नई दिल्ली : भारतीय घरेलू क्रिकेट के शेड्यूल को लेकर पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने चिंता जताई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका मानना है कि रणजी ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट को आईपीएल नीलामी और सफेद गेंद क्रिकेट के कारण बार-बार प्रभावित किया जा रहा है। 2026-27 के घरेलू सत्र में रणजी ट्रॉफी के पहले चरण और नॉकआउट मुकाबलों के बीच दो महीने से अधिक का अंतर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गावस्कर के मुताबिक, इतने लंबे अंतराल का असर खिलाड़ियों की रेड-बॉल क्रिकेट की लय और निरंतरता पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि घरेलू क्रिकेट के ढांचे में रणजी ट्रॉफी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि खिलाड़ी लंबे प्रारूप के लिए लगातार तैयार रहें और प्रथम श्रेणी क्रिकेट की अहमियत भी बनी रहे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महान भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की नीलामी के लिए खिलाड़ियों को परखने (ऑडिशन) को ज्यादा अहमियत दी जा रही है, जबकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी को नजरअंदाज किया जा रहा है। पुरुषों का सीनियर घरेलू सीजन बेंगलुरु और चेन्नई में पिछले दो हफ्तों में खेले गए दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट के साथ शुरू हुआ। अब 11 अक्टूबर से रणजी ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज का पहला चरण होगा। यह पांच नवंबर तक चलेगा। रणजी ट्रॉफी के पहले चरण के मुकाबले देश भर के विभिन्न मैदानों पर खेले जाएंगे।
रणजी ट्रॉफी के पहले और दूसरे चरण के बीच दो महीने से ज्यादा का ब्रेक
इसके बाद टूर्नामेंट में दो महीने से ज्यादा का ब्रेक होगा। इस दौरान 14 नवंबर 2026 से आठ जनवरी 2027 के बीच सीमित ओवरों के टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी T20 और 50 ओवरों वाली विजय हजारे ट्रॉफी के मुकाबले खेले जाएंगे। सफेद गेंद क्रिकेट वाले इन दोनों टूर्नामेंट का समय आईपीएल 2027 के लिए होने वाली नीलामी के आसपास होगा।
सुनील गावस्कर का दावा- सब कुछ आईपीएल नीलामी के लिए हो रहा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने कहा कि रणजी ट्रॉफी के लीग चरण के बाद एक महीने से ज्यादा का अंतर है। इसके बाद सफेद गेंद के टूर्नामेंट खेले जाएंगे और फिर रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबले शुरू होंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर के मुताबिक, इतने लंबे अंतराल के कारण टूर्नामेंट की लय और खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित होता है।
रणजी सत्र का दूसरा चरण 17 जनवरी 2027 से
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने सवाल उठाया कि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के मुकाबले पहले क्वार्टर फाइनल तक क्यों नहीं खेले जा सकते? इसके बाद कुछ हफ्तों का ब्रेक देकर सेमीफाइनल और फाइनल कराया जा सकता है, जैसा रणजी ट्रॉफी में होता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए नहीं किया जाता, क्योंकि इस टूर्नामेंट के तुरंत बाद IPL की नीलामी होती है। आगामी रणजी सत्र का दूसरा चरण 17 जनवरी 2027 से शुरू होगा, जबकि फाइनल 27 फरवरी से खेला जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने कहा कि सफेद गेंद के टूर्नामेंट के लिए किसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप को बीच में कैसे रोका जा सकता है? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर के मुताबिक, रणजी ट्रॉफी को घरेलू क्रिकेट में फिर से सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में इसके कार्यक्रम में लगातार बदलाव किया जाता रहा है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 2024-25 सत्र से रणजी ट्रॉफी के मौजूदा कार्यक्रम को अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान होने वाली दिक्कतों को वजह बताया गया था, जिनके कारण पिछले वर्षों में कई मैच प्रभावित हुए थे। इससे पहले 2023-24 सत्र में रणजी ट्रॉफी जनवरी से मार्च के बीच खेली गई थी।
रेड-बॉल क्रिकेट की अनदेखी का असर खिलाड़ियों के विकास पर पड़ेगा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने चेतावनी दी कि रेड-बॉल क्रिकेट की लगातार अनदेखी का असर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के विकास पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि घरेलू क्रिकेट को नजरअंदाज कर केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर ध्यान देना लंबे समय में नुकसानदेह साबित हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गावस्कर के मुताबिक, खिलाड़ियों को लगातार प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने का पर्याप्त अवसर मिलना जरूरी है, क्योंकि इसी से उनमें लंबे प्रारूप की तकनीक, धैर्य और निरंतरता विकसित होती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर के मुताबिक, अगर रेड-बॉल क्रिकेट को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया तो भविष्य में शीर्ष स्तर के खिलाड़ी तैयार करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भारतीय टीम के लगभग हर खिलाड़ी ने रेड-बॉल क्रिकेट के जरिए अपनी क्रिकेट की बुनियाद मजबूत की है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गावस्कर का मानना है कि लंबे प्रारूप में खेलने से खिलाड़ियों को परिस्थितियों को समझने, धैर्य बनाए रखने और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का अनुभव मिलता है। उनके अनुसार, सफेद गेंद का क्रिकेट अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन वह खिलाड़ियों को वह अनुभव और मजबूती नहीं दे पाता, जो रेड-बॉल क्रिकेट लंबे समय में विकसित करता है।


