पूर्व क्रिकेटर के बेटे चिन्मय सुतार की नई शुरुआत, मुंबई छोड़ मिजोरम से खेलेंगे घरेलू क्रिकेट

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नई दिल्ली : नंबर 11 पर खेलने वाले लालरेमपुइया छकछुआक के लिए 76 गेंदें किसी धड़कनें बढ़ा देने वाले अनुभव से कम नहीं रही होंगी। उन्होंने अपने मिजोरम की रणजी टीम के साथी चिन्मय सुतार का बखूबी साथ दिया, जिन्होंने इतिहास रच दिया। चिन्मय 90 के दशक में मुंबई के धुआंधार बल्लेबाज (छक्के लगाने के लिए मशहूर) राजेश सुतार के बेटे हैं। उन्होंने छकछुआक के साथ मिलकर आखिरी विकेट के लिए 189 रनों की नाबाद साझेदारी की।
इसमें से 169 रन खुद चिन्मय के बल्ले से निकले। इस पारी के साथ ही वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 400 रन बनाने वाले केवल दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। यह उपलब्धि सोमवार (19 अक्टूबर) को सोविमा स्थित नागालैंड क्रिकेट स्टेडियम में हासिल हुई। रणजी प्लेट डिवीजन का यह मैच नागालैंड के खिलाफ उनके ही घरेलू मैदान पर खेला जा रहा था।
पिंच हिटर पिता के विपरीत 29 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज चिन्मय ने अपनी नाबाद 400 रनों की पारी में केवल 7 छक्के लगाए। हालांकि, उन्होंने 517 गेंदों का सामना किया और इस दौरान 46 चौके और 7 छक्के जड़े। 392/9 के स्कोर पर लालरेमपुइया क्रीज पर चिन्मय का साथ देने आए और दोनों ने मिलकर स्कोर को 581/9 (डिक्लेयर) तक पहुंचा दिया। मिजोरम के गेस्ट खिलाड़ी ने शानदार नाबाद 400 रन बनाए। नंबर 11 पर बल्लेबाजी करने आए लालरेमपुइया ने 76 गेंदों पर नाबाद 14 रन बनाकर चिन्मय का बखूबी साथ दिया। इससे मिजोरम ने इतिहास रच दिया। नागालैंड अभी भी मिजोरम से 531 रन पीछे है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुंबई से मिजोरम आए चिन्मय ने उन अप्रत्याशित हालात के बारे में बताया, जिनकी वजह से यह बड़ी साझेदारी मुमकिन हो पाई। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने साथी से कहा कि हम छोटी-छोटी साझेदारियां करने की कोशिश करेंगे। हम बहुत आगे की नहीं सोच रहे थे, क्योंकि टेल-एंडर्स के साथ पहले से कोई पक्की योजना नहीं बनाई जा सकती। सच कहूं तो मैंने बस उनसे टिके रहने के लिए कहा था। जब मैं 400 रन के करीब था, तब भी मैं किसी माइलस्टोन के बारे में नहीं सोच रहा था। हम बस जितना हो सके, उतनी देर तक बल्लेबाजी करना चाहते थे, ताकि एक अच्छा स्कोर खड़ा किया जा सके।’

इस दौरान सुतार घरेलू क्रिकेट में 400 रन ठोकने वाले दूसरे भारतीय बन गए। उनसे पूर्व 78 साल पहले बीबी निंबालकर ने ऐसा कारनामा किया था, जिन्होंने 1948-49 में पुणे में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। पूर्वोत्तर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले 29 वर्षीय बल्लेबाज, क्रिकेट के इतिहास में 400 रन बनाने वाले कुल 10वें खिलाड़ी बन गए हैं। वह अब उन दिग्गज बल्लेबाजों की खास सूची में शामिल हो गए हैं, जिनमें ब्रायन लारा, डॉन ब्रैडमैन, बिल पोंसफोर्ड, ग्रीम हिक और अन्य बड़े नाम शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिन का खेल खत्म होने के बाद चिन्मय ने कहा, ‘मैं इसके बारे में नहीं सोच रहा था। मैंने 400 के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा था। मैं बस यही सोच रहा था कि आखिरी विकेट गिरने से पहले टीम के कुल स्कोर में कितने रन और जोड़े जा सकते हैं। हमने छोटी-छोटी साझेदारियों पर ध्यान दिया। बल्लेबाज के तौर पर हम 100 या 200 रनों के बारे में सोचते हैं, लेकिन 300 या 400 रन बनाना बहुत दुर्लभ है। आज मुझे वह मौका मिला। मुझे खुशी है कि ऐसा मेरे साथ हुआ।

चिन्मय ने अपनी पूरी क्रिकेट मुंबई में ही खेली है और मुंबई के मैदानों पर रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, सरफराज खान, पृथ्वी शॉ जैसे बड़े नामों के साथ खेले हैं। वह मुंबई की सीनियर टीम में जगह बनाने की काफी कोशिश कर रहे थे, लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा था। रेड-बॉल क्रिकेट खेलने की उनकी चाहत उन्हें लगातार बेचैन कर रही थी।

चिन्मय ने जून में आयोजित टी20 मुंबई लीग में हिस्सा लिया और फिर गेस्ट प्लेयर के तौर पर खेलने के लिए नॉर्थ-ईस्ट जाने का फैसला किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा सपना मुंबई के लिए रेड बॉल क्रिकेट खेलने का था। पिछले साल मैंने व्हाइट बॉल क्रिकेट तो खेला, लेकिन मेरे लिए हमेशा रेड बॉल क्रिकेट ही प्राथमिकता रही। मैं वहां अपना सपना पूरा नहीं कर सका। इसलिए मुझे रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका देने के लिए मैं मिजोरम का बहुत आभारी हूं।’

इस सीजन के अपने पहले मैच में सुतार 99 रन पर रन आउट हो गए। ऐसा लगा मानो एक बार फिर वह शतक के बिल्कुल करीब पहुंचकर भी उससे चूक गए हों। एक बड़ा शतक बस आने ही वाला था। 99 रन बनाने से पहले यह बाएं हाथ का बल्लेबाज मुंबई में खेलता था, जहां उसने विजय हजारे ट्रॉफी में एक प्रतिष्ठित घरेलू टीम का प्रतिनिधित्व किया था, और बाद में वह मिजोरम चला गया। जब आखिरी बल्लेबाज लालरेमपुइया उनके साथ क्रीज पर आए तब सुतार 231 रन पर खेल रहे थे। इस दौरान उन्हें दो बार जीवनदान मिला। एक बार पारी की शुरुआत में और दूसरी बार 44 रन पर। एक बार वह कैच आउट भी हुए, लेकिन वह ‘नो बॉल’ निकली।

मुंबई के पूर्व बल्लेबाज राजेश सुतार लंबे छक्के मारने के लिए मशहूर थे। उनके बेटे सुतार जूनियर अभी भी मिजोरम की संस्कृति में ढलने की कोशिश कर रहे थे। मुंबई से आकर एक गेस्ट प्लेयर के तौर पर खेलना बिल्कुल अलग अनुभव हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चिन्मय का कहना है कि भले ही देश के इस हिस्से में क्रिकेट का कोई बहुत बड़ा कल्चर न हो, लेकिन यहां के खिलाड़ी काफी मेहनती और अनुशासित हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने कोई खास उम्मीद नहीं पाली थी। मैं बस अपने विरोधियों के खिलाफ जीतना चाहता था। मैं अपनी टीम के लिए योगदान देना चाहता था और उन्हें एलीट डिवीजन में पहुंचाना चाहता था।’

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