स्वर्ण पदक के साथ परिवार की खुशियों का सपना, हॉकी खिलाड़ियों की भावुक कहानी

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नई दिल्ली : भारतीय महिला हॉकी टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल सविता पूनिया को अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि टीम ने 44 साल बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का सपना साकार कर लिया है। सविता के जेहन में अब भी फाइनल की वह रात ताजा है, जब भारतीय खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इससे पहले सविता 2014 के इंचियोन, 2018 के जकार्ता और 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में भी भारतीय टीम का हिस्सा रही थीं, लेकिन इन तीनों मौकों पर टीम स्वर्ण पदक जीतने में सफल नहीं हो पाई थी।

लंबे इंतजार के बाद मिली इस ऐतिहासिक सफलता ने सविता और पूरी टीम के लिए इस स्वर्ण पदक को और भी खास बना दिया। सविता बेचैन थीं, रात हो चुकी थी और अगले दिन उन्हें मजबूत चीन से टकराना था। सविता ने पूरी टीम को एकत्र किया और सभी से कहा, तुम सभी ने कुछ सपने देखे होंगे। तुम्हारे ये सपने फाइनल का स्वर्ण पूरा कर सकता है। सविता ने कहा, हम सब हम सब यहां आज अपने सपनों को बयां करेंगे और फाइनल में इन्हें पूरा करने के लिए अपनी जान लगा देंगे।

मां के सपने के लिए जीता एशियाड का स्वर्ण

सविता अमर उजाला को बताती हैं कि यह बेहद भावुक पल था, लेकिन इसने हमें फाइनल के लिए मजबूत किया। वह बताती हैं कि ब्यूटी डुंगडुंग बोलीं कि उनकी मां बीमार है। अगर उनकी टीम स्वर्ण जीती तो वह अपनी मां का अच्छा इलाज कराएंगी। बलजीत कौर ने कहा कि उनके पास घर नहीं है। वह स्वर्ण जीतीं तो माता-पिता को घर देंगी। सविता ने खुद अपनी मां का उदाहरण रखा। उनकी मां ने कभी उनसे कुछ नहीं मांगा, लेकिन इस बार उन्होंने जीतकर आने को कहा है। वह मां के लिए स्वर्ण जीतना चाहती हैं।

हॉकी में स्वर्ण के बाद बिछु का सपना, बनना है डीएसपी

भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर बिछु देवी का अगला लक्ष्य मणिपुर पुलिस में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बनना है। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें उम्मीद है कि मणिपुर सरकार उन्हें डीएसपी बनाने का अवसर देगी। बिछु को विश्वास है कि देश के लिए यह बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद उनका सपना जरूर पूरा होगा। वहीं, चीन के खिलाफ फाइनल में निर्णायक गोल कर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाली लालरेमसियामी की इच्छा मिजोरम में हॉकी अकादमी खोलने की है। वह अपने राज्य के बच्चों को हॉकी का प्रशिक्षण देकर उन्हें इस स्तर तक तैयार करना चाहती हैं कि वे भविष्य में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकें। दोनों खिलाड़ियों के सपने स्वर्ण पदक की खुशी से आगे बढ़कर अपने क्षेत्र और देश के लिए योगदान देने की भावना को दर्शाते हैं।

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