ध्यानचंद के पुत्र एवं पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी राजकुमार सिंह अलविदा हुए

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नई दिल्ली: हॉकी के जादूगर, देश के गौरव और करोड़ों खेलप्रेमियों के प्रेरणास्रोत मेजर ध्यानचंद के तीसरे पुत्र एवं पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी राजकुमार सिंह (81 वर्ष ) अब हमारे बीच नहीं रहे. रविवार, 13 सितंबर 2026 को झांसी के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया. वे लंबे समय से अर्थराइटिस (गठिया) से पीड़ित थे. उनके निधन का समाचार केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी की उस गौरवशाली विरासत के लिए भी एक गहरी और अपूरणीय क्षति है, जिसकी पहचान स्वयं दद्दा ध्यानचंद के नाम से होती है.

25 दिसंबर 1944 को जन्मे राजकुमार सिंह, दद्दा ध्यानचंद के पुत्रों में तीसरे नंबर पर थे और महान ओलंपियन हॉकी खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद के बड़े भाई थे. वे उस महान परिवार की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे, जिसने पीढ़ियों तक भारतीय हॉकी की प्रतिष्ठा और परंपरा को अपने जीवन से जीवंत बनाए रखा.

राजकुमार सिंह केवल महान खिलाड़ी ध्यानचंद के पुत्र होने की पहचान तक सीमित नहीं रहे. वे स्वयं अपने दौर के एक प्रतिभाशाली और उत्कृष्ट हॉकी खिलाड़ी थे. हाफ-बैक की पोजीशन पर खेलते हुए उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से अलग पहचान बनाई. रेलवे की ओर से लगभग 16 राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में खेलने के साथ-साथ उनका लंबे समय तक देश के प्रतिष्ठित क्लब मोहन बागान से जुड़ाव रहा। उन्होंने भारत की ओर से फ्रांस, जर्मनी सहित अनेक देशों की टीमों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेले. हॉकी के प्रति उनका प्रेम जीवन के अंतिम वर्षों तक बना रहा और वे वेटरन हॉकी में भी सक्रिय रहे. वर्ष 1986 में लंदन में आयोजित वेटरन हॉकी विश्व कप में भाग लेना भी उनके खेल जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी.

करीब 25 वर्षों से झांसी में रह रहे राजकुमार सिंह ने वर्ष 1967 में ईस्टर्न रेलवे, कोलकाता से अपने सेवाकाल की शुरुआत की। बाद में वे सेंट्रल रेलवे से जुड़े और स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हुए.

लेकिन राजकुमार सिंह की सबसे बड़ी विशेषता शायद यह थी कि वे केवल अपने पिता की महान विरासत को आगे बढ़ाने वाले पुत्र ही नहीं थे, बल्कि अपने छोटे भाई अशोक ध्यानचंद के जीवन में भी एक मार्गदर्शक और प्रेरक की भूमिका निभाते रहे. अशोक ध्यानचंद के अनुसार, राजकुमार सिंह ही उन्हें पहली बार कोलकाता लेकर गए थे. वहीं से हॉकी के प्रति उनका गंभीर जुड़ाव हुआ और आगे चलकर उन्हें भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनने का अवसर मिला. यह केवल दो भाइयों की कहानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी भावनात्मक डोर थी, जिसमें परिवार, विश्वास, प्रेरणा और हॉकी सब एक साथ जुड़े हुए थे.

अभी दो दिन पहले ही 11 सितंबर 2026 को अशोक ध्यानचंद ने राजकुमार सिंह के विवाह से संबंधित एक पुराना पत्र साझा किया था. करीब 52 वर्ष पूर्व, 11 जून 1974 को दद्दा ध्यानचंद द्वारा डी आई जी जबलपुर को लिखा गया वह पत्र राजकुमार सिंह के जबलपुर में होने वाले विवाह की तैयारियों और निमंत्रण से जुड़ा था. शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि अतीत की स्मृतियों से निकला यह पत्र, मात्र दो दिन बाद राजकुमार सिंह के निधन के पश्चात इतना भावुक और अमूल्य दस्तावेज बन जाएगा.

मै कुछ दिनों पूर्व खेल दिवस 29 अगस्त 2026 को जब झाँसी गया था, तब ओलिंपियन राजिंदर सिंह सीनियर के साथ मै दादा ध्यानचंद जी के निवास पर राजकुमार जी से मिला था और एक फोटो क्लिक किया था. आज राजकुमार सिंह के जाने के साथ ऐसा लगता है जैसे दद्दा ध्यानचंद जी के उस गौरवशाली परिवार की एक और जीवंत स्मृति हमसे दूर चली गई. उनके साथ खेल के मैदान की अनेक यादें, परिवार की अनगिनत स्मृतियां और हॉकी के स्वर्णिम अतीत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी भी जैसे मौन हो गई है. राजकुमार सिंह जी को अश्रुपूरित नेत्रों से विनम्र और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित है.
……..✍️ डा. अनिल वर्मा

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