नई दिल्ली : भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप मुकाबले को लेकर चल रहे विवाद पर अब समाधान की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी क्रम में 8 फरवरी की देर शाम लाहौर में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक अहम बैठक हुई। PCB के निमंत्रण पर बांग्लादेश ने भी इस मीटिंग में हिस्सा लिया। बैठक में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने अपने देश का प्रतिनिधित्व किया, जबकि ICC के डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा भी लाहौर पहुंचे। इस दौरान भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर बने गतिरोध पर लंबी चर्चा की गई।
ICC मीटिंग में PCB ने रखीं 3 बड़ी मांगें
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में PCB ने ICC के सामने तीन अहम मांगें रखीं—रेवेन्यू में अधिक हिस्सेदारी, भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली और मैच के बाद हैंडशेक प्रोटोकॉल के पालन को सुनिश्चित करना। वहीं, वर्ल्ड कप से बाहर किए गए बांग्लादेश की ओर से भी संभावित मुआवजे की मांग उठाई जा सकती है। इससे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ मुकाबला खेलने को तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर। हालांकि, द्विपक्षीय सीरीज ICC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं और हैंडशेक जैसी परंपराएं अनिवार्य नहीं होतीं।
भारत-पाक मैच विवाद के पीछे बांग्लादेश कनेक्शन
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में अपने T20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार किया था और वेन्यू बदलने की मांग की थी। ICC ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसके बाद बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ मुकाबला खेलने से इनकार करते हुए कोलंबो में होने वाले मैच का बहिष्कार करने का रुख अपनाया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
श्रीलंका ने जताई नाराज़गी, ICC से जवाब की मांग
भारत-पाकिस्तान मुकाबले के संभावित बहिष्कार को लेकर श्रीलंका ने भी कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका ने साफ तौर पर कहा है कि अगर यह मैच रद्द होता है तो देश के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही श्रीलंका ने पाकिस्तान को वह दौर भी याद दिलाया, जब उसे खुद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बहिष्कार का सामना करना पड़ा था। श्रीलंका क्रिकेट टीम ने उस समय पाकिस्तान में क्रिकेट की वापसी में अहम भूमिका निभाई थी, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

