
जब ड्रॉ टेस्ट भी बन गया भारत की ऐतिहासिक जीत
क्रिकेट इतिहास की महान पारियों की चर्चा हो और 1979 के द ओवल टेस्ट में खेली गई सुनील गावस्कर की 221 रन की पारी का उल्लेख न हो, ऐसा संभव नहीं। इंग्लैंड ने भारत के सामने 438 रन का विशाल लक्ष्य रखा था। उस समय चौथी पारी में इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना लगभग असंभव माना जाता था, लेकिन सुनील गावस्कर ने ऐसी बल्लेबाजी की कि भारत जीत के बेहद करीब पहुंच गया।
आखिरकार मैच ड्रॉ रहा और भारत लक्ष्य से सिर्फ नौ रन दूर रह गया। हालांकि, जीत नहीं मिली, लेकिन उस पारी ने दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय टीम अब सिर्फ सम्मानजनक हार स्वीकार करने वाली टीम नहीं रही। कई क्रिकेट इतिहासकार मानते हैं कि इसी मैच ने विदेशी धरती पर भारतीय बल्लेबाजी की सोच बदल दी।
जब सुनील गावस्कर बने भारत की पहली ‘दीवार’
आज ‘द वॉल’ का नाम आते ही राहुल द्रविड़ याद आते हैं, लेकिन बल्लेबाजी में विकेट की कीमत समझाने का काम सुनील गावस्कर ने उससे कई दशक पहले कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर की बल्लेबाजी ने पूरी पीढ़ी को सिखाया कि हर गेंद पर चौका लगाना महानता नहीं है। सही गेंद का इंतजार करना, गेंदबाज को थकाना और अपनी टीम के लिए लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
34 शतक… जब अजेय माना जाता था यह रिकॉर्ड
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। उनके नाम 34 टेस्ट शतक थे, जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड रहा। बाद में सचिन तेंदुलकर ने इसे पीछे छोड़ा, लेकिन सुनील गावस्कर के रिकॉर्ड का महत्व कभी कम नहीं हुआ। दरअसल, उनकी उपलब्धियों का मूल्य केवल आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने उस दौर में यह सब हासिल किया, जब बल्लेबाजी कहीं अधिक कठिन थी, सुरक्षा उपकरण सीमित थे और पिचें भी आज जैसी बल्लेबाजों के अनुकूल नहीं होती थीं।
सीमित ओवर क्रिकेट में संघर्ष भी रहा
सुनील गावस्कर का करियर यह भी सिखाता है कि महान खिलाड़ी भी हर प्रारूप में समान रूप से सफल नहीं होते। वनडे क्रिकेट में उन्हें टेस्ट जैसी सफलता नहीं मिली। 1979 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 174 गेंदों पर 36 रन की उनकी पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित पारियों में गिनी जाती है। वह 1983 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उनके अनुभव ने टीम को मजबूती प्रदान की।
मैदान से बाहर भी उतनी ही प्रभावशाली आवाज
संन्यास के बाद सुनील गावस्कर क्रिकेट से कभी दूर नहीं हुए। उन्होंने कमेंटेटर, स्तंभकार और विश्लेषक के रूप में नई पहचान बनाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़े और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की क्रिकेट समिति के अध्यक्ष रहे। स्पष्ट राय रखने के कारण वह कई बार विवादों में भी रहे, लेकिन उनकी बेबाक शैली ने उन्हें क्रिकेट जगत की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल रखा।
भारतीय क्रिकेट की असली विरासत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद उनके 10 हजार 122 टेस्ट रन, 34 शतक या अनगिनत रिकॉर्ड नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी विरासत वह मानसिक बदलाव है, जो उन्होंने भारतीय क्रिकेट में पैदा किया। सुनील गावस्कर ने भारतीय बल्लेबाजों को सिखाया कि विदेशी परिस्थितियां डरने की नहीं, चुनौती स्वीकार करने की जगह हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने यह विश्वास जगाया कि भारतीय खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के सामने बराबरी से खड़े हो सकते हैं। आज जब विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल या यशस्वी जायसवाल विदेशी धरती पर बड़ी पारियां खेलते हैं, तो उनकी सफलता की जड़ें कहीं न कहीं उस रास्ते तक जाती हैं, जिन्हें सबसे पहले सुनील गावस्कर ने बनाया था।
क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी केवल रिकॉर्ड बनाते हैं, कुछ अपनी टीम को जीत दिलाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो पूरे दौर की सोच बदल देते हैं। सुनील गावस्कर ऐसे ही महान खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्हें सिर्फ एक महान बल्लेबाज कहना उनके योगदान के साथ न्याय नहीं होगा। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान, नया आत्मविश्वास और विश्व क्रिकेट में सम्मान दिलाने की मजबूत नींव रखी। उनकी निडर बल्लेबाजी और अनुकरणीय तकनीक ने आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया।भारतीय क्रिकेट के इस महानायक सुनील गावस्कर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।


