स्ट्राइक रेट पर उठे सवालों का तिलक वर्मा ने दिया बेबाक जवाब

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नई दिल्ली : भारतीय टी20 टीम के उप-कप्तान तिलक वर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 श्रृंखला से पहले अपने स्ट्राइक रेट को लेकर उठ रहे सवालों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। तिलक ने स्पष्ट किया कि बल्लेबाजी के दौरान उनकी प्राथमिकता व्यक्तिगत आंकड़े नहीं, बल्कि टीम की जरूरतें होती हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि मैच की परिस्थितियों के अनुसार अपनी भूमिका निभाना ही उनकी जिम्मेदारी है और देश के लिए खेलते समय हमेशा टीम के हित को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखना पड़ता है।

पिछले कुछ वर्षों में तिलक वर्मा के स्ट्राइक रेट में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। जहां वर्ष 2024 तक उनका स्ट्राइक रेट लगभग 180 के आसपास था, वहीं अब यह घटकर करीब 140 रह गया है। इसका असर टी20 क्रिकेट में उनकी बल्लेबाजी की प्रभावशीलता पर भी देखने को मिला है। विशेष रूप से स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उन्हें संघर्ष करना पड़ा है। यही वजह है कि टीम प्रबंधन ने उनकी भूमिका में बदलाव करते हुए उन्हें फिनिशर के तौर पर इस्तेमाल करने का फैसला किया है, ताकि उन्हें स्पिन गेंदबाजों का कम सामना करना पड़े और वह अंतिम ओवरों में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।

‘टीम की जरूरत सबसे पहले, मैं वही करता हूं’

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मुकाबले से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तिलक वर्मा ने कहा कि इस प्रारूप में खिलाड़ियों को अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर उतरना पड़ता है और हर भूमिका अलग चुनौती लेकर आती है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा टीम की जरूरत होती है। तिलक के अनुसार, यदि टीम को उनकी ओर से पारी संभालने की जरूरत होती है तो वह धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हैं, जबकि तेज रन बनाने की आवश्यकता होने पर आक्रामक अंदाज अपनाने से भी पीछे नहीं हटते। उन्होंने दोहराया कि व्यक्तिगत आंकड़ों से अधिक उनके लिए टीम की सफलता मायने रखती है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तिलक वर्मा ने आगे कहा कि वह चाहें तो पहली ही गेंद से बड़े शॉट खेलने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन देश के लिए खेलते समय उनकी जिम्मेदारियां कहीं अधिक होती हैं। उन्होंने कहा कि मैदान पर उतरने के बाद सबसे पहले टीम की स्थिति और मैच की मांग को समझना जरूरी होता है। यदि टीम को उनकी जरूरत अंत तक क्रीज पर बने रहने की हो, तो वह उसी भूमिका को निभाते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तिलक ने बताया कि टीम की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है और वह उसी के अनुरूप बल्लेबाजी करते हैं। उप-कप्तान बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी टीम प्रबंधन के भरोसे का प्रतीक है, इसलिए उनकी कोशिश रहती है कि उन्हें सौंपी गई भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाएं और टीम की योजनाओं के मुताबिक प्रदर्शन करें।

‘विकेट गिरें तो पारी संभालना भी जिम्मेदारी है’

तिलक वर्मा ने माना कि विदेशों में भारत के हालिया निराशाजनक प्रदर्शन का असर उनकी बल्लेबाजी की भूमिका पर भी पड़ा है। आयरलैंड में टीम को 2-0 और इंग्लैंड में 4-0 से हार का सामना करना पड़ा, जहां शुरुआती विकेट लगातार जल्दी गिरने से मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर पारी संभालने की अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तिलक ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बल्लेबाज के पास रुककर खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। दबाव में विकेट बचाते हुए पारी को आगे बढ़ाना पहली प्राथमिकता बन जाती है और उस समय बड़े शॉट खेलने का जोखिम नहीं लिया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत स्ट्राइक रेट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण टीम की जीत होती है और उसी को ध्यान में रखकर वह अपनी बल्लेबाजी की रणनीति तय करते हैं।

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