Asian Para Games: तीसरे दिन भारत की पदकों से शुरुआत, दीप्ति ने बढ़ाया मान; भाविना-सोनल भी चमकीं

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नई दिल्ली : जापान के नागोया में हो रहे एशियाई पैरा खेलों में भारतीय पैरा एथलिटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत ने तीसरे दिन मंगलवार (20 अक्टूबर) की शुरुआत आधा दर्जन पदकों से की। एक स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक झटका। दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में को 56.36 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता।
भाविना पटेल और सोनल पटेल को टेबल टेनिस में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। प्रदीप कुमार ने भालाफेंक स्पर्धा में रजत और आयुष वर्मा ने कांस्य जीता। प्रवीण कुमार को शॉटपुट में कांस्य पदक मिला। भारत के पदकों की संख्या 17 हो गई हैं। 5 स्वर्ण, 6 रजत और 6 कांस्य पदक जीत चुका है।

दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 56.36 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। तेलंगाना की 23 वर्ष की दीप्ति दो बार पैरा विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीत चुकी हैं। 2024 में स्वर्ण जीता था। उन्होंने पैरालम्पिक में भी इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। जापान की नीना कान्नो ने 58.92 सेकंड का समय निकालकर रजत और अकाने कातो ने एक मिनट 00.26 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। टी20 श्रेणी में बौद्धिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं जिन्हें सूचना समझने, एकाग्रता बनाने और तकनीकी रणनीति पर अमल करने में दिक्कत होती है।

भाविना पटेल और सोनल पटेल ने एशियाई पैरा खेलों की टेबल टेनिस महिला एकल स्पर्धा में अपने अपने वर्ग के सेमीफाइनल हारने के बाद कांस्य पदक जीता। पैरालम्पिक की पूर्व रजत पदक विजेता भाविना को महिलाओं के एकल 4 – 5 वर्ग के सेमीफाइनल में चीन की आठ बार की पैरालम्पिक चैम्पियन झांग बियान के हाथों 7-11, 5-11, 7-11 से पराजय का सामना करना पड़ा। वहीं सोनलबेन को तीन बार की पैरालम्पिक पदक विजेता दक्षिण कोरिया की जियू यूनप ने क्लास 3 सेमीफाइनल में सीधे गेम में हराया।

पिछली बार कांस्य जीतने वाली भाविना ने 2018 खेलों में रजत पदक जीता था। 40 वर्ष की बियान ने पिछले पैरा एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। गुजरात की 39 वर्ष की भाविना राष्ट्रमंडल खेलों की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता रह चुकी हैं। 4- 5 वर्ग में वे खिलाड़ी आते हैं जिनका शरीर के ऊपरी हिस्से पर पूरा नियंत्रण हैं, लेकिन पैरों या निचले हिस्से में विकार के कारण व्हीलचेयर पर हैं। जकार्ता में 2018 खेलों में युगल रजत पदक जीतने वाली सोनलबेन को गत चैम्पियन यून ने 11 -7, 11-5, 11-6 से मात दी । क्लास3 व्हीलचेयर श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनका बैठने का संतुलन कमजोर होता है और धड़ पर नियंत्रण सीमित होता है, लेकिन उनके हाथ और बाजू की कार्यक्षमता सामान्य या लगभग सामान्य होती है।

प्रदीप कुमार ने पुरुषों की भालाफेंक स्पर्धा में एफ53/54 श्रेणी में लगातार दूसरा रजत पदक जीता जबकि आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। प्रदीप ने एफ54 में 27.45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। आयुष ने एफ53 वर्ग में कांस्य पदक जीता। थाईलैंड के सहर दाम याएना ने एफ54 वर्ग में 23.13 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता। शारीरिक अक्षमता का स्तर अधिक होने से उन्हें अधिक रजा अंक मिले।

रजा अंक एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिये जब किसी प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गीकरणों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है तो विकलांगता के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को अंकों में बदला जाता है। ईरान के इरफान बंदोरी को 30.24 मीटर के रिकॉर्ड के साथ फिर स्वर्ण पदक मिला। एफ 53 एथलीटों की बाजुओं और हाथों में आमतौर पर पूरी कार्यक्षमता होती है, लेकिन उनके पेट की मांसपेशियों और रीढ़ के निचले हिस्से की मांसपेशियों में कोई गतिविधि नहीं होती जिसके कारण वे बिना सहारे के बैठ नहीं पाते। एफ 54 एथलीटों की बाजुओं की मांसपेशियां पूरी तरह से ताकतवर होती हैं और धड़ की मांसपेशियों में भी आंशिक से लेकर पूरी ताकत होती है। हालांकि धड़ के बीच के हिस्से और पैरों की मूवमेंट काफी हद तक प्रभावित रहती है।

प्रवीण कुमार को एशियाई पैरा खेलों में पुरूषों की शॉटपुट एफ11 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक मिला। 19 वर्ष के प्रवीण ने 13.86 मीटर का थ्रो फेंककर छह खिलाड़ियों में दूसरा स्थान हासिल किया। ईरान के आमिर हुसैन अलीपोर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ 14.99 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता जबकि उनके हमवतन माहदी ओलाद को रजत पदक मिला। एफ11 वर्ग में लगभग पूर्ण दृष्टिबाधित खिलाड़ी भाग लेते हैं।

प्रमोद भगत और मनीषा रामदास और कृष्णा नागर और नित्याश्री सुमति सिवन की मिश्रित युगल टीमों ने एशियाई पैरा खेलों में अपनी अपनी स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के कर लिये। नागर और नित्या ने चीनी ताइपै के वू यू येन और जिन जिया सियांग को 21-15, 21-10 से हराकर ग्रुप ए में दूसरा स्थान हासिल किया और एसएच6 श्रेणी के सेमीफाइनल में जगह बनाई। यह श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनका कद कम है, और ऐसा ‘एकोंड्रोप्लेसिया’ या अन्य आनुवंशिक बदलावों जैसी स्थितियों के कारण होता है। भगत और रामदास ने थाईलैंड के सिरिपोंग टीमारोम और चानिदा श्रीनावाकुल को 21-15, 21-14 से हराकर एसएल3-एसयू5 वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाई। पैरा बैडमिंटन में एसएल3 उन खिलाड़ियों के लिये हैं जिनके शरीर के निचले अंगों में विकार है और जो आधे कोर्ट पर ही खेलते हैं जबकि एसयू5 ऊपर के अंगों में अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिये है। मिश्रित युगल में दोनों श्रेणी के खिलाड़ियों की जोड़ी होती है।

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