अश्विन-हरभजन के बाद नई उम्मीद बने सारांश जैन, टेस्ट खेलने के लिए छोड़ा IPL

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नई दिल्ली : टेस्ट क्रिकेट में 1998 से 2024 के बीच भारतीय टीम की सफलता में ऑफ-स्पिन गेंदबाजों की अहम भूमिका रही। दिग्गज हरभजन सिंह की विरासत को रविचंद्रन अश्विन ने आगे बढ़ाया और घरेलू परिस्थितियों में दोनों ने भारत की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस 26 साल के दौर में दोनों गेंदबाजों ने मिलकर कुल 954 विकेट हासिल किए। हालांकि, अश्विन के संन्यास के बाद भारत अब उनके उत्तराधिकारी की तलाश में है। मौजूदा टीम प्रबंधन का रुख ऑलराउंडर्स की ओर अधिक रहा है और इसी वजह से वॉशिंगटन सुंदर को भी लगातार मौके दिए गए हैं।

सुंदर ऑफ-स्पिनर हैं, लेकिन उनकी काबिलियत काफी अलग है। उनके चोटिल होने के कारण श्रीलंका दौरे पर भारत ने मध्य प्रदेश के ऑफ स्पिनर सारांश जैन को चुना, जिनकी उम्र 33 से ज्यादा है, लेकिन वह सफेद गेंद से ज्यादा लाल गेंद को तवज्जो देते हैं। भारत के लिए टेस्ट खेलने के लिए सारांश ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) तक से दूरी बना ली। वह रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करके भारतीय टीम में चुने गए हैं।

लाल गेंद क्रिकेट पर फोकस, आईपीएल से बनाई दूरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आईपीएल 2024 के बाद सारांश जैन ने चंद्रकांत पंडित से कहा कि अब कभी किसी टीम के लिए नेट बॉलर नहीं बनना चाहते। सारांश ने उस सीजन कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए डेढ़ महीने तक उनके नेट्स में बॉलिंग की थी। जब पंडित ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि सफेद गेंद के कारण उनकी लाल गेंद से गेंदबाजी की कला प्रभावित हो सकती है।

टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करना है

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चंद्रकांत पंडित ने सारांश जैन से वजह पूछा तो उन्होंने कहा, ‘सर, मैं रेड-बॉल क्रिकेट में भारत के लिए खेलना चाहता हूं। अगर कोई मुझे नीलामी में चुनता है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मैं सिर्फ नेट्स में जाकर गेंदबाजी नहीं करना चाहता। व्हाइट-बॉल की वजह से हो सकता है कि मैं रेड-बॉल क्रिकेट का मौका गंवा दूं। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में तो मैं बाद में भी कभी बॉलिंग कर सकता हूं।’

चंद्रकांत पंडित के लिए यह फैसला चौंकाने वाला नहीं

सारांश जैन की बातों से चंद्रकांत पंडित को हैरानी नहीं हुई। रणजी ट्रॉफी में मध्य प्रदेश के हेड कोच होने के कारण वह इस बात से वाकिफ थे कि ऑफ-स्पिनर के लिए लंबे फॉर्मेट की क्या अहमियत है। 2020 में, जब पंडित टीम के कोच बने तो सारांश नियमित खिलाड़ी नहीं थे, लेकिन हालात तुरंत बदल गए क्योंकि पंडित को उनके खेल में कुछ अगल दिखा। उनका खेल सफेद गेंद वाले क्रिकेट की जरूरतों से अछूता था।

54 फर्स्ट-क्लास मैचों में 188 विकेट

सारांश 2014 से घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी छाप 2021-22 सीजन के नॉकआउट मैचों में छोड़ी। 2021-22 रणजी ट्रॉफी सीजन के अहम दौर में सारांश ने क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में कुल 13 विकेट लिए। इसके बाद के सीजन में उन्होंने और ज्यादा मैच खेले और लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। 2022-23 में आठ मैचों में 35 विकेट, 2023-24 में आठ मैचों में 27 विकेट, 2024-25 में सात मैचों में 21 विकेट और 2025-26 में सात मैचों में 30 विकेट लिए। भारत के लिए डेब्यू करने तक उनके नाम 54 फर्स्ट-क्लास मैचों में 188 विकेट दर्ज हो चुके थे।

सारांश जैन की बल्लेबाजी क्षमता भी बनाती है उन्हें खास

सारांश जैन के पास अश्विन की तरह ऑफ स्पिन से प्रभाव छोड़ने के साथ-साथ बल्ले से भी अहम योगदान देने की क्षमता है। उनके इसी ऑलराउंड खेल ने उन्हें भारतीय टीम में जगह दिलाने में मदद की। 2021-22 रणजी ट्रॉफी सीजन में मुंबई के खिलाफ खिताबी मुकाबले की पहली पारी में सारांश ने शानदार अर्धशतक लगाया था। हाल ही में श्रीलंका ए के खिलाफ भारत ए के दौरे पर खेले गए दूसरे अनौपचारिक टेस्ट में भी उन्होंने नाबाद 70 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी।

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