फैसलाबाद टेस्ट की कहानी, जब मैदान पर छिड़ी ईमानदारी की जंग, अंपायर के आरोप के बाद ठप हो गया टेस्ट मैच

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नई दिल्ली : क्रिकेट को अक्सर ‘जेंटलमैन गेम’ के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन इसके लंबे इतिहास में कुछ ऐसे विवाद भी दर्ज हैं, जिन्होंने इस खेल की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े किए। ऐसा ही एक बड़ा विवाद दिसंबर 1987 में पाकिस्तान के फैसलाबाद में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान देखने को मिला। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मुकाबले में इंग्लैंड के तत्कालीन कप्तान माइक गैटिंग और पाकिस्तानी अंपायर शकूर राणा के बीच मैदान पर तीखी नोकझोंक हुई, जिसने इस टेस्ट को क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में शामिल कर दिया। माइक गैटिंग और शकूर राणा दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े होकर बहस करते नजर आए। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो दुनिया भर में प्रसारित हुए। इस मामले ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा और यह टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे विवादित मुकाबलों में शामिल हो गया।

रिश्तों में पहले से थी कड़वाहट, फैसलाबाद टेस्ट विवाद ने पकड़ा तूल

उस दौर में इंग्लैंड और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमों के बीच रिश्तों में पहले से ही तनाव मौजूद था। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच भी हालात बहुत सहज नहीं थे। उसी साल इंग्लैंड के पाकिस्तान दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई विवाद सामने आए थे, जिससे माहौल और खराब हो गया था। इसके अलावा लाहौर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में अंपायर शकील खान के कुछ फैसलों को लेकर दोनों टीमों में नाराजगी देखने को मिली थी। लगातार हुई इन घटनाओं ने पहले से मौजूद अविश्वास और तनाव को और बढ़ा दिया, जिसका असर आगे चलकर फैसलाबाद टेस्ट के दौरान मैदान पर दिखाई दिया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

फैसलाबाद टेस्ट के दूसरे दिन का खेल खत्म होने से ठीक पहले मैदान पर विवाद की शुरुआत हुई। इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 292 रन बनाकर मजबूत पकड़ बना ली थी, जबकि पाकिस्तान की टीम 106 रन पर पांच विकेट गंवाकर मुश्किल स्थिति में थी। इसी दौरान इंग्लैंड के कप्तान माइक गैटिंग दिन का खेल समाप्त होने से पहले एक अतिरिक्त ओवर करवाना चाहते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका मानना था कि कुछ और गेंदें मिलने से पाकिस्तान के बचे हुए विकेटों पर दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन इसी बात को लेकर मैदान पर ऐसा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विवाद खड़ा हुआ, जिसने इस टेस्ट मैच को क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में शामिल कर दिया। माइक गैटिंग ने ऑफ स्पिनर एडी हेमिंग्स को गेंदबाजी के लिए बुलाया। गेंद फेंके जाने से पहले माइक गैटिंग ने नॉन-स्ट्राइकर सलीम मलिक को बताया कि वह लॉन्ग लेग पर खड़े डेविड कैपल को ऊपर बुला रहे हैं। हालांकि, एडी हेमिंग्स जब रन-अप में थे, तभी माइक गैटिंग ने हाथ के इशारे से डेविड कैपल को संकेत दिया कि वह अब अपनी जगह पर रुक जाएं।

अंपायर शकूर राणा का बड़ा आरोप- “यह चीटिंग है”, मैदान पर मचा बवाल

नियमानुसार, माइक गैटिंग ने बल्लेबाज को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी और उनका इशारा बल्लेबाज का ध्यान भटकाने वाला भी नहीं था, लेकिन स्क्वायर लेग पर खड़े अंपायर शकूर राणा को माइक गैटिंग का यह तरीका पसंद नहीं आया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने जोर से ‘स्टॉप, स्टॉप’ कहा। दूसरे अंपायर खिजर खान ने तुरंत ‘डेड बॉल’ घोषित कर दी।

पहले तो खिलाड़ी और बल्लेबाज समझ नहीं पाए कि हुआ क्या है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब माइक गैटिंग ने कारण पूछा तो शाकूर राणा ने कहा, ‘‘तुम हाथ हिला रहे हो। यह चीटिंग है।’’ माइक गैटिंग ने जवाब दिया कि वह फील्डर को आगे नहीं बढ़ा रहे थे, बल्कि सिर्फ उसे रुकने का इशारा कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने शकूर राणा से कहा कि वह अपनी जगह पर लौट जाएं ताकि खेल आगे बढ़ सके। शकूर राणा वहां से जाते हुए कथित तौर पर बोले, ‘तुम चीटर हो।’

मैदान पर आमने-सामने आए गैटिंग और शकूर राणा, बढ़ा विवाद

माइक गैटिंग पहले से ही अंपायरिंग से नाराज थे। उनका मानना था कि लाहौर टेस्ट में भी उन्हें गलत आउट दिया गया था। इंग्लैंड की टीम इस बात से भी नाराज थी कि शकूर राणा अपने कोट के नीचे पाकिस्तान का स्वेटर पहनकर अंपायरिंग कर रहे थे। शकूर राणा की टिप्पणी सुनने के बाद माइक गैटिंग अपना आपा खो बैठे। वह तेजी से उनकी ओर बढ़े और दोनों आमने-सामने आ गए।

माइक गैटिंग और शकूर राणा के बीच तीखी बहस हुई और एक-दूसरे पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। टीवी कैमरों में माइक गैटिंग को अंगुली दिखाते हुए और शकूर राणा को भी उसी आक्रामक अंदाज में जवाब देते हुए देखा गया। बाद में इंग्लैंड के खिलाड़ी बिल एथी बीच-बचाव करते हुए माइक गैटिंग को वहां से ले गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शकूर राणा ने बाद में कहा, ‘‘माइक गैटिंग ने बल्लेबाज के पीछे फील्डर को नियमों के खिलाफ बदला। जब मैंने डेड बॉल कहा तो उन्होंने मुझे अपशब्द कहे। जब मैंने कहा कि यह नियमों के खिलाफ है तो उन्होंने जवाब दिया- नियम तो हमने बनाए हैं।’

तीसरे दिन सिर्फ विवाद छाया रहा, मैदान पर नहीं दिखा पूरा क्रिकेट

यह विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। उसी शाम शकूर राणा ने मैच से हटने की धमकी दे दी। हालांकि, कई लोगों को उम्मीद थी कि अगले दिन तक मामला शांत हो जाएगा, लेकिन जब तीसरे दिन इंग्लैंड की टीम मैदान पर पहुंची तो स्थिति और गंभीर हो चुकी थी। शकूर राणा मैदान पर उतरने को तैयार नहीं थे। दोनों टीमों और अधिकारियों के बीच लगातार बैठकें हुईं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शकूर राणा ने साफ कहा कि जब तक माइक गैटिंग लिखित माफी नहीं देंगे, वह अंपायरिंग नहीं करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार माइक गैटिंग ने कहा कि अगर उन्हें माफी मांगनी है तो शकूर राणा भी उनसे माफी मांगें। सुबह करीब साढ़े दस बजे इंग्लैंड की टीम करीब दो हजार दर्शकों और बड़ी संख्या में मौजूद दंगा-रोधी पुलिस के सामने मैदान पर पहुंची, लेकिन न अंपायर आए और न ही पाकिस्तान के बल्लेबाज।

सुलह की हर कोशिश बेअसर

कुछ मिनट इंतजार के बाद खिलाड़ी पवेलियन लौट गए। इसके बाद पूरी टीम लगभग छह घंटे तक मैदान पर ही रही, लेकिन तीसरे दिन का खेल शुरू नहीं हो सका। इस बीच, दोनों पक्षों के बीच कई मसौदे तैयार किए गए, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। उस समय टेस्ट एंड काउंटी क्रिकेट बोर्ड (बाद में ECB) के अध्यक्ष रमन सुब्बा रो ने समझौता कराने की कोशिश की।

बाद में अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग दावे किए। किसी ने कहा कि माइक गैटिंग दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को तैयार थे, लेकिन शकूर राणा नहीं माने। वहीं रमन सुब्बा रो का कहना था कि शकूर राणा तैयार थे, लेकिन माइक गैटिंग नहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दूसरी ओर, शाकूर राणा ने बाद में कहा, ‘‘मैं कभी माफी मांगने वाला नहीं था। मैंने कुछ गलत नहीं किया था। माइक गैटिंग की लिखित माफी पर आज भी मुझे गर्व है।’’

गैटिंग की लिखित माफी के बाद लौटी क्रिकेट की रौनक

आखिरकार दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा और यह मामला लंदन तक पहुंच गया। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय को भी इसमें दखल देना पड़ा। रेस्ट डे (पहले छह दिन तक टेस्ट मैच चलता था, जिसमें बीच का एक दिन आराम का होता था) के बाद चौथे दिन सुबह करीब 10 बजे माइक गैटिंग ने शकूर राणा को अपने हाथ से लिखी माफीनामा सौंप दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माइक गैटिंग इस माफी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। माइक गैटिंग ने माफी देने से इनकार करने तक पर विचार किया था। बाद में माइक गैटिंग ने कहा कि वह कप्तानी और अपने भविष्य को लेकर सोच रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने भी बोर्ड के फैसले का विरोध करते हुए एक बयान जारी किया था।

मैच पटरी पर आया, लेकिन विवाद की गर्मी बनी रही

गैटिंग की लिखित माफी के बाद फैसलाबाद टेस्ट दोबारा शुरू हुआ, लेकिन मुकाबले का नतीजा इंग्लैंड के पक्ष में नहीं जा सका। खराब रोशनी के कारण इंग्लैंड जीत से चूक गया और मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि, मैच खत्म होने के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के अधिकारी पाकिस्तान पहुंचे और उन्होंने टीम के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका समर्थन किया। फैसलाबाद टेस्ट का यह विवाद लंबे समय तक क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना रहा और इसे खेल इतिहास के सबसे विवादित मुकाबलों में गिना गया।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने पहले निर्णायक टेस्ट के लिए शकूर राणा और शकील खान को अंपायर नियुक्त किया था। हालांकि, फैसलाबाद टेस्ट विवाद के बाद हुई बातचीत और बढ़ते तनाव को देखते हुए बाद में दोनों अंपायरों को हटाकर उनकी जगह नए अंपायरों की नियुक्ति की गई।

कुछ समय बाद इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने पाकिस्तान दौरे के दौरान सामने आई मुश्किल परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को एक-एक हजार पाउंड का बोनस देने का फैसला किया। हालांकि, इस कदम को लेकर पाकिस्तान में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और इससे दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में पहले से मौजूद अविश्वास और बढ़ गया।

विवाद के बाद क्या बोले माइक गैटिंग और शकूर राणा?

बाद में माइक गैटिंग ने इस विवाद को अपने करियर के सबसे कठिन पलों में से एक बताते हुए स्वीकार किया कि “यह मेरे करियर का ऐसा पल नहीं था, जिस पर मुझे गर्व हो। यह क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन गया है और शायद हमेशा याद रखा जाएगा।” उन्होंने माना कि मैदान पर हालात जिस तरह बिगड़े, वह किसी भी खिलाड़ी या कप्तान के लिए आदर्श स्थिति नहीं थी। गैटिंग ने यह भी कहा कि फैसलाबाद टेस्ट की इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तटस्थ अंपायरों की व्यवस्था लागू करने की बहस को गति देने में अहम भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इस विवाद ने यह एहसास कराया कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तटस्थ अंपायरों की नियुक्ति जरूरी है।

विवाद के वर्षों बाद शकूर राणा ने स्पष्ट किया कि उनके मन में माइक गैटिंग के प्रति कोई व्यक्तिगत कटुता नहीं थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि मैदान पर जो कुछ हुआ, वह परिस्थितियों का परिणाम था और उसे निजी दुश्मनी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। साल 2001 में निधन से कुछ समय पहले एक ब्रिटिश टैबलॉयड के अनुरोध पर शकूर राणा लंदन गए, जहां लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड के बाहर उनकी अचानक माइक गैटिंग से मुलाकात हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस दिलचस्प वाकये को याद करते हुए शकूर राणा ने मुस्कराते हुए कहा, “मैं उनसे हाथ मिलाने गया। मुझे देखते ही उन्होंने कहा, ‘ओह गॉड, फिर तुम!’ और वहां से आगे बढ़ गए।” यह मुलाकात बताती है कि फैसलाबाद टेस्ट का विवाद वर्षों बाद भी दोनों के जहन में ताजा था।

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