टाइगर पटौदी और सलीम दुर्रानी का वो किस्सा, ‘मैं मुस्लिम हूं, बाकी हिंदू’ पर मचा था बवाल

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नई दिल्ली : खेलनामा की किताबगाथा के पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि फिल्म अभिनेता सैफ अली खान के पिता मंसूर अली खान पटौदी का नाम ‘टाइगर’ कैसे पड़ा और टेस्ट डेब्यू के महज एक साल बाद ही वह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान कैसे बन गए थे। इस अंक में कहानी आगे बढ़ाते हुए हम आपको उस दिलचस्प किस्से से रूबरू कराएंगे, जब ‘टाइगर’ पटौदी सलीम दुर्रानी पर गुस्सा हो गए थे और कथित तौर पर उन्हें मारने तक की बात कह दी थी। आखिर ऐसा क्या हुआ था कि पटौदी को दुर्रानी पर इतना गुस्सा आ गया? इस पूरे प्रसंग का जिक्र वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगजीन ने अपनी किताब ‘नॉट जस्ट क्रिकेट’ में किया है।

सलीम दुर्रानी ने भारत के लिए 29 टेस्ट खेले और 1202 रन बनाए। इसके अलावा अपनी स्पिन गेंदबाजी से 75 विकेट भी लिए। हालांकि, सलीम दुर्रानी की प्रतिभा को आंकड़ों से नहीं तौला जा सकता। फिल्म स्टार की तरह दिखने वाले सलीम दुर्रानी पब्लिक डिमांड पर छक्के लगाने के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि टीम से ड्रॉप होने पर कानपुर में लोगों ने ‘नो सलीम , नो टेस्ट’ के पोस्टर दिखाये थे। सलीम दुर्रानी ने फिल्मों में भी काम किया था।

सलीम दुर्रानी पर क्यों भड़क गए थे ‘टाइगर’ पटौदी?

सलीम दुर्रानी और ‘टाइगर’ पटौदी से जुड़ा किस्सा बताते हुए खेल पत्रकार प्रदीप मैगजीन लिखते हैं कि दुर्रानी एक शानदार ऑल-राउंडर थे। सलीम दुर्रानी की अलग प्रतिभा थी, जिन्हें 1971 में भारत की ऐतिहासिक जीत में पोर्ट ऑफ स्पेन में फेंकी गई दो ड्रीम बॉल (एक ही स्पैल में क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स का विकेट) के लिए याद किया जाता है।

सलीम दुर्रानी 1962 के दौरे पर भी भारतीय टीम का हिस्सा थे। मंसूर अली खान पटौदी उन्हें एक ऐसे इंसान के तौर पर याद करते थे, जिसने कभी अपनी जबरदस्त प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया। गलत कार्यों में समय बर्बाद करके अपने करियर को खराब कर लिया। सलीम दुर्रानी चेन-स्मोकर भी थे। मंसूर अली खान पटौदी की नाराजगी की वजह थी कि वह अपनी जबरदस्त काबिलियत को नहीं जानते थे।

दुर्रानी ने टाइगर से कहा- साथी खिलाड़ी उन्हें मारना चाहते हैं

कई लोग मंसूर अली खान पटौदी को सलीम दुर्रानी जैसी प्रतिभा को आगे न बढ़ पाने के लिए दोषी मानते हैं। मंसूर अली खान पटौदी ने बाद में यह माना, लेकिन उन्हें लगता था कि कोई भी कप्तान अपना आपा खो देता और सलीम दुर्रानी की मनमानी और नखरों को बर्दाश्त नहीं करता।

उन्होंने सलीम दुर्रानी के अजीब बर्ताव का एक किस्सा सुनाया। मंसूर अली खान पटौदी ने याद करते हुए कहा, ‘वह मेरे पास आए और कहा कि उनके टीम के साथी उन्हें (दुर्रानी) मारने की साजिश रच रहे हैं।’ मंसूर अली खान पटौदी हैरान रह गए। मंसूर अली खान पटौदी ने पूछा कि उनको (सलीम दुर्रानी) ऐसा क्यों लगा? उन्हें जवाब मिला, ‘मैं एक मुस्लिम हूं और बाकी सब हिंदू हैं। वे मुझे पसंद नहीं करते और मुझे मारने की साजिश रच रहे हैं।’

जब टाइगर पटौदी से कहा गया- ‘दो मुसलमान तुम्हें मार डालेंगे’

यह सुनते ही मंसूर अली खान पटौदी अपना आपा खो बैठे। उन्होंने सलीम दुर्रानी से कहा, “देखो, मुझे नहीं पता कि खिलाड़ी तुम्हारे साथ क्या करेंगे, लेकिन मैं तुम्हें बता दूं कि अगर तुम इसी तरह करते रहे तो टीम के 2 मुसलमान कप्तान और मैनेजर तुम्हें सबसे पहले मार डालेंगे।” उस दौरे पर गुलाम अहमद भारतीय टीम के मैनेजर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पटौदी की यह बात सुनकर माहौल काफी गंभीर हो गया था।

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