पूर्व स्पिनर का बड़ा बयान, बिश्नोई की फॉर्म पर जताई चिंता; कुलदीप यादव के समर्थन में उतरे

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नई दिल्ली : रवि बिश्नोई ने भारत के लिए अपना पिछला टी20 मैच इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेला था, जहां श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली भारतीय टीम को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। उस मुकाबले में बिश्नोई का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने चार ओवर के स्पैल में 60 रन लुटाए और एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। महंगे स्पैल के अलावा उनकी ओवरस्टेपिंग भी चर्चा का विषय बनी। स्पिन गेंदबाजों के लिए इस तरह की गलती बेहद दुर्लभ मानी जाती है, लेकिन बिश्नोई का पिछला पैर लगातार रिटर्न क्रीज को छू रहा था, जिसके कारण उन्हें तीन नो-बॉल फेंकने की सजा मिली। इन तीनों नो-बॉल के बाद इंग्लैंड को फ्री-हिट मिली, जिस पर बल्लेबाजों ने 14 रन बटोर लिए। यह मैच के अहम मोड़ों में से एक साबित हुआ और भारत की हार की बड़ी वजह भी बना।

गलत रन-अप ने बढ़ाई रवि बिश्नोई की मुश्किलें

जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारत के पास मौजूद दो स्पिन विकल्पों में से रवि बिश्नोई एक हैं। भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह का मानना ​​है कि इस लेग-स्पिनर की सबसे बड़ी समस्या उनका गलत रन-अप था जिसे कोचिंग स्टाफ को ठीक करना चाहिए था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कहा कि उन्हें अपने रन-अप पर काफी काम करने की जरूरत है क्योंकि आम तौर पर आप सीधे स्टंप्स की ओर दौड़ते हैं। वह पहले बाईं ओर फिर दाईं ओर और फिर बाईं ओर जाते हैं और उसके बाद क्रीज पर वापस आने की कोशिश करते हैं और यहीं पर उनसे गलती हो रही है।

कुलदीप यादव पर जताना होगा भरोसा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि जब उन्होंने वो नो-बॉल फेंकीं तो मैं सोच रहा था कि बॉलिंग कोच रवि बिश्नोई के साथ क्या कर रहे थे क्योंकि जाहिर है वह नेट्स में भी उसी तरह बॉलिंग कर रहे थे। उन्हें रोका क्यों नहीं गया और यह बॉलिंग कोच का पहला काम होना चाहिए। इसलिए मुझे सच में समझ नहीं आता कि जब वह नेट्स में उस तरह बॉलिंग कर रहे थे तो उन्हें सुधारा क्यों नहीं गया। क्योंकि आजकल व्हाइट-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल फेंकना एक अपराध है। 61 वर्षीय खिलाड़ी का मानना ​​था कि कुलदीप यादव को खेलने का कम मौका मिलने की वजह उनकी घटती स्किल नहीं, बल्कि मैनेजमेंट का उन पर भरोसा न होना था।

भरोसे से निखरता है खिलाड़ियों का प्रदर्शन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनिंदर सिंह का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के प्रदर्शन के लिए टीम मैनेजमेंट का भरोसा बेहद अहम होता है। उन्होंने कहा कि कई बार जब टीम मैनेजमेंट किसी खिलाड़ी पर पूरा विश्वास नहीं दिखाता, तो उसकी विकेट लेने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों प्रभावित होते हैं। उनके अनुसार रवि बिश्नोई में आज भी वही प्रतिभा मौजूद है, लेकिन अगर उन्हें लगातार बेंच पर बैठाया जाएगा और नियमित अवसर नहीं दिए जाएंगे, तो उनका आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनिंदर ने कहा कि कुछ खिलाड़ियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना जरूरी होता है। यदि किसी गेंदबाज को न केवल टीम की योजनाओं से बाहर रखा जाए, बल्कि प्लेइंग इलेवन में शामिल करने पर भी विचार न किया जाए, तो उसके प्रदर्शन में गिरावट आना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जो गेंदबाज पहले मध्य ओवरों में लगातार विकेट दिलाता था, उसके अचानक संघर्ष करने के पीछे कोई न कोई वजह जरूर होगी और उनके मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह टीम मैनेजमेंट का पूरा भरोसा नहीं मिलना है।

ऑलराउंडर्स को मिल रही ज्यादा प्राथमिकता

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूर्व भारतीय स्पिनर ने यह भी कहा कि ऑलराउंडर्स को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता देने की वजह से टीम इंडिया अपने असली मैच-विनिंग गेंदबाजों को नजरअंदाज कर रही है। उनका मानना है कि बल्लेबाजी में अधिक गहराई लाने की सोच का सबसे ज्यादा नुकसान कुलदीप यादव जैसे विशेषज्ञ स्पिनर को उठाना पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “जिस तरह से टीमों का चयन किया जा रहा है, उसे देखकर मुझे हैरानी होती है। हम बल्लेबाजी को नंबर आठ तक ले जाने के लिए जरूरत से ज्यादा ऑलराउंडर्स खिला रहे हैं। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ऑलराउंडर्स की भूमिका निश्चित रूप से अहम होती है, लेकिन किसी मैच-विनर की कीमत पर ऐसा नहीं किया जा सकता। मैं ऐसे विशेषज्ञ गेंदबाज को चुनना पसंद करूंगा, जो मध्य ओवरों में विकेट लेकर मैच का रुख बदल सके और टीम को मुकाबले में बनाए रखे।”

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