नई दिल्ली : उमा काश्वी के क्रिकेटर बनने का सफर महज 7 साल की उम्र में शुरू हो गया था। उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके चाचा साई सत्य विजय ने अहम भूमिका निभाई। भतीजी के क्रिकेट करियर को निखारने के लिए वह रोजाना उन्हें 30 ओवर साइडआर्म गेंदबाजी का अभ्यास कराते थे। उमा को क्रिकेट में आगे बढ़ाने और उनके प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान देने के लिए साई सत्य विजय ने अपनी पूर्णकालिक आईटी की नौकरी तक छोड़ दी। चाचा के त्याग, समर्पण और उमा की मेहनत ने उनके क्रिकेटर बनने के सपने को नई दिशा दी। उमा काश्वी की मेहनत रंग लाई और 15 साल की उमा काश्वी महिला प्रीमियर लीग (WPL) की नीलामी में चुनी जाने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बन गईं। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 10 लाख रुपये के आधार मूल्य पर अपनी टीम में शामिल किया।
WPL में उमा काश्वी के चयन के बाद चाचा का फोन लगातार बज रहा
बुधवार 28 अक्टूबर 2026 की शाम से ही साई सत्य विजय का फोन लगातार बज रहा है। हर दूसरे मिनट उनके पास फोन आ रहे हैं। इनमें दोस्त, परिवारिक सदस्य, कोच और क्रिकेटर तक शामिल हैं। फोन करने वालों में श्रेयंका पाटिल और जेमिमा रोड्रिग्स जैसे नाम भी हैं। इसकी वजह उनकी भतीजी उमा काश्वी का महिला प्रीमियर लीग की नीलामी में इतिहास रचना है। 15 साल की उमा अब दिल्ली कैपिटल्स की टीम का हिस्सा होंगी।
उन्हें उनके आधार मूल्य 10 लाख रुपये में खरीदा गया। इस उपलब्धि से परिवार बेहद खुश है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साई सत्य विजय ने बताया, ‘‘मैं उमा और उसकी मां के साथ बिलासपुर में हूं। हम सभी बेहद खुश हैं। नीलामी में उसके चुने जाने के बाद से मैं लगातार रो रहा हूं। लोग मुझे सांत्वना देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ये सपना सच होने के आंसू हैं। यह बहुत मेहनत का नतीजा है।’’
7 साल की उम्र से क्रिकेट का जुनून, चाचा के सपने को साकार करने निकलीं उमा काश्वी
उमा काश्वी मध्य प्रदेश में ही महिला अंडर-19 टी20 चैलेंजर ट्रॉफी में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उमा के क्रिकेट खेलने की शुरुआत सात साल की उम्र में हुई थी। उनके क्रिकेटर बनने के पीछे उनके चाचा का वह सपना था, जिसे वह खुद पूरा नहीं कर पाए थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय ने बताया, ‘‘मैंने आंध्र प्रदेश में अंतर-जिला क्रिकेट खेला था, लेकिन आगे नहीं बढ़ पाया। उन दिनों माता-पिता बच्चों की क्रिकेट में आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षाओं का समर्थन नहीं करते थे। हालांकि, मैं आज भी सचिन तेंदुलकर का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। हर साल उनके जन्मदिन पर केक काटता हूं और मंदिर में प्रार्थना करता हूं। जब उमा छोटी थी तभी मैंने तय कर लिया था कि मैं जो हासिल नहीं कर पाया वैसा मुकाम वह हासिल करेगी।’’
उमा काश्वी को उनके घर के सामने ही बेंगलुरु के बेलंदूर में एक क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया गया, लेकिन विजय केवल अकादमी के प्रशिक्षण पर निर्भर नहीं रहना चाहते थे। वह व्यक्तिगत निगरानी और नियमित अभ्यास का महत्व जानते थे। विजय ने उमा की शारीरिक फिटनेस पर खास ध्यान दिया। दोनों सुबह दौड़ने जाते थे और उमा वहां 3000 कदम पूरे करती थीं।
इसके बाद शाम 4 से 6:30 बजे तक अकादमी में ग्रुप प्रैक्टिस होती थी। ग्रुप प्रैक्टिस खत्म होने के बाद विजय खुद उन्हें रोज 30 ओवर साइडआर्म गेंदबाजी करते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय ने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया, ‘‘पहले एक साल में ऐसा एक भी दिन नहीं था, जब उसके शरीर पर गेंद लगने का निशान न हो। उसे मौजूदा दौर की क्रिकेटर बनाने के लिए इतनी मेहनत की गई, लेकिन उसने भी हर चीज को स्वीकार किया। तब तक उसे क्रिकेट से प्यार हो चुका था।’’
बल्ले और किताबों से एक साथ साधा लक्ष्य, पढ़ाई में भी आगे रहीं उमा काश्वी
उमा के चयन के बाद बधाइयों का सिलसिला जारी है। इनमें उनकी नई कप्तान और आदर्श जेमिमा रोड्रिग्स का संदेश भी शामिल है। जेमिमा रोड्रिग्स ने उनका स्वागत करते हुए लिखा, ‘‘वेलकम होम।’’ उमा की मां एक कॉरपोरेट कंपनी में एसएपी लीड हैं। उन्होंने इस उपलब्धि की जानकारी उमा के पिता को दी।
उमा के पिता एक आईटी कंपनी में उपाध्यक्ष हैं। परिवार में पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी गई, लेकिन इससे उमा की क्रिकेट की राह में बाधा नहीं आई। विजय के मुताबिक, उमा ने अब तक लगातार 90 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय ने कहा, ‘‘काश्वी स्कूल नहीं जाती, लेकिन उसने अब तक 90% अंक हासिल किये हैं। वह पढ़ाई में भी बहुत ऊंचे मानक की उम्मीद करती है। उस कम अंक पसंद नहीं। अगर अंक कम हुए तो बहुत दुखी होती है।’’
13 साल की उम्र में कोच अर्जुन देव की अकादमी पहुंचीं उमा काश्वी
जब उमा काश्वी 13 साल की थीं, तब विजय उन्हें कोच अर्जुन देव की अकादमी लेकर गए। अर्जुन देव की अकादमी ने श्रेयंका पाटिल के क्रिकेट करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई है। अर्जुन को शुरुआती कुछ अभ्यास सत्रों में ही अहसास हो गया था कि उमा की प्रतिभा उनकी उम्र से कहीं आगे है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अर्जुन देव के मुताबिक, उमा खेल को समझने और मैच जीतने की क्षमता के मामले में अपनी उम्र से काफी परिपक्व थीं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अर्जुन ने बताया, ‘‘यह स्पष्ट था कि खेल की परिपक्वता और समझ के मामले में वह अपनी उम्र से बहुत आगे थीं। वह जानती हैं कि क्रिकेट कैसे खेलना है और मैच कैसे जीतने है।’’ अर्जुन देव ने कहा, ‘‘इस कारण हमारे सामने लगभग यह चुनौती थी कि उन्हें कुछ चीजें फिर से सिखाएं, जिन्हें वह पहले से जानती थीं। हालांकि, उमा काश्वी हमेशा जीतने का कोई न कोई रास्ता खोज लेती थीं। यही उनकी सबसे खास खूबी थी।’’
श्रेयंका पाटिल को देखकर उमा काश्वी में जगी आगे बढ़ने की चाह
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोच अर्जुन देव का मानना है कि श्रेयंका पाटिल को करीब से आगे बढ़ते देख उमा काश्वी की भी अगले स्तर तक पहुंचने की इच्छा मजबूत हुई। किसी परिचित खिलाड़ी को ऊंचे स्तर पर सफलता हासिल करते देखना युवा खिलाड़ियों को विश्वास दिलाता है कि वह भी ऐसा कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अर्जुन देव ने कहा, ‘‘करीब के किसी खिलाड़ी को ऐसे आगे बढ़ते देखना, आपको यह महसूस कराता है कि आप भी वहां पहुंच सकते हैं। उमा श्रेयंका के काफी करीब हैं और उनकी कई बार बातचीत हुई है। श्रेयंका भी इस बात से बेहद खुश हैं कि उमा काश्वी अब WPL का हिस्सा हैं।’’
चाचा ने नौकरी छोड़ी, भतीजी ने मेहनत से पाया मुकाम; WPL तक पहुंचीं उमा काश्वी
उमा काश्वी के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए विजय ने अपनी फुल-टाइम आईटी की नौकरी छोड़ दी, ताकि वह उनके विकास पर अधिक ध्यान दे पाएं। अब उमा काश्वी के WPL नीलामी में चुने जाने के बाद उन्हें अपने फैसले का नतीजा दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय ने कहा, ‘‘वैभव सूर्यवंशी आईपीएल नीलामी में चुने जाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी थे और उमा काश्वी WPL नीलामी में चुनी जाने वाली सबसे युवा खिलाड़ी हैं। आज उन्होंने रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा लिया।’’


